बच्चों में शराब सेवन हो रहा सामान्य, बंगलुरु में शराब के साथ स्कूल में बच्चे पकड़े गए

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सौतुक डेस्क/

आपको यह जानकार हैरानी होगी कि बंगलुरु के स्कूल में आजकल कई बच्चे अपने पानी के बोतल या जूस के साथ शराब लाते हुए पकडे गए हैं.

जी हाँ. कई पब और रेस्तरां के मालिकों के द्वारा इन विद्यालयों को इत्तला किये जाने पर कि उनके स्कूल के बच्चे शराब पीने को लेकर सक्रिय हैं, इन विद्यालयों ने जांच बैठाई तो पाया कि बहुत से ऐसे बच्चे हैं जो अपनी पानी के बोतल या जूस के साथ कक्षा में शराब लेकर बैठ रहे हैं.

इस सूचना के बाद कई स्कूल प्रशासन सक्रिय हो गए और सभी छात्रों के बोतल और बैग की जांच होने लगी. ‘दी हिन्दू’ की एक खबर के अनुसार कम से कम 16 ऐसे केस पाए गए जिसमें स्कूल के बच्चे शराब के साथ कक्षा में बैठे थे.

इस अंग्रेजी अखबार से बात करते हुए मंसूर अली खान जो दिल्ली पब्लिक स्कूल समूह के बोर्ड मेम्बर हैं, ने बताया कि आजकल बच्चों के पानी के बोतल या अन्य बोतलों की भी जांच होती रहती है. इनके पांच स्कूल बंगलुरु में हैं. इस जांच के दरम्यान कम से कम 16 बच्चे ऐसे पाए गए हैं जो कक्षा में शराब लेकर आते रहे हैं.

विश्व स्वास्थय संगठन (WHO) की एक रिपोर्ट के अनुसार करीब 30 प्रतिशत भारतीय लोग सामान्य अंतराल पर शराब का सेवन करते हैं.

इन्होंने  आगे कहा कि इस जांच में पता चला है कि बच्चे शराब के साथ स्कूल में आते हैं. इसके लिए वे पानी का बोतल इस्तेमाल करते हैं और इसकी पहचान मुश्किल है.

जब कोई बच्चा ऐसा करते हुए पाया जाता है तो उसके घरवालों को इत्तला किया जाता है और उस बच्चे को काउंसलिंग के लिए आगे भेजा जाता है.

एक अध्यापक ने मीडिया को बताया है कि एक बार कक्षा नौ के एक बच्चे को शराब के साथ पकड़ने पर दुविधा की स्थिति उत्पन्न हो गयी. पकडे जाने पर उस छात्र ने बताया कि वह अपने साथियों को दिखाने के लिए लाया था. उस अध्यापक ने कहा है कि ऐसी स्थिति में बड़ी मुश्किल हो जाती है.

बच्चों में शराब का सेवन हो रहा सामान्य

भारतीय समाज में शराब को अच्छी नजर से नहीं देखा जाता रहा है और खासकर बच्चों को तो इससे दूर ही रखा जाता है. पर ऐसा देखने में आ रहा है कि शराब अब बच्चों के लिए भी धीरे-धीरे सामान्य होती जा रही है. खासकर मेट्रो में.

विश्व स्वास्थय संगठन (WHO) की एक रिपोर्ट के अनुसार करीब 30 प्रतिशत भारतीय लोग सामान्य अंतराल पर शराब का सेवन करते हैं. इसी तरह आर्गेनाईजेशन फॉर इकनोमिक कोऑपरेशन और डेवलपमेंट (OECD) की एक रिपोर्ट बच्चों में शराब को लेकर स्थिति पर प्रकाश डालती है. इस रिपोर्ट के अनुसार 15 साल से कम उम्र के बच्चों में शराब धीरे-धीरे सामान्य होती जा रही है. पहले करीब 44 प्रतिशत ऐसे बच्चे थे जिन्होंने शराब को कभी हाथ नहीं लगाया था. अब यह घटकर महज 30 प्रतिशत रह गया है. इसका मतलब यह हुआ कि भारत में करीब 70 प्रतिशत बच्चे पंद्रह साल से पहले ही शराब कम से कम एक बार चख लेते हैं. यह लड़कों का आंकड़ा है जिसे अंग्रेजी अखबार डीएनए ने प्रकाशित किया है. इस अखबार के अनुसार करीब 69 प्रतिशत लडकियां भी 15 साल से कम उम्र में ही शराब चख लेती हैं.

विशेषज्ञ इसके लिए शराब की आसानी से उपलब्धता, घरों में धडल्ले से इसका इस्तेमाल, यार दोस्तों का दबाव वगैरह को इसका मुख्य कारण मानते हैं.

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