दुनिया का एक ऐसा परिवार जिसे दर्द का एहसास ही नहीं होता

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सौतुक डेस्क/

मर्द के सीने में दर्द नहीं होता. यह डायलोग मर्द फिल्म में अमिताभ बच्चन का है और उस समय के युवा इसी से अपनी मर्दानगी जांचने लगते हैं. अभी खबर यह कि ‘मैंने प्यार किया’ से मशहूर अभिनेत्री भाग्यश्री के बेटे की एक फिल्म आ रही है ‘मर्द को दर्द नहीं होता’. दर्द और मर्द के रिश्ते के इस बॉलीवुड संस्करण पर आप सोचते रहिये तब तक इटली से एक खबर है कि एक परिवार ऐसा है जिसको सच में दर्द का एहसास नहीं होता और इसमें सिर्फ मर्द कम महिलायें अधिक हैं.

इस परिवार के लोगों के अगर पैर टूट जाएँ तो उन्हें पता नहीं चलता, ये अपने भोजन में खूब अधिक मिर्च डाल सकते हैं. इनके शरीर की जोर लगाकर अगर कोई बड़ा पहलवान भी मालिश करे तो इन्हें दर्द नहीं होगा बल्कि मजा आएगा. अत्यधिक गर्म खाना, हाथ जल जाना इनको परेशान नहीं करता.

इस परिवार के इस अजीबो-गरीब खूबी से दुनिया के वैज्ञानिकों में ऐसी आस जगी है कि वे दर्द की क्रांतिकारी दवा तलाश लेंगे

इस परिवार पर एक शोध हाल ही में ब्रेन नाम के एक जर्नल में प्रकाशित हुआ है. यही नहीं इस परिवार के इस अजीबो-गरीब खूबी से दुनिया के वैज्ञानिकों में ऐसी आस जगी है कि वे दर्द की क्रांतिकारी दवा तलाश लेंगे.

इस शोध के अनुसार इस परिवार के तीन पीढ़ियों में छः ऐसे लोग हैं जिन्हें दर्द का बिलकुल एहसास नहीं होता. इनमें एक 78 साल की महिला, उनकी दो बेटियाँ जिनकी उम्र 52 और 50 साल है और इन दोनों  के दो बेटे और एक बेटी जिनकी उम्र क्रमशः 24, 21, और 16 वर्ष है. ये लोग दर्द क्या बला है, इससे अवगत नहीं हैं.

शोधकर्ता डॉक्टर जेम्स कॉक्स जो यूनिवर्सिटी कॉलेज लन्दन से भी जुड़े हैं उन्होंने मीडिया से बात करते हुए समझाया कि इस परिवार की एक लड़की कुछ कर रही थी जिससे उसके बांह का उपरी हिस्सा टूट गया पर वह अपना काम अनवरत करती रही. इस टूटने के बारे में उसका पता अगले दिन चला जब उसने अपनी बांह में सूजन देखा.

इसको वैज्ञानिकों ने मार्सिली सिंड्रोम नाम दिया है क्योंकि यह उस परिवार का सरनेम है. इन वैज्ञानिकों को यह उम्मीद है कि अगर उस जीन का पता चला जाए जिसकी वजह से इनलोगों को दर्द का एहसास नहीं होता तो इससे प्रभावशाली दर्द-निवारक दवा बनायी जा सकती है.

इस परिवार के कुछ लोग ऐसे भी हैं जिनको थोड़ा दर्द होता है पर वह भी 50 से 60 सेकण्ड भर.एक ही काम करते हुए बगल के लोगों को खूब पसीना होता है पर इनलोगों को नहीं

इस परिवार के कुछ लोग ऐसे भी हैं जिनको थोड़ा दर्द होता है पर वह भी 50 से 60 सेकण्ड भर. इस परिवार के बारे में इन शोधकर्ताओं का कहना है कि एक ही काम करते हुए बगल के लोगों को खूब पसीना होता है पर इनलोगों को नहीं होता. ये लोग खुशबू और बदबू को लेकर काफी संवेदनशील है और बहुत जल्दी उलटी करने लगते हैं. लेकिन इनके सोचने-समझने की क्षमता पर इसका कोई असर नहीं है और ये लोग बाकि चीजों में सामान्य हैं.

इस ख़ास जीन का पता लगाने के लिए शोधकर्ताओं ने इन लोगों पर ढेर सारे अध्ययन किये हैं जिसमें यह देखा गया कि ये लोग तापमान, तीखा, शरीर पर अत्यधिक दबाव और सामान्य दर्द बिलकुल महसूस नहीं करते हैं. साथ ही इन वैज्ञानिकों ने यह भी पता लगा लिया है कि इनके जीन ZFHX2 में कुछ अंतर है. या यूँ कहें कि यह म्यूटेटेड जीन है.

चूहों पर भी इस जीन का प्रभाव देखा जा चुका हैं. वैज्ञानिकों ने जब चूहों के इस जीन में परिवर्तन किया तो पाया कि उनको भी दर्द नहीं हो रहा है या कम दर्द हो रहा है.

अगर यह अध्ययन आगे सफल रहता है तो वैज्ञानिक लागातार बने रहने वाले दर्द से निजात का रास्ता ढूंढ सकते हैं.

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