2014 में मोदी की एक कारगुजारी और आयोग को करना पड़ा आचार संहिता में संशोधन

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सौतुक डेस्क/

नरेन्द्र मोदी आदर्श आचार संहिता के जिस कमजोरी का 2014 के चुनाव प्रचार में बेजा इस्तेमाल किया था उसको रोकने के लिए निर्वाचन आयोग को आदर्श आचार संहिता में संशोधन करना पड़ा है. मोदी ने 2014 में चुनाव के दिन ही अपने पार्टी का घोषणापत्र जारी किया था जिसे बड़े स्तर पर मीडिया कवरेज भी मिला था. जबकि आदर्श आचार संहिता के अनुसार मतदान के 48 घंटे पहले से राजनितिक दलों के किसी भी तरह के चुनावी प्रचार पर प्रतिबन्ध होता है. लेकिन मोदी के घोषणापत्र को चुनाव के दिन व्यापक मीडिया कवरेज मिला था. नरेन्द्र मोदी के ऐसा करने के बाद कांग्रेस पार्टी ने निर्वाचन आयोग से इसकी शिकायत की थी.

पांच साल बाद निर्वाचन आयोग ने शनिवार को आदर्श आचार संहिता में संशोधन किया. इस संसोधन में राजनीतिक दलों को चुनाव के  पहले के 48 घंटों में घोषणापत्र जारी करने पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया है.  सत्रहवीं लोकसभा का चुनाव सात चरणों में होगा, 11 अप्रैल से 19 मई के बीच और परिणाम 23 मई को घोषित किए जाएंगे.

उपरोक्त संशोधन आदर्श आचार संहिता के भाग 8 में किया गया है जो चुनाव घोषणापत्र से संबंधित है. आयोग का निर्णय 14 सदस्यीय समिति की सिफारिश से आया है. इस समिति का गठन पीपुल्स रिप्रेजेंटेशन (आरपी) अधिनियम की धारा 126 और मीडिया में तेजी से विस्तार के मद्देनजर अन्य संबंधित प्रावधानों पर पुनर्विचार के लिए किया गया था.

22 जनवरी को आयोग ने सभी राष्ट्रीय और राज्य के राजनीतिक दलों को इस मद में लिखकर उनसे राय मांगी थी. आयोग ने लिखा था कि चुनाव के पहले चरण में मतदान समाप्त होने से कम से कम 72 घंटे पहले चुनावी घोषणापत्र जारी हो जाना चाहिए. एक महीने बाद यानी 21 फरवरी तक कुल पांच राजनीतिक दलों ने इसका जवाब दिया था. इसमें समाजवादी पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, लोक जनशक्ति पार्टी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस शामिल हैं. कांग्रेस ने ऐसे किसी भी संशोधन का विरोध किया था.

हालाँकि आयोग का प्रस्ताव मतदान के पहले चरण से 72 घंटे पहले घोषणापत्र जारी करने पर रोक लगाने का था, लेकिन शनिवार को आये संशोधन में आयोग ने इस बदलकर चुनाव मौन अवधि ( मतदान के ठीक पहले के 48 घंटे) के दौरान राजनितिक दलों के द्वारा घोषणापत्र जारी करने पर प्रतिबन्ध लगा दिया.

जैसा कि ऊपर लिखा गया है 2014 में भाजपा ने पहले चरण के मतदान के दिन अपना लोकसभा घोषणा पत्र जारी किया था. कांग्रेस ने चुनाव आयोग से इसकी शिकायत की थी कि यह मतदाताओं को प्रभावित करने का प्रयास है. चूंकि आदर्श आचार संहिता में इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट बात नहीं थी इसलिए निर्वाचन आयोग इस पर चुप रहना पड़ा.

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