तकनीकी दुनिया के बादशाह आपके बच्चों के साथ सौतेला व्यवहार क्यों कर रहे हैं!

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शिखा कौशिक/

बिल गेट्स, स्टीव जॉब्स और मार्क जुकरबर्ग का नाम तो आपने सुना ही होगा! ये वही लोग हैं जो कप्यूटर की दुनिया से अरबों-खरबों कमाकार दुनिया के गिने-चुने धनाढ्य में शुमार हैं. ये वही लोग हैं जिनके उत्पाद की वजह से इंसानी दुनिया में आमूलचूल परिवर्तन आ रहा है.

आप हम जितना समय कप्यूटर स्क्रीन पर देते हैं उसी के हिसाब से इनलोगों का मुनाफा बढ़ता है. इसीलिए ये लोग चाहते हैं कि लोग, क्या बच्चे क्या बूढ़े, सब के सब अधिक से अधिक समय कम्प्यूटर और मोबाईल पर गुजारें.

लेकिन इससे भी हैरतंगेज बात यह है कि ये लोग यह नहीं चाहते कि इनके बच्चे स्क्रीन पर समय दें. बल्कि इनलोगों ने अपने बच्चों को इस स्क्रीन से दूर रखने के लिए तरह तरह की पाबंदियां भी लगायीं.

फेसबुक के मुखिया मार्क जुकरबर्ग ने एक बार कहा था कि स्कूलों की स्थिति सुधारने के लिए वहाँ तकनीकी के इस्तेमाल पर जोर दिया जाना चाहिए. इनका मानना है कि फेसबुक ने लोगों के बीच की दूरियां मिटाई है और इसलिए लोगों को इसे अधिक से अधिक इस्तेमाल करना चाहिए.

फेसबुक ने हाल ही में वाट्सअप को भी खरीद लिया और आज भारत के हरेक स्मार्टफोन में फेसबुक और वाट्सअप मौजूद मिलेगा.

लेकिन यही जुकरबर्ग जब अपने घर की बात आती हैं तो पाला बदल लेते हैं. यह नहीं चाहते कि इनकी बेटी इन सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर समय जाया करे. जुकरबर्ग चाहते हैं कि इन सोशल नेटवर्किंग साइट्स से जुड़ने के पहले इनकी बेटियाँ खूब किताबें पढ़े और बाहर जाकर खेले, लोगों से मिलें, मौज-मस्ती करे.

यही हाल माइक्रोसॉफ्ट के मालिक बिल गेट्स का है. इन्होंने 2007 में अपनी बेटी पर पाबंदी लगा दी थी ताकि वह कम से कम समय स्क्रीन पर गुजारे. गेट्स की बेटी को विडियो गेम खेलने की आदत पड़ रही थी. बिज़नस इनसाइडर की एक रिपोर्ट के अनुसार गेट्स के बच्चों को 14 की उम्र तक फ़ोन इस्तेमाल करने की भी इजाज़त नहीं थी. अभी माना जाता है कि दुनिया भर में अधिकतर बच्चे दस वर्ष की अवस्था तक पहुंचते पहुंचते फ़ोन का इस्तेमाल करने लगते हैं.

गेट्स और जुकरबर्ग की तरह स्टीव जॉब्स ने भी किया था. वही जॉब्स जिन्होंने दुनिया को आईफोन और आईपैड उपलब्ध कराया. इन्होने भी अपने बच्चों पर पाबंदी लगाई ताकि वे स्क्रीन पर समय बर्बाद नहीं करें.

आखिर इन्टरनेट की दुनिया के ये दिग्गज क्यों नहीं चाहते हैं कि इनके बच्चे भी वही करें जो दुनिया के अन्य बच्चे कर रहे हैं

बिज़नस इनसाइडर की एक रिपोर्ट के अनुसार यह चौंकाने वाला तथ्य हैं. ये उद्योगपति जिस अनुपात में इन्टरनेट से पैसा कमाते हैं उसी अनुपात में अपने बच्चों को इन्टरनेट से दूर करते हैं.

सवाल है कि आखिर इन्टरनेट की दुनिया के ये दिग्गज क्यों नहीं चाहते हैं कि इनके बच्चे भी वही करें जो दुनिया के अन्य बच्चे कर रहे हैं. स्क्रीन पर अधिक से अधिक समय दें. ऐसा क्यों है कि जुकरबर्ग जैसे लोग दुनिया के बच्चों में तो इन्टरनेट को पसारना चाहते हैं पर अपने बच्चों को चाहते हैं कि वे इससे दूर रहें?

ऐसा इसलिए क्योंकि इनका मानना है, इनके द्वारा खोजी गई तकनिकी बच्चों के विकास के लिए सही नहीं है. बहुत सारे अध्ययन आ चुके हैं जिनमें यह साबित भी होने लगा है. इन अध्ययन के अनुसार अत्यधिक फोन के इस्तेमाल से नींद कम आने के बीमारी होती है. बच्चों की यादाश्त कमजोर होती है.

हाल ही में स्टेनफोर्ड विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर मार्यां वुल्फ ने एक अध्ययन में पाया कि स्मार्टफोन और टेबलेट के अधिक इस्तेमाल करने से बच्चों के मस्तिष्क में काफी परिवर्तन हो जाता है. इन्होने मीडियम पोस्ट नाम की एक वेबसाइट पर लिखा कि पूरी दुनिया से ऐसे ढेर सारे अध्ययन निकल कर आ रहे हैं जिससे पता चलता है कि स्क्रीन पर अधिक समय देने वाले बच्चों और नहीं देने वाले बच्चों के मस्तिष्क में बुनियादी अंतर आ जाता है. यह चिंताजनक है.

इनके अनुसार जो बातें गूढ़ हैं और उन्हें समझने में काफी समय लगता है उसको अगर किताब की जगह इन्टरनेट पर बच्चे पढ़ते हैं तो उनके मस्तिष्क पर इसका नकारात्मक असर होता है.

वैसे तो वुल्फ कहती हैं कि इस नकारात्मक असर को समझने के लिए और अधिक अध्ययन की जरुरत है पर यह आप पर निर्भर करता है कि आप और अधिक अध्ययन का इंतज़ार करेंगे कि मार्क जुकरबर्ग इत्यादि से प्रेरणा लेकर अपने बच्चों को स्क्रीन पर समय गुजारने से रोकेंगे. उन्हें  आभासी दुनिया से हटाकर वास्तविक दुनिया में अधिक समय गुजारने का मौका देंगे.

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