16 वर्षीय छात्र ने बनाई ऐसी मशीन जो लाखों लोगों को हार्ट अटैक से बचा सकती है

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शिखा कौशिक/

तमिलनाडु के एक 16 वर्षीय छात्र ने ऐसा तरीका ईजाद किया है जो हर साल लाखों दिल के मरीजों को बचा सकता है.

सामान्यतः दिल का दौरा पड़ने से पहले शरीर को आपात स्थिति से सम्बंधित कई सिग्नल भेजे जाते हैं. इंसान का दिल ही दिमाग को यह सन्देश भेजता है. इसको साधारण भाषा में ऐसे समझें कि दिल दिमाग को कई दफा खबर देता है कि ऑक्सीजन की कमी हो रही है और शरीर को मदद की आवश्यकता है.

सोलह वर्षीय आकाश मनोज ने इसी सिग्नल का सहारा लेते हुए एक ऐसा मशीन ईजाद किया है जिससे करीब छः घंटे पहले ही यह अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि मरीज़ को हार्ट अटैक आने वाला है.

आकश मनोज तमिलनाडु के रहने वाले हैं और होसुर में 12वीं कक्षा में पढाई करते हैं. इनके द्वारा बनाया गया यह यंत्र, हाथ पर घड़ी की तरह या गले में माला की तरह पहना जा सकता है. उनका कहना है कि यह महज 900 रुपये में लोगों को उपलब्ध हो जाएगा.

मनोज ने हाल ही में मीडिया को बताया, “जब मैं 13 वर्ष का था तभी मेरे दादाजी की दिल का दौरा पड़ने से मृत्यु हो गई थी. मैं दादाजी के आस-पास ही खेल रहा था कि तभी अचानक मेरी आँखों के सामने ही उन्होंने दम तोड़ दिया. इस हादसे ने मुझे काफी परेशान किया.”

आकाश मनोज वैसे भी विज्ञान में दिलचस्पी रखने वाले छात्र हैं. इस हादसे के बाद उनको दिल का दौरा और इससे सम्बंधित बातें अधिक आकर्षित करने लगी. वो इस विषय का गहन अध्ययन करने लगे. और अब उन्होंने इस यन्त्र का निर्माण किया है जिसमें भारत सरकार भी काफी रूचि ले रही है.

आकाश की मानें तो वो बहुत जल्दी भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय के सहयोग से एक स्टार्टअप लाने वाले हैं. सरकार उनके इस यंत्र को बाज़ार में लाने में मदद कर रही है

आकाश की मानें तो वो बहुत जल्दी भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय के सहयोग से एक स्टार्टअप लाने वाले हैं. सरकार उनके इस यंत्र को बाज़ार में लाने में मदद कर रही है.

इस यंत्र के आसान इस्तेमाल के बारे में बताते हुए आकाश कहते हैं कि इसके प्रयोग हेतु किसी भी प्रकार के खून की जांच की आवश्यकता नहीं है.

आकाश ने बताया कि दिल तकलीफ की स्थिति में ढेर सारे संदेश शरीर को  भेजता है जिन्हें कार्डियक बायोमार्कर्स कहते हैं. अगर इन सिंग्नल्स को पढ़ लिया जाए तो संभावित दिल के दौरे का पता लगाया जा सकता है.

इसमें सबसे ख़ास बात यह है कि जब दिल ऐसे सिग्नल भेजना शुरू करता है और शरीर के विभिन्न अंग को बताना चाहता है कि ऑक्सीजन की कमी हो रही है, अगर उस समय जरुरी कदम उठाये जाएँ तो लाखों लोगों की जान बचाई जा सकती है.

इस यन्त्र के दो फायदे हैं. एक तो इसकी मदद से लाखों लोगों की जान बचाई जा सकती है और शायद यही वजह है कि भारत सरकार इसमें खासी दिलचस्पी दिखा रही है. दूसरे, अगर समय रहते जरुरी सावधानी बरती जाए तो ह्रदय रोगियों को इलाज के नाम पर जो लाखों रुपये खर्च करने पड़ते है, उससे भी बचा जा सकता है.

आकाश को इस असाधारण उपलब्धि के लिए नवम्बर 2017 में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के द्वारा स्वर्ण पदक एवं राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इसके अतिरिक्त मार्च 2017 में पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने भी इन्हें सम्मानित किया था.

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