पर्दादारी की इंतहा से होकर गुजरता है भारत का बजट

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उमंग कुमार/

आज जब देश के वित्तमंत्री अरुण जेटली अपने वर्तमान कार्यकाल का चौथा बजट पेश कर रहे हैं तो आपको जानकर हैरानी होगी कि इस बजट की तैयारी में लगभग 100 अधिकारी दस दिनों के करीब एक ऐसी जगह पर बंद किये गए थे जहां न वे किसी से संपर्क कर सकते थे और न ही कोई उनसे संपर्क कर सकता था. दिल्ली के नार्थ ब्लाक बिल्डिंग में ये अधिकारी बंद थे जहां की सुरक्षा व्यवस्था भी किसी युद्ध स्तर की थी.

अब आपको लगेगा ऐसा क्यों? तो, ऐसा इसलिए क्योंकि वे लोग बजट की कॉपी तैयार करने और उसे प्रिंट के लिए भेजने में लगे हुए थे. चूंकि बजट के रहस्य को बनाए रखना था इसलिए सरकार ने पूरी व्यवस्था चाक चौबंद कर रखी थी. ऐसा हर साल होता है क्योंकि सरकार बजट की गोपनीयता बनाए रखना चाहती है.

वैसे तो बजट बनाने की प्रक्रिया कई महीने पहले शुरू हो जाती है. करीब सितम्बर-अक्टूबर में वित्त मंत्रालय अन्य मंत्रालयों को एक ख़ास फॉर्म भेजता है जिसमें उन्हें अपने विभाग से सम्बंधित आवंटन का ब्यौरा देना होता है. उन्हें यह बताना होता है कि नए साल में वे बजट बढ़ाना चाहते हैं कि घटाना. उन्हें अपने निर्णय के पीछे की वजह भी बतानी होती है. वित्त मंत्री उसके बाद सबसे सलाह मशविरा करते हैं.

पर्दादारी का वास्तविक खेल शुरू होता है बजट पेश होने के करीब एक पखवाड़े पहले जब बजट की कॉपी तैयार हो जाती है. पर इसकी प्रिंटिंग महज़ दो-तीन दिन पहले ही करवाई जाती है. सारे दस्तावेज़ सरकारी प्रिंटिंग प्रेस पर छपते हैं, पर बजट के कागज़ातों की प्रिंटिंग एक खास प्रिंटिंग प्रेस जो कि नॉर्थ ब्लॉक में वित्त मंत्रालय के नीचे स्थित है, वहीँ होती है. यहाँ 15 दिन पहले से ही सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी जाती है. यहाँ काम करने वाले टेक्निकल स्टाफ को भी परिसर से बाहर आने-जाने की इजाज़त नहीं होती है.

बजट तैयारी के आखिरी पड़ाव पर वित्तमंत्री अन्य अधिकारीयों के साथ.

सारे कर्मचारी और अधिकारी जुटते हैं. एक पारंपरिक उत्सव मनाया जाता है जिसमें ये लोग हलवा खाते हैं. वित्त मंत्री भी इसमें भाग लेते हैं. और यहीं से शुरू होता है वह दौर जब सबको बाहर की दुनिया से काट दिया जाता है.

करीब दस दिन या कहें सप्ताह भर ये लोग वहीँ बंद रहते हैं. सुरक्षा व्यवस्था एकदम चुस्त कर दी जाती है. न तो कोई बाहर जा सकता है और न ही कोई बाहरी अन्दर आ सकता है. यहाँ तक कि मंत्रालय के अन्य कर्मचारी भी इस क्षेत्र में नहीं आ सकते हैं.

सुरक्षा एजेंसी एक छोटा सा फ़ोन टैप करने वाले स्टेशन, नार्थ ब्लाक में लगा देती है. इससे मोबाईल फ़ोन पर भी नज़र रखी जाती है. करीब सौ के इर्द-गिर्द लैंड लाईन फ़ोन पर भी नज़र रखी जाती है. सारे कंप्यूटर से मेल करने की सुविधा हटा दी जाती है. बड़े स्कैनर के साथ दरवाजे लगे ही रहते हैं. ये सारी तैयारी इसलिए ताकि बजट का कोई हिस्सा वित्त मंत्री के संसद में बजट पेश करने से पहले लीक न हो जाए.

वित्त मंत्री संसद में बजट प्रस्तुत करते हैं उसके बाद ही इन लोगों का यह अज्ञातवास ख़त्म होता है.

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