भारत में स्वच्छ पानी के बिना रहने वालों की संख्या दुनिया में सबसे अधिक है

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साभार: विकिमीडिया कॉमन्स

सौतुक डेस्क/

भारत में रहने वाले लगभग 16.3 करोड़ लोगों की स्वच्छ पानी तक पहुँच नहीं है, जो की विश्व में सबसे ज्यादा है. इस आंकड़े की तुलना दुसरे देशों से की जाए तो समस्या की गंभीरता का पता चलता है. भारत के बाद सबसे बुरी स्थिति इथोपिया में हैं जहां 6 करोड़ लोग को पीने के लिए स्वच्छ पानी नसीब नहीं होता. वहीँ तीसरा स्थान नाईजीरिया का है जहां 5.9 करोड़ लोग इस श्रेणी में आते हैं.

वाटरऐड द्वारा किये गए एक हालिया अध्ययन में बताया गया है कि जलवायु परिवर्तन के कारण भी जल संसाधनों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है.

साल 2018 में छपी “द वाटर गैप-वॉटरएड्स स्टेट ऑफ द वर्ल्ड वाटर” नामक रिपोर्ट, यह चेतावनी देती है कि स्वच्छ पानी से वंचित लोगों की वैश्विक आबादी 84.4 करोड़ तक पहुँच चुकी है, “जो कि पिछली गिनती से लगभग 20 करोड़ अधिक है”.

जिन लोगों को पानी लाने अथवा खरीदने के लिए 30 मिनट से भी ज्यादा का समय व्यतीत करना पड़ता है, उन्हें पानी से वंचित लोगों के दायरे में ही रखा जाना चाहिए.

विश्व की 11 प्रतिशत आबादी अगर स्वच्छ पानी से वंचित है तो इसका मुख्य कारण देशों की राजनितिक इच्छाशक्ति और वित्तीय सहायता की कमी है.

रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि उपेक्षा के कारण विश्व का 60 प्रतिशत हिस्सा जल-तनाव के क्षेत्र में आता है, जहाँ लोगों को स्वच्छ पानी के लिए काफी संघर्ष करना पड़ता है, जिसका अर्थ यह भी निकला जा सकता है कि यहाँ भविष्य में पानी की आपूर्ति हो भी सकती है और नहीं भी.

भारत में पानी की कमी के मुख्य कारण के रूप में राजनितिक इच्छाशक्ति की कमी को देखा जा सकता है, 2013 में कृत्रिम तरीके से जल आपूर्ति करने हेतु एक मास्टर प्लान तैयार किया गया था, परन्तु आज तक उसे लागू नहीं किया गया है क्योंकि ज्यादातर सरकारें इस योजना से अपना हाथ पीछे खिंच रही हैं.

इस योजना के तहत, देश 1,11 करोड़ कृत्रिम आपूर्ति सरंचनाओं का निर्माण करेगा , जिसकी अनुमानित लागत राशि 79,178 करोड़ रुपये है. हालाँकि जुलाई 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों से पूछा था कि उन्होंने इस योजना को लेकर अब तक हलफनामा दायर क्यों नहीं किया है और वे इस योजना को लागू करना चाहते भी हैं अथवा नहीं. यह बहुत ही चिंता का विषय हैं कि हमारा देश पेयजल की जरूरतों के लिए मुख्य रूप से भूजल पर ही निर्भर रहता है.

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