गीत चतुर्वेदी की तीन कवितायें

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27 नवंबर 1977 को मुंबई में जन्मे गीत चतुर्वेदी की ताज़ा किताब उनका कविता संग्रह “न्यूनतम मैं” है, जो कि राजकमल प्रकाशन से आया है. इससे पहले 2010 में “आलाप में गिरह” प्रकाशित. उसी वर्ष लम्बी कहानियों की दो किताबें “सावंत आंटी की लड़कियां” और “पिंक स्लिप डैडी” आईं. उन्हें कविता के लिए भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार, गल्प के लिए कृष्ण प्रताप कथा सम्मान मिल चुके हैं. “इंडियन एक्सप्रेस” सहित कई प्रकाशन संस्थानों ने उन्हें भारत के सर्वश्रेष्ठ लेखकों में शुमार किया है. उनकी रचनाएँ देश-दुनिया की सत्रह भाषाओँ में अनूदित हो चुकी हैं. उनके नॉवेला “सिमसिम” के अंग्रेजी अनुवाद (अनुवादक: अनिता गोपालन) को “पेन अमेरिका” ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित “पेन-हैम ट्रांसलेशन ग्रांट 2016 अवार्ड  से नवाज़ा है.

बहने का जन्मजात हुनर

जिन स्कूलों में गया, वहां केवल तैरना सिखाया गया
डूबने का हुनर मैंने ख़ुद विकसित किया

बहना मैंने कभी नहीं सीखा
मैं इतना हल्का था हमेशा कि कभी ज़रुरत ही नहीं पड़ी

कहीं भी बह सकता हूँ, तुम्हारे कंठ से निकले गीतों में भी.
बह जाने की वफ़ादारी मुझमें भरपूर है

मैं एक उदास चिड़िया का पंख हूँ
जो उसके प्रेमी के ठोंगा मारने से टूटा

मैं घास का वह तिनका हूँ, जिससे एक अल्हड़ लड़की ने
एक संजीदा किशोर के कानों में गुदगुदी की थी

मैं पंख की तरह बहा, तिनके की तरह बहा
तुम्हारी सोच में बहा, बातों की लोच में बहा

एक बारिश जिसका सरनेम फुहार था, शादी के बाद मूसलाधार हो गया
उसके पानी में मैं काग़ज़ की नाव-सा बहा

जैसे बह-बहकर सात समंदर पार पहुंच जाता है एक बीज और उग जाता है
तुम्हारे मन के भीतर बहते-बहते मैं किसी और के मन में उग गया

जब कभी हवा में बहा, उसे हवा की नदी कहा
आँख की नदी, बात की नदी, शवासन में लेटकर रात की नदी में बहा

कभी नहीं भूला उन नदियों को
जिनकी देह पर मेरे बहने के रेखाचित्र थे

जब अपने आप उगता है मेरी हथेलियों पर पसीना
नदी का पानी, मेरी देह के पानी से संवाद करता है.

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सीकर्सहब से साभार

सपने और आंसू

माँ, सपने कहाँ से आते हैं?

बेटा, दुनिया के सारे सपने समंदर के पेट में रहते हैं. वहां से एक सीढ़ी सीधा चाँद के दरवाज़े पर जाती है. वे एक-एक सीढ़ी चढ़कर चाँद पर जाते हैं, और वहां से हमारी नींद में कूद जाते हैं. इसीलिए जब हम सपना देखते हैं, चाँद मुस्कुरा रहा होता है. कभी खिलकर, कभी छिपकर.

माँ, आँख से गिरने के बाद आंसू कहाँ जाते हैं?
बेटा, गाल जहाँ ख़त्म होते हैं, ठीक वहीं से समंदर शुरू हो जाता है.

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फ्रांस्वा त्रूफो की फिल्मों के लिए

मैं काग़ज़ पर जो लिखता हूँ, वो लहराता है किसी सांप की तरह
मैं ज़िन्दगी के करैत से खेलता हूँ.

मेरे रंगमंच का आखिरी दृश्य चल रहा है : मेरी आकांक्षाओं का समंदर आँखों के आगे डोल रहा है : किसी छोटे बच्चे-सा दौड़ कर जाता हूँ मैं : उस समंदर में अपने पैरों से प्रविष्ट होता हूँ : और लौट आता हूँ किसी उछली हुई गेंद की तरह : मेरे टखने मेरी आकांक्षाओं से गीले हैं : मेरे पास समंदर था पर मेरी देह कभी भीग न पाई

आत्मा सिर्फ़ उसी जगह स्वतंत्र महसूस करती है, जहाँ से लौट आने की कोई गुंजाइश न बचती हो : हम उस जगह तक पहुंचना हमेशा टालते हैं : कुछ पटाखे ज़मीन से उठते हैं : और आसमान में जाकर फटते हैं : उत्थान भी नष्ट करता है

400 ब्लोज का एक दृश्य

वह औरत घूरती है बिस्तर की सिलवटों को
जिस पर थोड़ी देर पहले तक ख़ामोशी चप्पल पहनकर लेटी थी
स्वप्न देखता एक बूढ़ा लेखक एक बहुत पुरानी खांसी याद करता है
खांसा था वह एक लड़की के साथ हँसते हुए
फिर से जी लेना चाहता है वह उस पल को और पाता है
बिना उस लड़की के, खांसी थोड़ी कम गूंजती है

थोड़ी कम खनकती है हंसी.

कि एक पुरानी खांसी की ठीक वैसी ही नक़ल नहीं हो सकती
एक पुराने प्रेम की नक़ल करना तो और नामुमकिन.

सुदूर अतीत में बैठता है : हमारे प्रेम के पलों का आदि-पूर्वज पल : हमारे जीवन का सारा प्रेम उसी का वंशज है : धीमे : और धीमे : बहुत धीमे : दूर से आ रही है जो यह आवाज़ : सुनो धीमे : तुम्हें बिलकुल अपने ही भीतर से आती सुनाई देगी : वह पुरखा मन्त्र पढ़ रहा है : अपने लम्बे वंश की कामना में

दृश्य और दृष्टि को बांधता है संदेह का धागा : मैं एक किताब में हाथ डाल शब्द टटोलता हूँ : मेरी उँगलियों में चिपक जाता है संदेह का काढ़ा : पूरी किताब जलकर ख़ाक हो गई : उस राख में भी बचा रह गया एक नन्हा सुंदर वाक्य : सोमरस से नहीं, मृत्युरस से लिखी गई थी वह पंक्ति : इसलिए अमर है

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(गीत भोपाल में रहते हैं. उनका ईमेल पता है : [email protected])

4 COMMENTS

  1. बहुत ही सुंदर कविताएं हैं।
    गीत सर मेरे सबसे प्रिय लेखक,कवि हैं।

  2. Meloncholic state arisen from the depth of very core of pure human …the style of poetic expression is in a very different way and beyond the contemporary hindi poetry… the agony of the content shake us …it transform us into the same world of the poet…thank you for your poems which are mesmorised us…
    Congratulations sir…

  3. The most wonderful contemporary Hindi poet of our times. After a decade, he’s certainly got to go down into history as one of the greatest!

  4. बहुत सुंदर कविताएँ। गीत को पढ़ना हमेशा ही एक अद्भुत अनुभव से गुजरना होता है।

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