स्ट्रीट आर्ट – सारा जहां हैं कैनवस

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गार्गी मिश्रा

कला एक मिथ्या है जो हमें सत्य से अवगत कराती है – पाब्लो पिकासो

महान पेंटर पाब्लो पिकासो की कही हुई यह बात हर किस्म की कला, उसकी ज़रूरत, उसकी ख़ूबसूरती और उसके मूल्य समझाती है। कला का काम एक बंद आर्ट गैलरी, सीमित कैनवस, संग्रहालय इत्यादि की शोभा बढ़ाना नहीं बल्कि हमारे सामाजिक, राजनैतिक और मानवीय समस्याओं पर अपनी अभिव्यक्ति से प्रकाश डालना और उन समस्याओं को हल करने के लिए मानव जाति को सही दिशा में बढ़ने के लिए प्रेरित करना है। इसी अभिव्यक्ति की जरूरत ने स्ट्रीट आर्ट को जन्म दिया।

स्ट्रीट आर्ट का इतिहास और उसकी भौगौलिक उपस्थिति  काफ़ी विस्तार लिए हुए है। इसकी शुरुआत सन् 1970 में न्यूयॉर्क सिटी के ग्रैफिटी बूम से हुई। स्ट्रीट आर्ट एक किस्म का दृश्य कला है जिसका निर्माण और प्रदर्शन सार्वजनिक जगहों पर होता है, मसलन गलियां, सड़कें, बड़ी बड़ी इमारतें, मीनारें, होर्डिंग्स और पोस्टर इत्यादि। इक्कीसवीं सदी में इस कला का विकास कई रूप में हुआ हैं जैसे इंडिपेंडेंट पब्लिक आर्ट, पोस्ट ग्राफिटी, नियो ग्राफिटी, अर्बन आर्ट या गुरिल्ला आर्ट इत्यादि। आमतौर पर ये आर्ट कई तरह से बनाए जाते है जैसे स्प्रे पेंट ग्राफिटी, स्टेनसिल ग्राफिटी, व्हीट पेस्टेड पोस्टर आर्ट, स्टीकर आर्ट, आर्ट इन्सटालेशन्स, स्कल्पचर, वीडियो प्रोजेक्शन, रॉक बैलेंसिंग, वुड बलॉकिंग और यार्न बॉम्बिंग।

1990 में तुर्की में स्ट्रीट आर्ट और ग्रैफिटी को प्रोत्साहन मिला जिसने न सिर्फ़ कलाकारों के छोटे-छोटे समुदायों को प्रभावित किया बल्कि आगे की कई नस्लों पर भी इसका प्रभाव देखा गया। ‘लैंग्वेज ऑफ़ द वॉल: ग्रैफिटी स्ट्रीट /आर्ट’ नामक प्रदर्शनी से इसकी शुरुआत पेरा म्यूज़ियम या संग्रहालय में हुई।

न्यूयॉर्क में अफ़्रीकी और हिस्पैनिक जैसे अल्पसंख्यक समूह ने समाज में ख़ुद को अभिव्यक्त करने के लिए इस स्ट्रीट आर्ट का सहारा लिया। स्ट्रीट आर्ट एक निजी संघर्ष से होते हुए एक कलात्मक आन्दोलन के तौर पर प्रसिद्ध हुआ जिसने समाजिक समस्याओं और उसकी रूढ़ीवादी सोच को तोड़ने का काम किया।

कला किस तरह से समाज में एक सकारात्मक बदलाव का काम करती है इसका बहुत बड़ा और नायाब उदाहरण है स्ट्रीट आर्ट। आईये जानते है कुछ ऐसी कलाकृतियों के बारे में जिन्होने एक मकसद के तहत समाज में बदलाव लाने की कोशिश की।

मेक्सिको में अपराध की गिरावट मे सहायक हुआ स्ट्रीट आर्ट मेक्सिको के पाचूचा शहर का पाल्मितास इलाका ख़तरनाक माना जाता था। गली-नुक्कड़ों में युवा अपराधिक गिरोहों का आतंक था। इस समस्या से निपटने के लिए वहां के स्थानीय स्ट्रीट आर्टिस्टों ने पांच महीने में इस गरीब इलाके को इंद्रधनुष में तब्दील कर दिया। कुल 20,000 वर्गमीटर दीवारों और घरों की बाहरी दीवारों के नए और अलग-अलग रंगों से रंगा गया। इस सामाजिक परियोजना को अंजाम देने के लिए सरकार ने पौने तीन लाख यूरो दिए और 20 स्थानीय लोगों को नौकरी दी गई। मेक्सिको की नगरपालिका प्रतिनीधि आना एस्तेफानिया ग्रासिया के अनुसार इस परियोजना के शुरु होने के तीन साल बाद अपराधिक मामलों में 35 प्रतिशत की गिरावाट आई जिसके मुख्य कारण ये रहे कि जो नौजवान लड़के अपराधिक मामलों से जुड़े थे उन्होंने आपस में लड़ने के बजाए पेंटिग को अपनाया। एक दूसरे को जाना और एक ख़ुशहाल वातावरण का निर्माण किया।

 द ईस्ट साईड गैलरी– बर्लिन स्थित यह गैलरी विश्व की सबसे बड़ी ओपन एयर आर्ट गैलरी मानी जाती है। सन् 1990 में फरवरी से सितंबर तक बर्लिन की दीवारों को 1,316 मीटर तक अलग-अलग तरह से पेंट किया गया। 21 देशों से लगभग 118 कलाकारों ने 106 अद्वितीय कलाकृतियों को बर्लिन की दीवारों पर उकेरा। यह अभिव्यक्ति उन्होंने 9 नवम्बर को बर्लिन की दीवार के गिरने की खुशी मे दर्ज की जिसे यूरोप में चल रहे शीत युद्ध से जोड़ कर देखा जाता है। 1991 में इन कलाकृतियों को संग्रहालय में संरक्षित कर इन्हें नैशनल मॉन्यूमेंट घोषित किया गया।

द वॉटर टैंक प्रोजेक्ट– साल 2014 में न्यूयॉर्क में शुरु हुए इस प्रोजेक्ट ने शहर के क्षितिज को एक नया रूप दिया। इस प्रोजेक्ट के तहत कई बड़े और नामी कलाकारों ने छतों पर लगे पानी की टंकियों पर अपनी कला को उकेर वैश्विक पानी की समस्या की ओर ध्यान आकर्षित किया। वॉटर टैंक प्रोजेक्ट एक तरह का जागरूकता अभियान था जिसने लोगों में पानी के महत्व और उसके सदुपयोग को ले कर जागरुकता बढ़ाई।

 रिपब्लिका स्ट्रीट आर्ट फेस्टीवल यूक्रेन में आयोजित होने वाला रिपब्लिका स्ट्रीट आर्ट फेस्टीवल एक अंतर्राष्ट्रीय उत्सव है जिसके तहत स्ट्रीट आर्ट और संगीत को एक मंच पर लाने की कोशिश की जाती है। इस उत्सव का मुख्य आकर्षण यह है कि इसमें शहर के उदास इलाकों में मौजूद इमारतों पर ग्रैफिटी आर्ट का प्रदर्शन किया जाता है।

द टॉकिंग वॉल्स ऑफ ब्यूनो एरीज़ ब्यूनो एरीज़ की दीवारों को एक माध्यम के रूप में संवाद और अभिव्यक्ति के लिए उपयोग किया गया ताकि दीवारों पर दर्शाए गए चित्र और उनके संदेश लोगों की स्मृति में बने रह सकें और उससे एक सकारात्मक बदलाव की सम्भावना उपजे। एक समय ऐसा था जब क्रूर सेनायें, नृशंस हत्याएं और अपहरण का अधिक बोलबाला था तब सामाजिक कार्यकर्ता और कलाकारों में इन दीवारों पर अपनी कला का सहारा लेते हुए इस समस्याओं पर प्रकाश डालने की कोशिश की थी।

हमने देखा कि कैसे कला ने सामाजिक, राजनैतिक और मानसिक बदलाव में एक उत्प्रेरक का काम किया। स्ट्रीट आर्ट की ज़रूरत और ख़्याति दुनिया भर में देखी जा रही है।

एक नज़र उन कलाकारों पर जिन्हें स्ट्रीट आर्ट से पहचान मिली

  1. जो मिखाईल बसक्वा –      एपिग्राम्स और ग्राफिटी के लिए मशहूर
  2. स्मेट्स –                    रोज़मर्रा को मॉन्यूमेंटल में तब्दील करने का हुनर। मशहूर आर्ट – ग्रेट व्हाईट शार्क
  3. आईज़ैक कॉरडल –        प्राकृतिक चीज़ों से मिनीएचर आर्ट बनाने के महारथी
  4. ओलेक –                   यार्न बॉम्बिंग की कला में दक्ष
  5. फ्लेम –                     मोनोक्रोमैटिक चित्रण के लिए विख्यात
  6. पीटा –                     ग्राफिटी और स्कल्पचर्स के लिए मशहूर

(गार्गी  जीवन को कविता की तरह बरतती हैं. तस्वीरों से कविता लिखती हैं. उन तस्वीरों के ब्यौरे भी लिखे तो भी कविता लिखती हैं. और फिर कविता तो लिखती ही लिखती हैं.)

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