अमेरिका: मरने मारने पर उतारू लोग

0

उमंग कुमार/

रविवार को अमेरिका के लॉस वेगास में एक बन्दूकधारी ने संगीत समारोह में अन्धाधुन्ध गोली चलाई जिसमे पचास के करीब लोगों की जान चली गई. सैकड़ो घायल हो गए. अधिकारियों ने मीडिया को बताया कि गोली चलाने वाले ने खुद को भी गोली मार ली.

वैसे तो अमेरिका में मास शूटिंग की घटना सामान्य है पर यह घटना मरने वाले लोगों के लिहाज से बड़ी है. इसलिए यह विश्व-स्तरीय खबर भी बनी. उसी दिन लॉरेंस, केएस में भी एक बन्दूकधारी ने तीन लोगों को गोली मार दी. दो लोग घायल भी हुए. इस घटना का कहीं जिक्र नहीं होगा क्योंकि अमेरिका में इस तरह की घटनाएं आम बात हैं.

मास शूटिंग ट्रैकर वेबसाइट के अनुसार इस साल अक्टूबर 1 तक अमेरिका में कुल ऐसी 338 घटनाएं हुईं जिसमे 460 लोगों की जान जा चुकी हैं और 1421 लोग घायल हो चुकें हैं. वर्ष 2015 में ऐसी कुल 372 घटनाएं हुईं जिसमे 475 लोग मारे गए और 1870 लोग जख्मी हुए. मास शूटिंग ट्रैकर वेबसाइट इस तरह की घटनाओं के आंकड़े तैयार करता है. सोमवार को जब यह खबर लिखी जा रही थी तब इस वेबसाइट पर तकनिकी खामियों की वजह से 2016 के आंकड़े नहीं दिख रहे थे.

न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार 2015 में बन्दूक की गोली से लगभग 13 हजार से अधिक लोग मरे वही इसके दुगुना लोग जख्मी हुए.

इन आंकड़ों को बताने के पीछे उद्देश्य यह है कि पाठक अमेरिका में अन्धाधुन्ध गोली चलाकर लोगों को मारने की घटना के बारे में समझें और सोचें कि आखिर ऐसा क्यों है? इसका जवाब है उद्योग और फिर वहाँ के राजनीति से मिलता सह.

इस साल अप्रैल में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प राइफल एसोसिएशन में बोलते हुए

अपने चुनावी संबोधन के दौरान डोनाल्ड ट्रम्प ने नेशनल राइफल एसोसिएशन (एनआरए)के सालाना अधिवेशन में बोलते हुए कहा था कि आप लोग मेरे समर्थन में आये, मैं आप लोगों को समर्थन दूंगा. रोनाल्ड रीगन के बाद ट्रम्प पहले राष्ट्रपति बने जिन्होंने  इस एसोसिएशन के किसी समारोह में बोला. इस एसोसिएशन को किया ट्रम्प का वादा ही था कि इसने ट्रम्प के समर्थन में और हिलेरी क्लिंटन के विरोध में प्रचार पर अपना कुल खर्च दोगुना कर दिया. इस उद्देश्य के लिए एसोसिएशन ने 2.68 करोड़ डॉलर खर्च कर दिया. (एक डॉलर का बाजार मूल्य करीब 67 रुपये होगा).

इस वाकये का जिक्र इसलिए किया गया कि अमेरिका में मशहूर ‘गन लॉबी’ की ताकत को समझा जा सके. अलबत्ता इस उद्योग और बन्दूक रखने के अधिकार रिपब्लिकन और उनके समर्थक अधिक हैं पर डेमोक्रेट्स भी जाने अंजाने इनकी मदद करते रहे हैं. बराक ओबामा ने जब जब इस उद्योग पर लगाम लगाने की बात की, बंदूकों की बिक्री बढ़ गई. ओबामा लगाम तो लगा नहीं पाए पर आनन फानन में लोगों ने और अधिक हथियार खरीद लिए.  इस तरह उस उद्योग को फायदा ही पहुंचा.

इस ताकतवार उद्योग की वहाँ कोई सामाजिक जिम्मेदारी नहीं हैं. किसी घटना के बाद, बन्दूक बेचने के लिए इन कंपनियों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता, जबकि यह कम्पनियां बन्दूक बेचने के लिए तरह तरह के प्रोपगंडा में खुलेआम लगी रहती हैं. अपने प्रचार माध्यमों से लोगों को असुरक्षित बताती हैं ताकि लोग अधिक से अधिक बन्दूक खरीद सकें. लेकिन उस बन्दूक से हुई हत्या के लिए इनको जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता.

उदाहरण के लिए वर्ष 2012 में घटी एक घटना को देखें. 14 दिसंबर, 2012 को सैंडी हुक एलीमेंट्री स्कूल में  एआर 15 राइफल से अन्धाधुन्ध गोली बारी होती है. पांच बच्चे, चार बड़े लोग मार दिए जाते हैं. एक शिक्षक मरते मरते बचता है. इस घटना में  मरे हुए लोगों के परिवारजन उस शिक्षक के साथ मिलकर रेमिंगटन आर्म्स, के खिलाफ कोर्ट में केस दायर करते हैं. इसी कंपनी में बने बन्दूक को हत्यारे ने गोलीबारी के लिए इस्तेमाल किया था. वर्ष 2016 के अक्टूबर में कोर्ट यह फैसला देता है कि चूंकि अमेरिका का संघीय (फ़ेडरल) कानून हथियार बनाने वाली किसी कंपनी के हथियार से हुए अपराध के लिए उस कंपनी को दोषी नहीं मानता इसलिए कंपनी के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया जा सकता.

मतलब ये कि इन कंपनियों पर अपने प्रोडक्ट को बेचने की पूरी छूट तो दी गई है पर इनकी जिम्मेदारी नहीं तय की गयी है. हाल ही में आई एक

अमेरिका में बन्दूक संस्कृति के खिलाफ प्रदर्शन करते लोग

पुस्तक ‘दी गंनिंग ऑफ़ अमेरिका’ में लेखिका पामेला हाग ने इस पूरे उद्योग की भूमिका का पर्दाफाश किया है. इस पुस्तक से पता चलता है कि इस उद्योग की शुरुआत उन्नीसवीं शताब्दी में हुई जब हथियार बनाने वाली कंपनियों ने अपने मुनाफे के लिए लोगों को बन्दूक रखने के फायदे गिना गिनकर अपने माल बेचने शुरू किया. इन कंपनियों ने लोगों को समझाए कि हरेक व्यक्ति को बन्दूक रखना चाहिए. एक सही आदमी को तो बन्दूक जरुर रखना चाहिए. महिलाओं को अपनी सुरक्षा के लिए बन्दूक रखना चाहिए इत्यादि. सरकार ने भी उनलोगों का साथ दिया और 1791 में कानून में संशोधन कर के लोगों को हथियार रखने के अधिकार दे दिए.

वहाँ से शुरू यह संस्कृति अब तक चल रही है और अमेरिका में 42 प्रतिशत लोग या तो बन्दूक रखते हैं या उस घर में रहते हैं जहां बन्दूक मौजूद है. कुल 66 प्रतिशत बन्दूक मालिकों के पास एक से अधिक बन्दूक है.

इस देश का नेशनल राइफल एसोसिएशन उनके इस असुरक्षा के भाव को हवा देता है. ऐसा इसलिए भी है कि इस सुरक्षित देश में नागरिक खुद को बहुत असुरक्षित महसूस करता है. यहाँ तक कि दूसरे देश में हुए आतंकी हमले से भी बन्दूक की बिक्री बढ़ जाती है. ऐसे किसी आतंकी हमले का उपयोग कर यह संगठन प्रचार के माध्यम से अमेरिकी जनता को उनके असुरक्षित होने का एहसास दिलाता है. अमेरिकी जनता बन्दूक के सहारे खुद को सुरक्षित महसूस करने की कोशिश करती हैं. जैसे 2015 के नवम्बर में पेरिस में हुए आतंकवादी हमले के बाद अमेरिकी लोग बन्दूक खरीदने के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए. उस साल दिसंबर में ऐतिहासिक तौर पर करीब 33 लाख बन्दूक बिकी. उस साल 2.3 करोड़ बंदूके अमेरिकी घरों में आयीं.

इसका नतीजा यह है कि वहाँ रोजाना औसतन लगभग 31 हत्या, 55 आत्महत्या और दो बच्चो की दुर्घटना में मौत होती है. ये ऐसी दुर्घटनाएं है जिनमे बच्चे अपने माता-पिता के बन्दूक से खेलते हुए निशाना लगा बैठते हैं. इसके बावजूद भी अमेरिकी यह मानते हैं कि सभी के पास बन्दूक होगा तो सब सुरक्षित होंगे.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here