दिल्ली नहीं है देश के प्रदूषण की वास्तविक तस्वीर

0

सौतुक डेस्क/

दिल्ली की हवा ने न केवल राष्ट्रीय बल्कि अन्तराष्ट्रीय मीडिया में भी अपने हिस्से से अधिक जगह ले ली है. दिल्ली के पीएम 2.5 पर मीडिया और सोशल मीडिया पर चर्चा देखकर एक सज्जन ने तो यहाँ तक कह दिया कि लगता है यह देश प्रदूषण पहली बार देख रहा है. वास्तविकता तो यह है कि देश में अन्य जगहों पर इतने डरावने तरीके के प्रदूषण हैं कि लोग शायद डर से उनकी चर्चा भी नहीं करते. अगर इन समस्याओं को दिल्ली के पीएम 2.5 के बराबर स्पेस भी मिल गया होता तो देश से प्रदूषण की समस्या कब की ख़त्म हो गई होती. दिल्ली के पीएम 2.5 से अधिक खूंखार प्रदूषण अगर लोगों की चर्चा में पहले आ गया रहता तो देश कब का प्रदूषण मुक्त हो चुका होता.

आप भी सोचिये क्या आप सचमुच में देश में प्रदूषण की स्थिति से चिंतित हैं. क्या आप प्रदूषण  के इन आंकड़ो से परिचित हैं?

1– देश में प्रति दिन करीब 4,400 करोड़ लीटर (44,000 MLD or Million litre per day)का कचरा उत्पन्न होता है जिसमें से महज 120 करोड़ लीटर (1200 एमएलडी) कचरे का ही सही से निष्पादन हो पाता है. यानि कुल कचरे का महज़ 2.7 प्रतिशत. बाकी का 42,800 एमएलडी कचरा कहाँ जाता है? यह कचरा नदी, पानी के अन्य स्रोत और जमीन में समा जाता है. यहीं का पानी हम लोग घरेलु कार्यों में इस्तेमाल करते हैं. यह बताना नहीं होगा कि इससे कितने रोग होते होंगे. यह सरकारी आंकड़ा हैं.

2– आपके शहर के नगरपालिका या नगर निगम के अंदर उत्पन्न कुल कचरे का महज़ 5 से 8 प्रतिशत ही नियम से निष्पादित होता है. इसमें प्लास्टिक की मात्रा बहुत अधिक है. 92 से 95 प्रतिशत कूड़ा ऐसे ही फेंक दिया जाता है. इससे वहाँ की मिटटी, पानी और हवा प्रदूषित होती है.

3– दिल्ली का प्रदूषण तो कुछ भी नहीं. देश में 87 ऐसे जगह चिन्हित हो चुके हैं जो बुरी तरह प्रदूषित हैं और इनमें दिल्ली शामिल नहीं है. ये व्यावसायिक क्लस्टर है जहां मुख्यतः कपड़े, दवाईयां और रसायन के उद्योग हैं. इन जगहों पर मिट्टी, हवा, पानी बुरी तरह प्रदूषित है जिससे जानलेवा बीमारियाँ होती है. इन जगहों की पहचान 2010 में हो गई थी पर वहाँ सुधार के लिए अब तक कुछ नहीं हुआ है.

4– देश में कुल 92 ऐसे छोटे-बड़े शहर हैं जहां पीएम 2.5 या फाइन पार्टिकुलेट मैटर कम से कम पांच से दस बार खतरे के निशान से ऊपर चला जाता है. और पीएम 2.5 तो हवा को प्रदूषित करने का एक कारण भर है. इसके अतिरिक्त ऐसे दर्जनों कारक हैं जैसे NOx, CO, PAH, Benzene, VOC इत्यादि, जो इन शहरों की हवा को जहरीला बना रहे हैं. इनकी मात्रा भी तय सीमा से ऊपर है. NOx नाइट्रोजन ऑक्साइड का जेनेरिक नाम है जो हवा के प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण है. नाइट्रिक ऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड जो हवा में स्मोग और एसिड बरसात के लिए वास्तविक रूप से जिम्मेदार गैस हैं वही मिलकर NOx बनाती हैं. CO जिसे आप कार्बन मोनोऑक्साइड कह सकते हैं. इसका सबसे बड़ा स्रोत गाड़ियों से निकलने वाला धुंआ है. इन सारे कारणों पर विस्तार से चर्चा कभी आगे की जायेगी.

5– कोयले से चलने वाले विद्युत् सयंत्र SO2, NOX, mercury इत्यादि का सबसे बड़ा स्रोत है. इन सारी चीजों से छोटी-मोटी बीमारी नहीं, बल्कि कैंसर जैसे रोग होते हैं.

6– देश में करीब 127 ऐसी जगहें हैं जहां गैरकानूनी तरीके से जहरीला कचरा, रसायन फेंका जा रहा है जो वहाँ की मिट्टी और पानी को खराब कर रहा है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here