कौन बनेगा करोड़पति में अमिताभ क्यों भटके हुए नज़र आ रहे हैं?

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अनुज कुमार पाण्डेय/

‘कौन बनेगा करोड़पति’ का नौंवां सीजन इस बार जब से सोनी चैनल पर प्रसारित होना शुरू हुआ है इसमें एक अजीबो-गरीब परिवर्तन देखने को मिल रहा है. यद्यपि यह शो हमेशा की तरह इस बार भी काफी सुर्खियां  बटोर रहा है. पिछले कई संस्करणों की तरह इस बार भी बॉलीवुड के जाने-माने अभिनेता अमिताभ बच्चन इस शो को होस्ट कर रहे हैं. शो के नियमों में एक दो बदलाव भर किये गए हैं. जैसे प्रतियोगी को दी जाने वाली चार लाइफ लाइनों में से एक ‘फ़ोन अ फ्रेंड’ में सामान्य फ़ोन कॉल की बजाय वीडियो कॉल का प्रयोग किया गया है. बताया जाता है कि ऐसा डिजिटलाइजेशन को बढ़ावा देने के लिए किया गया है. साथ ही प्रतियोगियों द्वारा जीती गई राशि भी ऑनलाइन उनके खातों में भेजी जा रही है.  याद रहे कि वर्तमान सरकार डिजिटलाइजेशन और ऑनलाइन ट्रान्सफर दोनों को काफी बढ़ावा देना चाहती है. यहाँ तक तो इस शो में हुए परिवर्तन स्वागत योग्य है.

लेकिन इसके बाद का जो अनकहा परिवर्तन है वह सवालों के घेरे में हैं. सोशल मीडिया पर इस शो में हुए इस अनकहे परिवर्तन पर बात शुरू हो गई है.

कहा जा रहा है कि इस शो के माध्यम से अमिताभ बच्चन, मोदी सरकार के एजेंडे को आगे बढ़ा रहे हैं, यानि उनका प्रचार-प्रसार कर रहे हैं. ऐसा शो में पूछे जा रहे सवालों की वजह से कहा जा रहा है. शो में पूछे गए कई सवाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्र सरकार की नवीन योजनाओं, बीजेपी नेताओं और हिंदुत्व जैसे मुद्दों पर आधारित हैं. कुछ बानगी देखिये.

1- जुलाई 2017 में, नरेंद्र मोदी इनमें से किन देशों की यात्रा करने वाले पहले प्रधानमंत्री बने.

2- ‘एक देश एक टैक्स’ इनमें से किस सरकार द्वारा की गई पहल है.

3-. दो हज़ार के नोट पर इनमें से किसका चित्र अंकित है.

4-. उज़्मा अहमद का विवाह बंदूक की नोक पर एक व्यक्ति से विवाह करने के लिए मजबूर किया गया था. इनमें से किस केंद्रीय मंत्री ने उन्हें भारत वापस लाने में मदद की.

5- यह आवाज किसकी है? विकल्पों में जया बच्चन और स्मृति ईरानी आदि का नाम शामिल है.

इसी तरह के कई अन्य सवाल इस शो में अब तक पूछे जा चुके हैं. हालांकि ऐसे सवालों का शो में होना कोई बड़ी बात नहीं लगती है लेकिन कुछ बातों पर गौर किया जाए तो सोशल मीडिया पर उठाए जा रहे इन सवालों में काफी दम नज़र आता है.

सबसे पहली बात कि इस शो की प्रायोजक अम्बानी समूह की कंपनी जियो टेलीकॉम है, जिसके विज्ञापन में स्वयं नरेंद्र मोदी अखबारों के पहले पन्ने पर नज़र आ चुके हैं. चूंकि प्रायोजक एक बड़ी धनराशि चुका कर शो के अधिकार खरीदता है, ऐसे में शो के कंटेंट पर ‘परोक्ष’ रूप से प्रायोजक का भी नियंत्रण होता है. इसके अतिरिक्त स्वयं अमिताभ बच्चन के नरेंद्र मोदी व गुजरात से पुराने रिश्ते रहे हैं. अमिताभ लंबे अरसे से गुजरात पर्यटन के ब्रांड एम्बेसडर/प्रचारक रहे हैं. हाल ही में उन्हें सरकार के सबसे बड़े अभियान, स्वच्छ भारत मिशन का ब्रांड एम्बेसडर बनाया गया है. कई अन्य शासकीय योजनाओं का भी वह प्रचार कर रहे हैं. इन सब के अलावा प्रमुख रूप से जो आरोप लगाया जा रहा है वह यह है कि अमिताभ बच्चन का नाम सपरिवार ‘पनामा लिस्ट’ में शामिल है. वही पनामा लिस्ट जिसमें नाम होने की वजह नवाज शरीफ को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। कहा जा रहा है कि पनामा के कहर से बचने के लिए अमिताभ बच्चन मौजूदा सरकार की हाँ में हाँ मिलने के लिए विवश हैं. नरेंद्र मोदी मीडिया और मीडियम की ताकत को बखूबी पहचानते हैं और इस तरह के किसी भी मौके का इस्तेमाल करना उन्हें आता है.

सोशल मीडिया पर उठाए जा रहे यह सवाल भले ही शो की टी आर पी पर कोई असर न डाल पाएं लेकिन इनसे सदी के महानायक अमिताभ बच्चन की साख पर बट्टा ज़रूर लग रहा है, साथ ही सरकार की मंशा पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं. क्या अमिताभ बच्चन की जान पनामा नाम के उस तोते में अटकी हुई है, जिसका इस्तेमाल सरकार अपने हितों के लिये कर रही है?

क्या हम वाकई सरकारी सेंसरशिप के दौर में जी रहे हैं?

1 COMMENT

  1. यह सारा लेख मूर्खतापूर्ण है। इक्का दुक्का सवाल सरकारी नीतियों के बारे में होना स्वाभाविक है। अमिताभ जी की साख पर कोई बट्टा नहीं लग रहा है। पर सेकूलर सम्प्रदाय की गां$ में मिर्च जरूर लग रही है।

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