ओसियन वूओंग: पिता हैं भीतर तुम्हारे फेफड़ों के

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अनुवाद: चन्दन पाण्डेय

( मनोज पटेल की स्मृति में )

विकिपीडिया बताता है कि ओसियन वूओंग का जन्म हो चिन्ह मिनसिटी में हुआ जबकि पोएट्री फाउंडेशन सैगोन को उनका जन्म शहर बताता है. दोनों नाम एक ही शहर के हैं लेकिन उसके पुकारने के अंदाज में इन दोनों स्रोतों का कवि के प्रति प्रेम दिखता है. 1988 में जन्में वूओंग न्यूयॉर्क के बाशिंदा हैं. इनकी शिक्षा अमेरिका के कनेक्टिकट शहर में हुई. इनकी काव्य प्रतिभा देखने के काबिल है.

‘कंटेट’ और ‘फॉर्म’ को एक समान प्यार करने वाला यह कवि अपने एक इंटरव्यू में ‘फॉर्म’ की बाबत कहता है: ‘कविता की गति का वाहन करने से अलग, ‘फॉर्म’ को ‘कंटेट’ के विस्तार के बतौर देखता हूँ, ऐसा विस्तार जहाँ तनावों की बेहतर पड़ताल हो सकती है.’ इस कवि को महज प्रयोगधर्मी कह देना इसके महती प्रयासों को नकारने जैसा है. इनके सारे प्रयोग अपने में कविता ही हैं. इनकी कविता ‘दे टेनेशन’ शीर्षक से ही काव्य प्रभाव पैदा करती है. शीर्षक यों है: ‘DetoNation’. एक अर्थ छवि के लिए ‘Detonation’ ही महत्वपूर्व है लेकिन ‘स्माल एन’ की जगह ‘कैपिटल एन’ के प्रयोग ने पूरे राष्ट्र को विस्फोट का पर्याय बना दिया है. मजेदार बात यह कि इस प्रयोग को अनुवाद में ढालना भी लगभग असंभव था.

इनके कविता संग्रह ‘नाईट स्काई विद एक्जिट वून्ड्स’ की चौतरफा धूम है. इससे इतर दो लघु काव्य पुस्तिकाएं प्रकाशित हुई थीं: ‘नो’ तथा ‘बर्निंग्स’. अपनी कविताओं के लिए इन्हें कई सारे पुरस्कार मिले हैं जिनमें व्हाईटिंग अवार्ड, फॉरवर्ड प्राईज महत्वपूर्ण हैं.

यहाँ इनकी दो कविताओं के अविकल अनुवाद प्रस्तुत हैं.

 

टेलेमाकस

किसी सुपुत्र की भांति, बालों से घसीटते हुए, अपने पिता को पानी से बाहर निकालता हूँ

उजली रेत पर, उनकी उँगलियों के पोर लकीर खींचते है

लहरें उन्हें मिटाने के लिए आपसे में होड़ लगाती हैं. दअसल साहिल के पार शहर

वहाँ नहीं है जहाँ हम

छोड़ कर आये थे. बम धमाकों में क्षत-विक्षत

बड़ा गिरजा अब पेड़ों का गिरजा भर

रह गया है. घुटनों के बल उनके बगल में यह देखने के लिए बैठता हूँ

मैं कहाँ तक डूब सकता हूँ. क्या आप मुझे जानते हैं,

पिताजीलेकिन प्रत्युत्तर कभी आता ही नहीं. जवाब

उनकी पीठ में लगी गोली से बना, सामुद्रिक जल से भरा, गड्ढा है. वह इस कदर स्थिर हैं मैं सोचता हूँ

वह किसी के भी पिता हो सकते थे, वैसे मिले

जैसे उस बच्चे के कदमों में  उतराती मिली हो

एक हरी बोतल जिसमें पूरा एक वर्ष हो जिसे

उसने जिया ही नहीं. मैं छूता हूँ

उनके कान. निष्फल. मैं उन्हें पलटता हूँ

चित. भर नजर देखने के लिए. बड़े गिरजे को

उनकी सागर सी काली आँखों में. वह चेहरा

जो अभी मेरा नहीं – लेकिन वह जो मेरा नकाब होगा

तमाम प्रेमियों को शुभरात्रि में चूमते समय:

जिस तरह मैं पिता के होठों को बंद करता हूँ

अपने होठों सेऔर डुबाने का काम

निष्ठा पूर्वक शुरू करता हूँ.

( टेलेमाकस ग्रीक मिथक का महत्वपूर्ण चरित्र है.ओडिसस और पेनेलोप का यह पुत्र होमर की ओडिसी का प्रमुख पात्र है.)

विस्फोट

एक चुटकुला क्रोध मिश्रित इस उदगार पर भी ख़त्म हो सकता है – अरे ?

यह बम है जो कहता है कि तुम्हारे पिता इधर हैं.

अब तुम्हारे पिता हैं भीतर तुम्हारे

फेफड़ों के. कितनी निर्भार

है पृथ्वी – तत्पश्चात.

पिता  शब्द लिखना भी

बम से दमकते पन्नों पर दिन

के एक टुकड़े की नक्काशी करना है.

रौशनी इतनी तो है जिसमें डूबा जा सके

लेकिन इतनी भी अतिरिक्त नहीं जो अस्थियों में जा पैठे

और ठहरे. यहाँ मत ठहरो, उन्होंने ने कहा, मेरे बेटे

फूलों के नाम सा खंडित. रोना नहीं

कभी. इसलिए मैंने रात के भीतर शरण लिया.

वह रात: मेरी परछाईं बढ़ती हुई

मेरे पिता की तरफ.

 

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