उमर खालिद पर चली गोली दोहरा भय पैदा करती है

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चन्दन पांडेय/

उमर खालिद पर पिस्तौल से गोली चली। ऐसे में कुछ लोग हैं जो फासिज्म के पराजय को लेकर इतने उत्साहित हैं इस घटना से डरने के बजाय उच्श्रृंखल किस्म के आदर्शवाद वाली बातें लिखे जा रहे हैं, मसलन अतीत फासिस्टों पर तोप के गोले बरसायेगा या फासिस्ट जो हैं वो भेड़िये हैं और उनके पास मशाल नहीं है। इन लोगों को अंदाजा भी नहीं है कि आज की इस घटना का अभिप्राय क्या है?

एक बार तो हमें यह ठोस सत्य जान लेना चाहिए कि ऐसी घटनाओं के पीछे शक्तियाँ कौन सी हैं? उनका उद्देश्य क्या है? और ये शक्तियाँ अपने उद्देश्यपूर्ति के लिए क्या कर सकती हैं? क्या क्या कर सकती हैं?

पिछले दिनों जेन मेअर की एक किताब पढ़ी- डार्क मनी: दी हिडेन हिस्ट्री ऑव बिलिनीयर्स ( billionaires) बिहाइंड दी राइज ऑव रेडिकल राइट।

अरबपति लोग जान चुके हैं कि दक्षिणपंथ ही उनके रथ का पहिया है

जेन दो टूक कहती हैं कि लोकतंत्र का अपहरण कर उसे धनिकतंत्र ( प्लुटोक्रेसी) बना दिया गया है, जिसे हम तुर्की-ब-तुर्की कहते रहते हैं कि कॉरपोरेट्स ही सरकार चला रहे हैं। वैसे तो यह किताब इस बात का विधिवत अध्ययन करती-कराती है कि क्यों आखिर अपनी न्यूनतम लोकप्रियता के बावजूद, इलीट तबके के विरोध के बावजूद ट्रम्प चुनाव जीत गया।

अरबपति लोग जान चुके हैं कि दक्षिणपंथ ही उनके रथ का पहिया है। किताब की शुरुआत ही कोच इंडस्ट्रीज और उसके कारनामों से होती है। अमरीका की दूसरी सबसे बड़ी प्राइवेट कम्पनी, 115 बिलियन के कारोबार वाली कम्पनी, 120000 कर्मचारियों वाली कम्पनी ने किन किन तरीकों से अमरीका में दक्षिण पंथ को मजबूत किया उसे पढ़ना सिहरन पैदा करता है। इसके संस्थापक फ्रेड कोच अनूठे ‘लिब्रटेरियन’ थे जिन्होंने सदी के दो कट्टर दुश्मनों को एक समान साधे रखा और उनके देश में व्यवसाय किया: स्टालिन और हिटलर। सोचिए। इस कम्पनी के वर्तमान मालिकों के कारनामे हमें डराते हैं और यकीन भी दिलाते हैं कि इस रास्ते अब वापस लौटना शायद सम्भव नहीं।

किताब तो जो है सो है, उस पर तो तसल्ली से लिखना होगा लेकिन कहना मैं यह चाहता हूँ कि दक्षिणपंथ भारत में इस कदर मजबूत हो गया है और कॉरपोरेट्स ने उसे अपने लुभावने चंदो से इतना मजबूत कर दिया है कि अब कोई अच्छे दिन शायद ही आएं।

उमर खालिद पर चली गोली दोहरा भय पैदा करती है। जिन्होंने गोली चलाई हो सकता है लोगों ने उसे देखा नही लेकिन उसके इस अपराध में शामिल वो अरबपति लोग हैं, राजनीतिक पार्टियाँ उनकी गुलामी में ही महफूज हैं।

उमर खालिद या जितने भी लोग किसी मानवधर्मी कार्य में लगे हैं, उन्हें सतर्क रहने की जरूरत है।

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