ऐसे भी दीवाने हुआ करते हैं: जब मीना कुमारी को खंजर से ऑटोग्राफ देना पड़ा था

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उमंग कुमार/

यह बीते ज़माने की बॉलीवुड अदाकारा मीना कुमारी के एक दीवाने की कहानी है. वही मीना कुमारी जिनको बॉलीवुड का ट्रेजेडी क्वीन भी कहा जाता है और जिनके पैरों को देखकर राजकुमार ने पाकीज़ा में वह डायलाग बोला था कि ‘आपके पांव बहुत खूबसूरत हैं, इन्हें जमीन पर मत उतारियेगा. मैले हो जायेंगे. ‘

उसी पाकीज़ा फिल्म की शूटिंग के सिलसिले में कमाल अमरोही अपनी टीम के साथ दिल्ली की तरफ जा रहे थे. दो गाड़ियों में फिल्म की पूरी टीम मध्य प्रदेश के शिवपुरी के इर्द-गिर्द कहीं से ग़ुज़र रही थी जब पता चला कि गाड़ी का पेट्रोल ख़त्म हो गया है.

किसी से पता चला कि सुबह-सुबह इसी रास्ते से एक बस गुजरती है और उसी बस से पेट्रोल खरीदा जा सकता है. कोई रास्ता नहीं था. कमाल अमरोही ने तय किया कि वहीँ बीच रास्ते में रात गुजारी जायेगी और सबसे कह दिया कि आप अपनी गाड़ी के शीशे चढ़ा लें. अमरोही को शायद ये नहीं पता था कि वे देश के गिने-चुने बीहड़ जंगलों में से एक में कहीं हैं.

अभी कुछ ही घंटे गुजरे होंगे कि दस-बारह लोगों ने इनकी दोनों गाड़ियों को घेर लिया. सभी हथियारों से लैस थे. गाड़ी के अन्दर सवार सभी लोगों के हाथ-पांव फूल गए. ये गाड़ियाँ एक गेट के अन्दर ले जायी गयीं. वहाँ सभी को उतरने के लिए कहा गया.

कमाल अमरोही ने गाड़ी से उतरने से मना कर दिया. डकैतों ने उनसे कहा कि यह गाड़ी अब थाने जायेगी. पर अमरोही नहीं माने. उनको मालूम था कि उतरने का मतलब क्या हो सकता है. चारों तरफ घनघोर जंगल और गाड़ी में बला की खूबसूरत मीना कुमारी. अमरोही को इसकी चिंता हो रही थी.

अमरोही ने मना कर दिया कि वे लोग गाड़ी से नहीं उतरेंगे. जिसको मिलना है वह वहीँ उनसे मिलने आये. नए शिकार के बारे में इन डाकुओं ने अपने सरगना को खबर की. इनके उस्ताद को बुलाया गया. धुत्त सफ़ेद कपड़े में इनका सरगना आया.

कड़ी पूछताछ हो रही थी और ये डाकू आगे की कार्यवाही की तैयारी में लगे थे. तभी किसी डाकू ने गाड़ी में झाँका और दूसरे साथी के कान में बोला कि इसमें मीना कुमारी है. अँधेरे की वजह से दूर से वह दिख नहीं रही थी.

फिर क्या था उस गिरोह के  सरगना ने आदेश दिया कि इस काफिले को लूटा तो नहीं जाएगा पर आज यह काफिला आगे भी नहीं जाएगा. ऐसा सुनकर डरी-सहमी मीना कुमारी को गुस्सा आ गया. वह गुस्से में काँप रही थी पर इन डाकुओं को खुली चुनौती भी दे रही थी. बाकी के लोगों की स्थिति का भी अंदाजा लगाया जा सकता है.

पर डाकुओं के सरदार ने स्पष्ट कर दिया कि आज किसी हालत में इन्हें जाने नहीं दिया जाएगा.

कुछ देर में लोगों की तेज चलती साँसें थमने लगीं जब उन्हें एहसास हुआ कि वह सरगना उन्हें धमकी नहीं दे रहा है. डरा नहीं रहा है. उसने इस पूरी टीम से कहा कि आप सबको हमारे गुफा में चलना होगा और हमें खातिरदारी का मौका देना होगा. “आज आपलोग हमारे मेहमान होंगे और कल आपलोगों की गाड़ी में पेट्रोल भरवा दिया जाएगा.”

उस रात सारे मेहमानों के लिए कई व्यंजन बनवाये गए. खूब आवभगत की गयी. मीना कुमारी गाड़ी में ही बैठी रहीं और वहीँ उनको खाने-पीने का सामान भेजा जाता रहा.

अगली सुबह विदाई के वक्त, डकैतों का वह उस्ताद हाथ में खंजर लिए हुए उस गाड़ी के पास गया जिसमें मीना कुमारी बैठी हुई थीं. सभी लोग डर गए कि क्या पता डाकुओं का सरदार क्या करने जा रहा है. कुछ देर के लिए तो जैसे सबकी साँसे ही रुक गयीं.

उसने खिड़की से वह खंजर मीना कुमार को दिया और बोला कि आपको मेरी बांह पर अपना नाम लिखना होगा. मीना कुमारी के लिए ऑटोग्राफ देना कोई बड़ी बात नहीं थी बल्कि यह तो रोज के जीवन का हिस्सा था. पर ऐसा ऑटोग्राफ? उन्होंने इसका विरोध किया पर डाकुओं के सरगना ने इनकी बात नहीं मानी. हारकर मीना कुमारी को खंजर से भी ऑटोग्राफ देना पड़ा. ऐसा करते हुए मीना कुमारी लगभग बेहोश सी हो गयीं लेकिन उस डाकू ने उफ्फ तक नहीं की.

किसी तरह मीना कुमारी ने उस डाकू की बांह पर अपना नाम उकेरा और फिर बड़े शानो-शौकत से सबकी विदाई की गई.

वहाँ से निकलने के बाद जब कमाल अमरोही और उनकी टीम अगले शहर पहुंची तो पता चला कि जिनसे उनका सामना हुआ था और जो बीती रात उनका मेजबान था वो कोई और नहीं उस क्षेत्र का खूंखार डाकू अमृतलाल था.

कमाल अमरोही जो मीना कुमारी के पति भी थे ने एक साक्षात्कार में बताया था कि बहुत दिनों बाद अमृतलाल के मारे जाने की खबर अखबारों में प्रकाशित हुई थी और उसमें यह भी दर्ज हुआ था कि डाकू के बांह पर ‘मीना’ उकेरा हुआ था.

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