जानिये क्यों ज़रूरी है हमारे देश के लिए सालाना बजट

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अरुण जेटली: आईएएनएस फोटो

सौतुक डेस्क/

केंद्र की भाजपा सरकार 1 फ़रवरी को अपना आखिरी बजट पेश करने जा रही है. वैसे तो इस बजट से लोगों को काफी उम्मीदें हैं, पर देखना होगा कि क्या ये बजट वाकई आम आदमी के लिए कुछ अच्छी खबर लेकर आएगा. लेकिन इससे पहले आइये जानते हैं, क्या है बजट और इसके मायने हमारे देश के लिए. 

बजट क्या है और इसमें क्या समाहित होता है?

एक बजट सरकार का अनुमान है कि वह एक वित्तीय वर्ष में कितना पैसा कमाएगी और कितना खर्च करेगी.  इस बजट में पिछले साल का वास्तविक आंकड़ा होता है और वर्तमान वित्तीय वर्ष से सम्बंधित आंकड़ो का अनुमान होता है. उदाहरण के लिए मान लीजिये कि 2018-19 वित्तीय वर्ष का बजट जब वित्त मंत्री एक फ़रवरी को संसद में पेश करेंगे तो वे 2017-18 वित्तीय वर्ष का वास्तविक खर्च और आय का ब्यौरा देंगे साथ ही आने वाले वित्तीय वर्ष में होने वाले आय और खर्चे का अनुमान भी लगायेंगे.

यह बजट कब पेश होता है और इसे कौन पेश करता है?

देश का बजट संसद द्वारा तय दिन को वित्त मंत्री पेश करते हैं. पारंपरिक तौर पर सरकार फ़रवरी महीने के आखिरी कार्य दिवस के दिन इसे प्रस्तुत करती है. इस साल इसे थोडा जल्दी कर फ़रवरी के पहली तारीख को ही किया जा रहा है. हर सरकार अपना आखिरी बजट अंतरिम बजट के तौर पर प्रस्तुत करती है. नई सरकार आने के तुरंत बाद बजट पेश करना होता है. जैसे नरेन्द्र मोदी सरकार ने 2014 में जुलाई दस को पेश किया था.

बजट तैयार करने की और पेश करने की पूरी जिम्मेदारी वित्त मंत्रालय और वित्त मंत्री की होती है. अलबत्ता प्रधानमंत्री की देख-रेख में ही यह सब होता है.

संसद के बजट सलाहकार समिति के द्वारा एक नियत समय सारणी बनायी जाती है. उसी के तहत सभी मंत्रालयों को अपनी जरुरत पर चर्चा करनी होती है.

क्या यह सालाना बजट ज़रुरी है?

यह सिर्फ ज़रुरी ही नहीं बल्कि मजबूरी भी है. संविधान के अनुच्छेद 112 के अनुसार, सरकार को हर साल अपने आय और खर्चे का ब्यौरा प्रस्तुत करना होता है. इसके तहत तीन श्रेणी के ब्योरे आते हैं. कुल(समेकित) फंड, आपात फंड और लोक खाता या पब्लिक अकाउंट. कुल फंड में सरकार को सारी आमदनी और खर्चे का ब्यौरा देना होता है, जिसमें टैक्स इत्यादि से आमदनी शामिल होती है. आपात फंड में सरकार एक निश्चित रकम तय करती है जो किसी आकस्मिक समय में इस्तेमाल होता है. लोक खाता के तहत सरकार, सरकारी योजना से हुए लाभ इत्यादि का ब्यौरा देती है जैसे पीएफ इत्यादि.

बजट में किस तरह के कागज़ात होते हैं?

इसमें बजट भाषण और दो तरह के कागजात शामिल होते हैं. भाग एक और भाग दो. पहले भाग में सरकार देश के आर्थिक नीतियों की बड़ी तस्वीर पेश करती है. जैसे किस योजना और क्षेत्र को कितने पैसे आवंटित किये जायेंगे. सरकार की प्राथमिकता भी इस भाग एक से तय होती है. दूसरे भाग में सरकार नए कर लगाने या पुराने कर इत्यादि को घटाने बढाने का प्रस्ताव बताती है.

बजट के अनुमोदन की क्या प्रक्रिया है?

वित्त मंत्री लोकसभा में भाषण के साथ बजट पेश करता है. इस भाषण में बजट का लेखा-जोखा होता है. इसके बाद पुनः इसे राज्य सभा में पेश करना होता है. संसद के दोनों सदन फिर निर्धारित समय में इस पर बहस करते हैं और वित्त मंत्री आखिर में इसपर उठे सवाल का जवाब देता है.

यद्यपि दोनों सदन बजट पर बहस करते हैं पर केवल लोकसभा ही इसके लिए वोटिंग करता है. एक बार जब यह वित्त विधेयक के तौर पर लोकसभा के द्वारा पारित कर दिया जाता है. तब जाकर सरकार इस समेकित फंड से पैसा खर्च करने की स्थिति में होती है.

क्या होगा अगर सरकार तय तारीख के पहले बजट नहीं पेश करती है?

अगर यह बिल तय समय सीमा के अन्दर संसद से पास नहीं होता है तब अनुच्छेद 116 के अनुसार लोकसभा ‘वोट ओन अकाउंट’ को पारित करता  है. लेकिन इसमें सिर्फ खर्चे का हिसाब होता है.

 

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