अपने फ्लॉप शो को ख़त्म करने का बहाना ढूंढ रहे थे अन्ना, देवेन्द्र फडणवीस ने मदद की

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सौतुक डेस्क/

तथाकथित गांधीवादी और सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे को किसी तरह लाज बचाने का मौका तब मिला जब उनसे मिलने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस आये और बताया कि सरकार उनकी मांग को लेकर सैधांतिक तौर पर सहमत है. फिर क्या था, हजारे ने अगस्त तक का मौका देकर अपना आन्दोलन ख़त्म कर दिया.

इस बार का अन्ना हजारे का शो पूरी तरह फ्लॉप रहा. उनकी सभाओं में लोग नहीं आ रहे थे. अन्ना के इस बार के आन्दोलन को देखकर ऑनलाइन दुनिया में ढेरों चुट्कुलें शेयर किये जा रहे थे. जैसे, ‘अन्ना के आन्दोलन में बस टेंट वाले बैठे हैं. वह भी इस डर से कि अन्ना कहीं बिना पैसा दिए दिल्ली से अपने गाँव की तरफ रवाना न हो जाए.’

जब उन्होंने आन्दोलन करने की घोषणा की थी तभी लोगों ने अनुमान लगाया था कि इस बार यह शख्स मुंह की खाने वाला है. लोगों का कहना था कि जो पढ़ा-लिखा और समझदार तबका है और जिसने अन्ना को जंतर-मंतर वाले आन्दोलन में समर्थन दिया था, उसका अन्ना से मोह भंग हो चुका है. दूसरी तरफ मोदी सरकार के समर्थक जो कांगेस के खिलाफ आन्दोलन में तो भाग लिए थे पर वो अपने सरकार के खिलाफ कुछ सुनने को तैयार नहीं है. इस तरह अन्ना के इस बार के आन्दोलन में लोगों के आने की सम्भावना काफी कम थी. यह अनुमान सही साबित भी हुआ.

एक तबके का कहना था कि इस सरकार को आये चार साल होने को है. इस चार साल में देश ने बहुत सारी घटनाएं हुईं. देश ने ढेर सारी समस्याएं देखी पर अन्ना हज़ारे चुप रहे.  अब जब फिर से चुनाव का मौसम आया है तो अन्ना अपनी रोटी सेंकने चले हैं.

अब जब फिर से चुनाव का मौसम आया है तो अन्ना अपनी रोटी सेंकने चले हैं.

जो भी हो, अन्ना हजारे ने केंद्र सरकार द्वारा उनकी मांगें ‘सैद्धांतिक रूप से’ स्वीकार करने बाद गुरुवार को अपना बेमियादी अनशन खत्म कर दिया.  सरकार ने हालांकि फिलहाल किसी समयसीमा में कोई कार्य योजना बताने से परहेज किया है. इससे पहले ‘ठोस कार्ययोजना’ के साथ ‘निश्चित समय सीमा’ की मांग कर रहे हजारे ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार ने आश्वासन दिया है कि सभी वादे जल्द पूरे किए जाएंगे. इसके बावजूद उन्होंने सरकार को अगले छह महीने में कोई ठोस कार्ययोजना नहीं मिलने की स्थिति में फिर से आंदोलन की चेतावनी दी.

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार शाम अन्ना से मुलाकात कर कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय उनकी केंद्र में लोकपाल और राज्यों में लोकायुक्तों की नियुक्ति, फसलों की उचित कीमतों के लिए एम.एस. स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू करने और नए चुनाव सुधार की मांगों के प्रति ‘सकारात्मक’ है.

रामलीला मैदान में मौजूद लगभग 3000 लोगों को संबोधित करते हुए अन्ना ने कहा, “सरकार कृषि उत्पादों की मूल लागत की 1.5 गुनी कीमत देने को तैयार है. सरकार ने यह भी कहा है कि जल्द ही लोकपाल नियुक्त किए जाएंगे. उन्होंने कहा है कि चुनाव सुधार, चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आता है.”

अगर आपको पिछले आन्दोलन याद हो तो इस बयान और लोगों की संख्या से आप खुद अंदाजा लगा सकते हैं कि अन्ना हजारे अपने शो को फ्लॉप होते देख इसे ख़त्म करने का मौका खोज रहे थे.

बीते शुक्रवार, 23 मार्च को अन्ना हजारे सशक्त लोकपाल व किसानों को फसलों के वाजिब दाम देने सहित अपनी मांगों को लेकर रामलीला मैदान में कई राज्यों से आए किसानों के साथ उपवास पर बैठे थे। इससे पहले उन्होंने साल 2011 में भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन छेड़ा था, जिसे देशव्यापी समर्थन मिला था और जिस आंदोलन से आम आदमी पार्टी ने जन्म लिया था।

–आईएएनएस से इनपुट के साथ

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