आसिया बीबी केस: पाकिस्तान उबल रहा है और भारत को एक सीख भी दे रहा है

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अनिमेष नाथ/

एक ईसाई महिला आसिया बीबी की वजह से पूरा पाकिस्तान उबल रहा है. हाल ही में न्यायालय के आदेश के बाद जेल से बाहर आई आसिया कई देशों का दरवाजा ठकठका रहीं हैं कि कहीं रहने का ठिकाना मिल जाए. अब तक की खबर के अनुसार, कोई देश तैयार नहीं हुआ है. देखने वाली बात है कि आसिया जो अभी जान बचाने के लिए पकिस्तान में कहीं गुमनामी के दिन काट रहीं हैं वह अपने मुल्क से निकल पाने में सफल हो पाती हैं या नहीं. अपनी जान बचा पाती हैं कि नहीं! सरकार और न्यायालय के आदेश के बावजूद भी यह स्थिति बनी हुई है और 31 अक्टूबर को जेल से रिहा होने के बाद आसिया कहाँ है यह किसी को पता नहीं है.

क्या है आसिया का मामला?

पांच बच्चों की माँ आसिया बीबी को 2010 में मौत की सजा सुनाई गई थी. उनपर आरोप था ईश निंदा का. कुछ लोगों से आपसी विवाद के बाद 2009 में पड़ोसियों ने आरोप लगाया कि आसिया ने मोहम्मद के बारे में कुछ गलत शब्दों का इस्तेमाल किया था. एक साल के अन्दर एक लोक अदालत ने आसिया को दोषी करार देकर मौत की सजा सुना दी थी. आसिया बीबी को,  14 जून 2009 को तीन मुस्लिम महिलाओं के साथ बहस के दौरान पैगम्बर मोहम्मद के बारे में “अपमानजनक एवं व्यंग्यात्मक” बातें बोलने का दोषी माना गया था.

कोर्ट ने आसिया बीबी को पैगम्बर मोहम्मद को कथित रूप से बदनाम करने के लिए पाकिस्तान दंड सहिंता की धारा 295 के तहत दोषी पाया था. इस अपराध की अनिवार्य सजा मौत है और इस तरह आसिया को मृत्यु दंड देने का फरमान सुना दिया गया.

सनद रहे कि आसिया ईसाई धर्म से ताल्लुक रखती हैं और उनका मामला पकिस्तान के ईश निंदा कानून की अवहेलना करने वाले तमाम केसों में कुछ गिने-चुने हाई प्रोफाइल मामलों में आता है. राष्ट्रीय-अन्तराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन, यूरोप के देशों ने भी इस मामले में पाकिस्तान की भर्त्सना की थी.

इस केस में जिन भी लोगों ने आसिया के पक्ष में आवाज उठाने की कोशिश की उनकी हत्या कर दी गई और न्यायालय पर इसका भरपूर दबाव था.

जैसे 2011 में पंजाब के पूर्व गवर्नर सलमान तासीर ने आसिया को समर्थन देने की बात कही थी इसके बाद दिन दहाड़े गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गयी थी.

स्थानीय अदालत के फैसले को लाहौर उच्च न्यायालय ने अक्टूबर 2014 में सुनवाई के दौरान बरकरार रखा.

चारों तरफ से उम्मीद हार चुकी आसिया बीबी के एक वकील के माध्यम से वहाँ के सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था और अपनी सजा रद्द करने की गुहार लगाई थी.

सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2015 में आसिया बीबी की अपील स्वीकार की थी तथा पहली सुनवाई 13 अक्टूबर 2016 को तय की थी.

आसिया बीबी ने अपने बचाव में बताया कि 14 जून 2009 को उनके, आसमा और माफिया के बीच झगड़ा हुआ था क्योंकि मेरे ईसाई होने के कारण उन दोनों ने मेरे द्वारा लाया गया पानी पीने से मना कर दिया था.

उन्होंने दावा किया कि “कुछ विवादास्पद बयानों का आदान-प्रदान हुआ था” , जिसके बाद माफिया और आसमा ने कारी मुहम्मद सलाम (जिन्होंने ने माफिया और आसमा को कुरान पढाई थी) के साथ मिलकर आसिया के खिलाफ ईश निंदा का मामला बनाया था.

खैर, सर्वोच्च न्यायालय ने आसिया के पक्ष में फैसला सुनाया और उनको रिहा करने की इजाज़त दी. लेकिन इस फैसले के विरोध में लोग सड़क पर आ गए और बड़े-बड़े आन्दोलन होने लगे. इसका नतीजा यह हुआ कि सर्वोच्च न्यायलय के आदेश के बाद भी आसिया को कई महीने जेल में गुजारने पड़े.

भारत में में भी हाल में घटी कुछ घटनाएं इससे मिलती-जुलती दिखती हैं और डराती हैं कि हम धीरे-धीरे पकिस्तान बनने की राह पर तो नहीं है. भारत में सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिया कि सबरीमाला मंदिर में हर उम्र की महिलायें जा सकती हैं. न्यायालय के इस फैसले का पुरजोर विरोध हो रहा है. विरोध करने वाले में और कोई नहीं बल्कि देश में सत्तारूढ़ दल ही शामिल है. दूसरे फैसले में सर्वोच्च न्यायालय ने वायु प्रदूषण को देखते हुए पटाखे फोड़ने के लिए समय सीमा निर्धारित कर दी पर एक ख़ास विचारधारा के लोगों ने इस फैसले को मानने से इनकार कर दिया. आज दिल्ली जैसे शहरों में सांस लेना दूभर है और हवा में प्रदूषण खतरे के निशान से काफी ऊपर है.

ऐसे में यह समझना होगा कि भारत और पकिस्तान की स्थिति फिलहाल तो काफी अलग है लेकिन अगर सावधानी नहीं बरती गई तो इन दोनों देशों (एक सेक्युलर और एक धार्मिक देश) के बीच का फासला घटता जाएगा.

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