पंजाबी भाषा से दूर जाने की कोशिश में हरियाणा ने क्या नायाब काम कर लिया! 

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हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री बंसी लाल की तस्वीर पर माल्यार्पण करते उनके समर्थक

शिखा कौशिक/

हरियाणा और पंजाब के विवाद ने हरियाणा को कई दक्षिण भारत के भाषाओँ के करीब ला दिया. यह पूरी कहानी फिर से एक बार ताज़ा हुई जब हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर पिछले सप्ताह शुद्ध तमिल भाषा में भाषण देते हुए पाए गए. मौका था पोंगल का. पंजाबी मूल के खट्टर ने ऐसा कर सबको चौंका दिया.

इस पर जब बात आगे बढ़ी तब लोगों को याद आया कि हरियाणा का सम्बन्ध न केवल तमिल भाषा से, बल्कि तेलगु से भी बहुत पुराना है.

यह कैसे हुआ, इसका जवाब आपको हरियाणा और पंजाब के बंटवारे में मिलेगा. ये दोनों राज्य 1 नवम्बर, 1966 को अलग हुए.  लेकिन इन राज्यों में अब भी कई मुद्दों को लेकर विवाद चलता रहता है. जैसे जल बंटवारा हो गया, हवाई अड्डा का मुद्दा हो गया. दोनों राज्यों की राजधानी अब भी चंडीगढ़ ही है.

कई विद्वान् बताते हैं कि लागातार चल रहे विवाद से हरियाणा के तीसरे मुख्यमंत्री बंसीलाल इतने गुस्से में थे कि 1969 में लाये गए नए हरियाणवी कानून में किसी भी और भाषा को जगह देने के लिए तैयार थे पर पंजाबी को नहीं. हरियाणा का ऑफिशियल लैंग्वेज एक्ट 1969 में आया. इसके पहले राज्य में, पंजाब ऑफिशियल लैंग्वेज एक्ट 1960 से ही काम चल रहा था और आधिकारिक भाषा पंजाबी थी. नए कानून के बाद हरियाणा ने पंजाबी को हटाकर हिंदी को अपना लिया.

पंजाब से इस नाराजगी की वजह से तेलगु को ‘दूसरे भाषा’ का दर्जा दिए जाने की कोशिश की जाने लगी.  इसे स्कूल में पढ़ाया जाने लगा. यद्यपि यह अधिकारिक ‘दूसरी भाषा’ कभी नहीं बन पायी.

बंसीलाल के इस निर्णय के पीछे एक उद्देश्य और था. हरियाणा सरकार चाहती थी कि किसी दक्षिण भारत की भाषा को प्रोत्साहन दिया जाए ताकि भाषा को लेकर चल रहे विवाद को कम किया जाए. दक्षिण भारत में उन दिनों हिंदी को लेकर विवाद जोर पकड़ रहा था.

बंसीलाल, हरियाणा के छात्रों को दो भाषा सीखने का मौका देना चाहते थे. वे चाहते थे कि आंध्र प्रदेश से और गहरे सम्बन्ध स्थापित हों पर दक्षिण भारत के इस राज्य ने कुछ अधिक रूचि नहीं दिखाई.

तब से राज्य के भाषा से जुड़े कानून का तीन बार संशोधन किया जा चुका है पर तेलगु का कहीं अधिकारिक तौर पर जिक्र नहीं किया गया. आखिरी संशोधन 2004 में हुआ जब ओम प्रकाश चौटाला मुख्यमंत्री थे. इस संशोधन में पंजाबी को दूसरी आधिकारिक भाषा का दर्जा मिला. फिलहाल राज्य में 8 प्रतिशत के करीब लोग पंजाबी भाषा बोलते हैं.

खैर, जब लोगों ने सोशल मीडिया पर खट्टर की तारीफ करते हुए कहा कि ये तो तमिल भाषियों से बेहतर तमिल बोल रहे हैं, तो खट्टर ने इस बारे में ट्वीट करते हुए बताया कि “बहुत पहले मैं तमिल सीखना चाहता था और इसके लिए मैंने 40 साल पहले एक इंस्टीच्यूट में दाखिला लिया था.

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