क्या आप फेक न्यूज़ की चपेट में आ चुके हैं?

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सौतुक डेस्क/

जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय के छात्रसंघ के नतीजे आ चुके हैं, जिसमे वाम दलों से जुड़े छात्र संगठन ने सारे के सारे पद जीते. लेकिन एक वेबसाइट दैनिकभारत.कॉम ने इसके विपरीत एक खबर चलाई ‘ब्रेकिंग न्यूज़: JNU हुआ भगवामय, ABVP की निधि त्रिपाठी जीती अध्यक्ष पद का चुनाव’.

इस खबर ने बहुतों को दिन भर मूर्ख बनाया. यहाँ तक कि भारतीय जनता पार्टी के बड़े नेता कैलाश विजयवर्गीय भी इसके चपेट में आ गए और ट्वीट कर जीत की बधाई दे डाली. अलबत्ता उनको बाद में अपना ट्वीट डिलीट करना पड़ा.

खैर विजयवर्गीय को तो लोगों ने सचेत कर दिया लेकिन बहुत से ऐसे लोग अभी भी इस तरह की खबर पढ़कर खुश हैं और निश्चिंत हैं. उनके न्यूज़ फीड में उनसे अलग विचार की खबरें आती ही नहीं हैं और वे इस तरह के वेबसाइट की खबरों के आधार पर ही अपने विचार बनाते रहते हैं.

सौतुक ने कुछ ऐसे लोगों से बात की जो वैचारिक तौर पर जेएनयू का विरोध करते दिखते हैं. उनसे बातचीत में पता चला कि वे सच में मानते हैं कि दो दिन पहले संपन्न छात्रसंघ चुनाव में एबीवीपी ने ही जीत दर्ज किया है.  जब उनसे इस खबर का स्रोत पूछा गया तो उन्होंने इस वेबसाइट को दिखाया.

शायद यही वजह है कि लोगों के विरोध करने और सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर मजाक उड़ाने के बावजूद भी दैनिकभारत.कॉम ने यह खबर हटाई नहीं है.

ये तब है जब जेएनयू में हुए चुनाव के नतीजे एकदम अलग है. वाम पार्टियों के गठबंधन जेएनयू स्टूडेंट्स यूनियन (जेएनयूएसयू) के उम्मीदवारों ने चारों मुख्य पद पर जीत दर्ज की थी. इतना ही नहीं, जेएनयू के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, जनरल सेक्रेटरी, और जॉइंट सेक्रेटरी के साथ-साथ 13 काउंसिलर के पद भी ये पने खाते में लेने में सफल हुए थे.

अईसा की गीता कुमारी 1506 वोट पाकर अध्यक्ष बनी हैं. इसी छात्र संगठन की साइमन जोया खान उपाध्यक्ष बनीं.

इसमें गौर करने वाली बात यह है कि इस वेबसाइट ने मूल खबर को घुमा-फिरा कर नहीं परोसा बल्कि एकदम ही झूठी खबर चलाई है.

विश्वविद्यालय के एक रिसर्च स्कॉलर मिथिलेश प्रियदर्शी लिखते हैं, “ अफ़वाह और फेक न्यूज की फैक्ट्री बने ‘दैनिक भारत’ के ‘जहरीले उत्पादों’ की ज़द में आम से लेकर ख़ास तक हैं. आज भाजपा सांसद परेश रावल ने ट्वीट किया कि मुंबई ताज हमले के शहीद मेजर संदीप उन्नीकृष्णन को बेंगलुरु से होने के बावजूद वर्तमान कांग्रेस सरकार द्वारा 21 बंदूकों की सलामी नहीं दी गई. यह ट्वीट गौरी लंकेश को राजकीय सम्मान दिए जाने के संदर्भ में था. दिलचस्प यह है, कि यह न्यूज ‘दैनिक भारत’ का था, जो फैलते-फैलते परेश रावल तक पहुंचा होगा. और रावल साहब ने बिना क्रॉस चेक किये ट्वीट मार दिया. जबकि सच ये है कि उस समय कर्नाटक में भाजपा की ही सरकार थी. और उन्नीकृष्णन की पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंत्येष्टि हुई थी. तो ये है इन फेक बेवसाइटों का असर. जब पढ़े-लिखे क़ाबिल लोग इनका किसी संदर्भ ग्रन्थ की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं तो ‘मंटू-चिंटू’ की कौन कहे?”

हाल ही में एनडीटीवी के पत्रकार रविश कुमार के खिलाफ भी ऐसी कुछ खबरें चलाई गयीं कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को गुंडा कहा. रविश को इसके खिलाफ अपनी सफाई देनी पड़ी कि उन्होंने ऐसा नहीं कहा है.

रविवार को ऑल्ट न्यूज़ नाम के वेबसाइट ने एक खबर चलाई जिसमे उसने साबित किया कि भाजपा के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय भी ऐसे गतिविधियों में लिप्त हैं. इस वेबसाइट के अनुसार मालवीय ने ग्यारह सेकंड की एक क्लिप्पिंग चलाई जिसमे रविश कुमार यह कहते हुए दिखाए जा रहे हैं, “जब तक ये व्यक्ति माफ़ी नहीं मांगेगा और मैं अपने पार्टी के लोगों से कहता हूँ.” इस क्लिपिंग पर सवाल खड़ा करते हुए मालवीय पूछते हैं कि आखिर पत्रकार की कौन सी पार्टी हैं.

मालवीय यह नहीं बताते कि यह क्लिपिंग रविश के दस मिनट के एक भाषण का हिस्सा है जो उन्होंने प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया में दिया. गौरी लंकेश की हत्या के बाद जमा हुए लोगों को संबोधित करते हुए रविश कहते हैं, “चीन और बर्मा से लौटने के बाद तो पहला काम यही करें कि वो दधिची को अनफोलो करें और वो बताएं कि उनसे कहे कि हमसे गलती हुई है. जब तक ये व्यक्ति माफ़ी नहीं मांगेगा और मैं पार्टी के लोगों से कहता हूँ कि यह नेशनलिस्ट हिंदुत्व, नेशनलिस्ट नहीं है. ये हम सब को एक नागरिक के तौर पर प्रधानमन्त्री  से मांग करनी चाहिए.”

इसमें रविश प्रधानमंत्री और उनके पार्टी की बात कर रहे हैं जिसमे उन्होंने आशा व्यक्त की है कि मोदी अपनी पार्टी से बात करेंगे न कि रविश किसी अपनी पार्टी की बात कर रहे हैं.

सौतुक के खबर लिखने तक करीब 600 लोगों ने मालवीय के ट्वीट को शेयर कर दिया था. इतने ही लोगों के उसे लाईक भी किया था.

आखिर इस तरह का झूठ दिखाने वाले लोगों की मंशा क्या है? वे इस तरह की खबरे चलाकार किसका हित साध रहे हैं? इससे भी बड़ी बात है कि पाठक, जो इस तरह की खबरें पढ़कर अपना मत बना रहे हैं क्या उनको ऐसे लोगों से कोई शिकायत नहीं है?

 

 

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