मंदिर से लेकर आईटी इंडस्ट्री तक ऑटोमेशन पसार रहा अपने पाँव

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शिखा कौशिक/

यह जानकार आपको हैरानी होगी कि इस साल के गणपति महोत्सव में पुणे के एक पूजा स्थल पर आरती की जिम्मेदारी एक पंडित को न देकर रोबोट को दी गई थी. यह अहमदाबाद की एक संस्था पाटिल ऑटोमेशन के प्रयास से संभव हुआ.

इस प्रयास पर कुछ लोग हंसेंगे, पर इस खबर से बहुतों की नींद गायब हो गई है. रोबोट अब सबकुछ करने को तैयार हो रहे हैं. रोजमर्रा के काम से लेकर आईटी इंडस्ट्री तक में रोबोट, कर्मचारियों को विस्थापित कर रहे हैं.

ऐसे में बांकी के लोग क्या करेंगे? यह एक अहम् सवाल है. नीति आयोग के हालिया रिपोर्ट के अनुसार बेरोजगारी पिछले साल की तुलना में 2017 और 2018 में बढ़ेगी.

इसी सवाल से जूझते हुए शायद भारत सरकार ने जुलाई 24 को घोषणा कर दी कि यह देश में बिना ड्राईवर से चलने वाली कार या गाड़ियों को चलने कि इजाज़त नहीं देगी. जबकि अभी ऐसी स्थिति बनती भी नहीं दिख रही थी. किसी कंपनी ने सरकार से ऐसी गाड़ी चलाने की इजाज़त भी नहीं माँगी थी.

इनफ़ोसिस के उस वक्त के सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर विशाल सिक्का ने मीडिया के सामने एक बिना ड्राईवर से चलने वाली कार की नुमाईश भर की थी.

फिर भारत सरकार ने ऐसा क्यों किया? क्योंकि सरकार डरी हुई है कि इस तरह की तकनीकी देश के लाखों लोग जो यातायात में लगे हुए हैं, उनको बेरोजगार कर देगी. सनद रहे कि देश की सबसे बड़ी उपलब्धि और चुनौती दोनों ही इस देश के युवा ही हैं. यह जवानों का देश है और इसलिए इनको अदद नौकरी की आवश्यकता है.
इस ऑटोमेशन या कहे स्वचालन की तकनीकी ने भारत के नीति निर्माताओं की नींद उड़ा रखी है. तमाम सर्वे यह बता रहे हैं कि इस तकनीकी की वजह से भारत में आने वाले समय में लाखों लोग बेरोजगार होने वाले हैं.
हाल ही में आये एचएफएस रिसर्च ने अनुमान लगाया है कि आने वाले पांच साल में इस तकनीकी की वजह से करीब साढ़े सात लाख नौकरियां ख़त्म हो जायेगी.

विभिन्न सर्वे और रिपोर्ट भारतीय आईटी सेक्टर के लिए बड़ा ही डरवाना भविष्य बता रहे हैं. पीपलस्ट्रांग नाम की एक एचआर एजेंसी की मानें तो ऑटोमेशन (स्वचालन) से कम होने वाली कुल वैश्विक नौकरी में से 23% तो सिर्फ भारत से होगा.
इतना ही नहीं, इसके अनुसार आईटी-सम्बंधित नौकरियां सबसे पहले और सबसे ज़्यादा प्रभावित होंगी.

एचएफएस रिपोर्ट का अनुमान है कि 2021 तक भारत में निचले स्तर पर साढ़े छः लाख नौकरियों का सफाया हो जाएगा.

इसका असर अभी से दिखने लगा है. इसी ऑटोमेशन की वजह से टेक महिंद्रा कंपनी में 2016 के महज एक तिमाही में दो हजार लोगों की नौकरी चली गई. इन्फोसिस ने नौ हजार कर्मचारियों को अधिक उन्नत परियोजनाओं पर काम करने के लिए ‘रिलीज़’ कर दिया. कारण यह बताया गया कि जो काम वे कर रहे थे वे अब स्वचालित हो गए हैं. कैपजेमिनी और सीटीएस नामक कंपनियां भी कमोबेश इसी स्थिति में हैं.

आईटी सेवा कंपनी विप्रो के मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी, केआर संजीव ने कहा कि यदि इस ऑटोमेशन से सही तरीके से सामंजस्य नहीं बैठाया गया तो यह बहुत बड़ी आपदा बनकर उभरेगी. संजीव ने बेंगलुरु में भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) द्वारा आयोजित एक हालिया आयोजन में ‘मशीनों के उदय और मानव श्रम के भविष्य’ पर चर्चा के दौरान कहा.

उनके अनुसार भी ऑटोमेशन की वजह से 60% -70% मौजूदा नौकरियां प्रभावित होंगी. यह सारा परिवर्तन अगले दस से बीस सालों में होने वाला है.

 

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