क्यों चलते हैं आप हमेशा सड़क के बायीं ओर, सोचा है कभी?

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उमंग कुमार/

बचपन से ही हमें सड़क के बायीं और चलना सिखाया जाता है. यातायात के इस नियम का पालन करते-करते हम इतने अभ्यस्त हो जाते हैं कि अगर किसी ख्याल में भी खोये हों तो स्वतः बाएं चलने लगते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हम भारतीयों को हमेशा सड़क के बायीं ओर चलने को क्यों कहा जाता है? या हमारे देश में सारी गाड़ियां सड़क के बायीं तरफ ही क्यों चलती हैं?

ऐसा नहीं है कि हर जगह ऐसा ही होता है. दुनिया के महज 35 प्रतिशत देश ही ऐसे है जहां सड़क के बायीं तरफ चलने की परंपरा है. इंग्लैंड, जापान और कई ब्रिटिश कॉलोनी को छोड़ दिया जाए तो लगभग पूरी दुनिया में गाड़ियां सड़क के दायीं ओर चलती हैं.

लेकिन एक समय ऐसा था कि सारी दुनिया सड़क के बायीं तरफ ही चलती थी.

इसके पीछे ऐतिहासिक कारण है. वह यह कि लोग सवारी करते हुए खुद के सबसे मजबूत बांह को खाली रखते थे. कब कहाँ से कोई आ जाए और तलवार निकालनी पड़ जाए. तलवार तो दाहिने हाथ से ही चलती थी. क्योंकि अधिकतर लोग दाहिने हाथ का इस्तेमाल करते हैं. इसलिए तलवार चलाने वाले को सड़क के बायीं तरफ रहना होता था.

एक समय ऐसा था कि सारी दुनिया सड़क के बायीं तरफ ही चलती थी और अब दुनिया के महज 35 प्रतिशत देश के ही लोग बायीं तरफ चलते हैं

‘बाएं चलें’ का इतिहास काफी पुराना है. कम से कम पश्चिमी देशों में. पुरातत्ववेदी बताते हैं कि रोमन सेना बाएं चलती थीं. इसके प्रमाण मिल चुके हैं. लेकिन ‘सड़क के नियम’ के तौर पर इसे पहली बार तेरहवीं शताब्दी में अपनाया गया, जब पोप बोनिफस अष्टम ने रोम के श्रधालुओं को बाएं चलने के लिए कहा. लगभग पूरी दुनिया में यही नियम सत्रहवीं शताब्दी तक चलता रहा.

सत्रहवीं शताब्दी में बड़े पैमाने पर सामान एक जगह से दूसरी जगह ले जाने का प्रचलन बढ़ा. इनको ढोने के लिए एक गाड़ी में कई जोड़े घोड़े लगते थे. लेकिन इन गाड़ियों में कोई ड्राईवर की सीट तो थी नहीं. ऐसे में गाड़ीवान सारे घोड़ो को काबू में रखने के लिए सबसे बाएँ वाले घोड़े के ऊपर या उसके इर्द गिर्द बैठता था. यहाँ भी उद्देश्य अपना दाहिना हाथ खाली रखना ही था ताकि जरुरत पर किसी भी घोड़े को चाबुक मारा जा सके.

लेकिन इन बड़ी गाड़ियों के सबसे बायीं तरफ बैठने पर दूसरी तरफ से आने वाले सवारी या गाड़ी का सही अंदाजा नहीं लगाया जा सकता था. यहीं से पारंपरिक यातायात के नियम को पहली चुनौती मिलनी शुरू हुई.

खुद को सड़क के बायीं तरफ रखकर दाहिने हाथ से तलवारबाजी करते योद्धा

इन सारी गाड़ियों के लिए सड़क पर बहुत अधिक जगह चाहिए होती थी. कहने का मतलब यह कि इसमें सड़क के बाएं जैसा कुछ रह नहीं जाता था और गाड़ियां बीचो-बीच चलने के लिए बाध्य थीं. इन सबको देखते हुए पहली बार दाहिने चलने का नियम पेन्नसिल्वानिया (Pennsylvaniya) ने 1792 में पास किया. धीरे-धीरे अमेरिका और कनाडा में इसे अपनाया जाने लगा.

उसी साल फ़्रांस में भी दाहिने चलने का फरमान जारी किया गया जिसे बाद में नेपोलियन ने पूरे देश में लागू करवाया.  कहते हैं कि फ्रांस ने अंग्रेजों को चुनौती देने के लिए यातायात के नियम में यह बदलाव किया.

लेकिन इंग्लैण्ड में पुरानी व्यवस्था वैसे ही चलती रही. कहते हैं उस समय यहाँ बाद में भी छोटी गाड़ियां ही चलती रही और उसमें चालाक के लिए एक नियत स्थान होता था. इसलिए नियम के बदलाव की कभी जरुरत नहीं महसूस हुई.

सड़क पर भीड़ कम होने की वजह से यह सब एक साधारण समझ तक ही सीमित था पर जब धीरे-धीरे लन्दन में सडकों पर भीड़ बढती गयी तो ट्रैफिक नियंत्रित करने की समस्या सामने आई. इसके लिए पहली बार परंपरा से हटकर ‘बाएं चलने’ का कानूनी तौर पर नियम अठारहवीं शताब्दी में लाया गया. उद्देश्य यही कि आमने सामने की भिडंत न हो जाए. इस नियम को वहाँ के हाईवे एक्ट में 1835 में शामिल किया गया और साथ ही पूरे ब्रिटिश साम्राज्य में एक साथ लागू किया गया.

यहीं कहीं भारत भी अपने बाएं चलने के पीछे की वजह तलाश सकता है.

बीसवीं शताब्दी में यूरोप में एक पूरा अभियान चला कि यातायात के नियम को एक समान बनाया जाए और धीरे-धीरे कई देश बाएं चलने के नियम को बदलकर दाहिने चलने लगे. सबसे आखिर में इस नियम को अपनाने वाला देश रहा स्वीडन.

स्वीडन के सड़क पर बाएं से दाहिने चलने की कहानी भी बहुत रोचक है. तीन सितम्बर 1967 को देश की सारी गाड़ियों को दस मिनट के लिए रोक दिया गया. देश की घड़ी  ने जब सुबह के 4.50 बजाये तो सारी गाड़ियां जहां थी वहीँ रुक गयीं. तब तक सब सड़क के बायीं तरफ चला करती थीं. दस मिनट में जब वापस चलना शुरू हुआ तो सब सड़क के दाहिनी तरफ चलने लगे.

आज दुनिया के करीब 35 प्रतिशत देश ही सड़क के बायीं तरफ चलते हैं जिसमें भारत, इंडोनेसिया, आयरलैंड, माल्टा, सायप्रस, जापान, न्यू ज़ीलैण्ड, ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैण्ड इत्यादि शामिल हैं.

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