बाबरी विध्वंस के 25 साल: अयोध्या के इस कानूनी विवाद को दो सदी होने को हैं

0

सौतुक डेस्क/

आज बाबरी विध्वंस को पच्चीस साल हो गए. वैसे तो 6 दिसंबर 1992 की यह घटना पर हमारे देश के इतिहास में एक ऐसा काला अध्याय है, जिसने पूरे देश की सामाजिक और राजनीतिक दशा दिशा बदल दी. पर देखा जाए तो इस अयोध्या विवाद का इतिहास बहुत पुराना है. आईये इसके इतिहास पर एक नज़र डालते हैं.

  • बाबरी मस्जिद का निर्माण मुग़ल शासक बाबर ने सन् 1528 में करवाया था. हिन्दू मान्यता के अनुसार अयोध्या भगवान राम  की जन्मभूमि है और वहाँ पहले एक मंदिर हुआ करता था. कुछलोगों की मान्यता है कि मंदिर तोड़कर ही मस्जिद बनाया गया था.
  • इस पर विवाद मूल रूप से 1853 में तब शुरू हुआ जब हिन्दू और मुस्लिम समूह पूजास्थल के विवाद को लेकर आपस में भिड़ गए.
  • साल 1869 में ब्रिटिश सरकार ने एक बाड़ लगवाकर दोनों धर्मों के पूजा स्थलों के स्थान का बंटवारा कर दिया. इसके अनुसार भीतरी प्रांगण मुसलमानों को दे दिया गया और बाहरी प्रांगणहिन्दुओं को.
  • इस मामले में पहला केस 29 जनवरी, 1885 में जन्मस्थान के महंत रघुवीर दास के द्वारा दायर किया गया. यह केस भारत राज्य के सचिव ( Secretary of State for India in Council )केखिलाफ दायर किया गया था जिसमें राम चबूतरा पर मंदिर बनाने की इजाज़त मांगी गई थी.
  • स्वतंत्र भारत में इस मामले का पहला केस 1949 में दायर किया गया. सन् 1949 में अचानक मस्जिद के भीतर राम की एक मूर्ति पायी गयी. मुसलामानों का कहना था कि यह मूर्ति हिन्दूसमुदाय के कुछ लोगों ने जानबूझकर रखी है. इस बात पर काफी विरोध और प्रदर्शन हुआ. दोनों पक्षों ने केस दायर किये. फलस्वरूप, सरकार ने पूरे प्रांगण को विवादित घोषित कर मुख्य द्वारपर ताला लगा दिया गया. इस केस को दायर करने वाला निर्मोही अखाड़ा था जिसने फिर से दस साल बाद केस दायर किया.
  • इसी बीच उत्तर प्रदेश वक्फ बोर्ड ने भी 1961 में केस दायर कर दिया. वक्फ बोर्ड बाबरी मस्जिद का मालिकाना हक़ चाहता था.
  • सन् 1986 में एक याचिकाकर्ता हरिशंकर दुबे की याचिका पर जिला मजिस्ट्रेट ने मस्जिद के ताले खोलने की अनुमति दी ताकि लोग ‘दर्शन’ कर सकें. इस बात पर मुसलामानों ने बाबरी मस्जिदएक्शन कमिटी का गठन किया.
  • 1989 में फैज़ाबाद कोर्ट ने उच्च न्यायलय की स्पेशल बेंच को इस मामले से जुड़े सभी चार लंबित केस स्थानांतरित कर दिए. उसी साल विश्व हिन्दू परिषद् (विहिप) ने विवादित मस्जिद के ठीकसामने एक राम मंदिर की नींव रखी.
  • इसके अगले ही साल विहिप के कार्यकर्ताओं ने मस्जिद को क्षति पहुंचाने की कोशिश की, पर तब प्रधानमंत्री चंद्र शेखर ने इसे बातचीत से सुलझाने की कोशिश की, जो कि नाकाम रही.
  • 6 दिसंबर 1992 के उस दिन ने, इस विवाद को नया मोड़ दे दिया. भारत के इतिहास में उस काले दिन में लगभग डेढ़ लाख कार सेवकों ने मिलकर  मस्जिद को लगभग ध्वस्त कर दिया. इससेपूरे देश में साम्प्रदयिक दंगे शुरू हो गए जिसमें 2 ,000 से अधिक लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी. उस समय उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार थी और कल्याण सिंह मुख्यमंत्री थे.
  • इस घटना के बाद, अगले साल, उमा भारती, लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी जैसे बड़े नेताओं पर भड़काऊ भाषण देने और भीड़ को उकसाने के लिए केस दर्ज हुआ, लेकिन 4 ,मई2001 को सीबीआई कोर्ट ने इन सब लोगों के खिलाफ कार्यवाई रोक दी.
  • सितम्बर 30, 2010 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बाबरी मस्जिद और राम जन्मभूमि के कुल 2.77 एकड़ जमीन को तीन हिस्सों में बराबर बराबर बाँट दिया. ये तीन हिस्से निर्मोही अखाड़ा,सुन्नी वक्फ बोर्ड, और रामलला विराजमान के बीच में बराबर बांटे गए.
  • अलबत्ता इस केस को मई 9, 2011 को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी गयी. सर्वोच्च न्यायालय ने विवादित भूमि पर कोई कार्यवाही करने पर प्रतिबन्ध लगा दिया .
  • 25 फ़रवरी 2013 को सर्वोच्च न्यायालय ने विवादित भूमि के कवर को नए पोलीथिन से बदलने की इजाजत दी. इसके लिए शर्त रखी गयी कि नया कवर पुराने के जैसे ही हो. आकार औरगुणवत्ता दोनों में.
  • अगस्त 11, 2017 को न्यायालय ने सभी पक्ष को अपने समर्थन  में मौजूद सभी गवाह, बयान इत्यादि को जमा करने के लिए तीन महीने का समय दिया.  अब यह समयसीमा समाप्त हो गई हैऔर इस महीने न्यायालय का फैसला आ सकता है.
  • नवम्बर 5 को सर्वोच्च न्यायालय में इसकी सुनवाई थी. अगली सुनवाई फ़रवरी में होगी.

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here