एक ऐसा मंदिर, जिसके गर्भगृह में वर्जित है विवाहित पुरुषों का प्रवेश

0

चैतन्य चन्दन/

पिछले कई महीनों से केरल के पेरियार जिले में स्थित सबरीमाला मंदिर खबरों की सुर्ख़ियों में बना है. इसकी वजह सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस मंदिर में औरतों के प्रवेश पर लगे प्रतिबन्ध को गैरकानूनी घोषित किए जाने के बाद इस फैसले का विरोध और महिलाओं द्वारा मंदिर में प्रवेश दिए जाने को लेकर उठाए जा रहे कदम हैं. बीते गुरूवार को ही दो महिलाओं द्वारा मंदिर में जबरदस्ती प्रवेश करने को लेकर बवाल मचा हुआ है. ऐसे में यह जानना जरूरी है कि क्या देश में ऐसा भी कोई मंदिर है, जिसमे पुरुषों का प्रवेश वर्जित हो?

इस सवाल का जवाब हां है. दरअसल ऐसा ही एक मंदिर राजस्थान के अजमेर जिले के पुष्कर में स्थित है. यह भगवान ब्रह्मा का विश्वप्रसिद्ध मंदिर है, जिसके गर्भगृह में विवाहित पुरुषों का प्रवेश वर्जित है. इस मंदिर का निर्माण 14वीं शताब्दी में हुआ था. हालांकि लोगों का मानना है कि ब्रह्मदेव का यह मंदिर पौराणिक है. राजस्थानी स्थापत्य शैली में संगमरमर और पत्थर से बने इस मंदिर के गर्भगृह में ब्रह्मदेव और यज्ञदेवी गायत्री की प्रतिमा स्थापित है. मंदिर के निकट ही एक झील है, जिसके आसपास कार्तिक पूर्णिमा पर हर वर्ष मेला लगता है. इस मेले में लाखों श्रद्धालु आते हैं और पुष्कर झील में स्नान कर मंदिर में पूजा-अर्चना करते हैं.

मंदिर के निकट ही एक झील है, जिसके आसपास कार्तिक पूर्णिमा पर हर वर्ष मेला लगता है.

हिन्दू धर्मग्रन्थ पद्म पुराण के अनुसार, एक बार ब्रह्मदेव पृथ्वी पर आए और पुष्कर झील के निकट उन्होंने एक यज्ञ का आयोजन किया. यज्ञ में शामिल होने के लिए उनकी अर्धांगिनी देवी सरस्वती को भी आना था, लेकिन जब उन्हें यज्ञ स्थल पर पहुँचने में विलम्ब हुआ. यज्ञ को पूर्ण करने के लिए उनकी पत्नी का होना जरूरी था. इसलिए ब्रह्मदेव ने गुर्जर समुदाय की एक कन्या ‘गायत्री’ से तत्क्षण विवाह कर यज्ञ शुरू कर दिया. इसी दौरान देवी सरस्वती वहां पहुँच गईं और ब्रह्मदेव के साथ एक कन्या को बैठी देखकर क्रोधित हो गईं और उन्हें श्राप दे दिया कि देवता होने के बावजूद आपकी कभी पूजा नहीं होगी. क्रोध शांत होने पर जब देवताओं ने उनसे श्राप वापस लेने की विनती की, तो देवी सरस्वती ने कहा कि धरती पर सिर्फ पुष्कर में ही आपकी पूजा होगी. साथ ही जो कोई भी विवाहित पुरुष मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश करेगा, उसे पत्नी वियोग का कष्ट सहन करना पड़ेगा. इसी मान्यता के कारण आज भी पुष्कर के ब्रह्मा मंदिर में विवाहित पुरुषों का प्रवेश वर्जित है. इसलिए मंदिर के गर्भगृह में पूजा-अर्चना का कार्य सन्यासी ही करते हैं और श्रद्धालुओं को चढ़ावा मंदिर प्रांगण में बने हॉल में ही मंदिर के पुजारी को सुपुर्द करना पड़ता है.

पुष्कर में ब्रह्मदेव के मंदिर का जीर्णोद्धार 8वीं शताब्दी में आदि शंकर नामक एक दार्शनिक ने करवाया था. उसके बाद 14वीं शताब्दी में एक बार फिर मंदिर का पुनर्निर्माण करवाया गया. 17वीं शताब्दी से पूर्व पुष्कर में छोटे-बड़े 500 से भी अधिक मंदिर थे, जिनमे से अधिकतर को मुग़ल शासक औरंगजेब ने तुड़वा दिया था. इनमे से कुछ मंदिरों को बाद में दोबारा बनवाया गया. इस ब्रह्मा मंदिर का वर्तमान स्वरुप का निर्माण रतलाम के महाराज जवत राज के द्वारा करवाया गया.

(लेखक एक अंग्रेजी पत्रिका में वरिष्ठ पत्रकार हैं. तस्वीर उन्ही की ली हुई है.)

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here