अरुंधती रॉय का उपन्यास ‘दी मिनिस्ट्री ऑफ़ अटमोस्ट हैप्पीनेस’ बुकर की दौड़ से बाहर

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सौतुक डेस्क/

जानी मानी लेखिका अरुंधती रॉय का हाल ही में आया उपन्यास ‘दी मिनिस्ट्री ऑफ़ अटमोस्ट हैप्पीनेस’ बुकर की दौड़ से बाहर हो गया है. अपने पहले उपन्यास ‘गॉड ऑफ़ स्माल थिंग्स’ से बुकर जीतने वाली लेखिका अरुंधती राय का दूसरा उपन्यास  करीब बीस साल बाद आया था.

बुधवार को दी मैन बुकर प्राइज (फिक्शन) 2017 के आखिरी छः रचना के नामों की घोषणा हुई जिसमें अरुंधती की पुस्तक का जिक्र नहीं था.

जो छः पुस्तकें चुनी गयी हैं, वे हैं पॉल ऑस्टर की ‘4321’, एमिली फ्रिद्लंद की ‘हिस्ट्री ऑफ़ वूल्व्स’, पाकिस्तानी मूल के लेखक मोहसिन हामिद की ‘एग्जिट वेस्ट’, फिओना मोजले की ‘एल्मेट’, जॉर्ज सौन्ड़ेर्स की ‘लिंकन इन द बार्दो’ और अली स्मिथ की ‘ओटोमन’.

सनद रहे कि इन छः किताबों को पहले से शॉर्टलिस्टेड तेरह किताबों में से चुना गया है. अब इन छः में से उस आखिरी पुस्तक को चुना जायेगा जिसको इस साल का बुकर मिलेगा.

अरुंधती रॉय की किताब से लोगों को काफी उम्मीदें थीं. खासकर अंतर्राष्ट्रीय समीक्षकों द्वारा इसकी काफी तारीफ़ की जा रही थी.

इस साल के बुकर पुरस्कार की घोषणा अक्टूबर 17 को होगी जिसमे विजेता को पुरस्कार राशि के तौर पर 50,000 पौंड (42. 36 लाख रुपये) मिलेंगे.

अरुंधती रॉय की पहली पुस्तक का 18 भाषा में अनुवाद हो चूका है और करोड़ से ऊपर प्रतियां बिक चुकी है. शायद इन्ही वजहों से लोगों के लिए उनका दूसरा उपन्यास बहुप्रतीक्षित रहा.

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