भाप इंजन को चलते हुए दोबारा देखना हो तो दिल्ली आने की तैयारी कीजिये

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अरुण कुमार दास/

भाप इंजन अब लगभग गायब ही हो गए हैं और पिछले पंद्रह बीस सालों में पैदा हुई पीढी इसे सिर्फ किताबों में ही देख पाती है. या फिर किसी से सुन लिया उस काले धुंआ छोड़ते इंजन के बारे में. लेकिन अब अगर आप नई पीढी में आते हैं और उस भाप इंजन को लेकर उत्सुक हैं तो आपको उस भाप इंजन को चलते हुए देखने का पूरा मौका मिलेगा. इसके लिए बस आप को देश की राजधानी दिल्ली आना होगा.

जी हाँ. रेलवे भाप इंजन की विरासत को नया जीवन देने की पहल कर रहा है और भाप इंजन दिल्ली के रिंग रेलवे लाईनों पर चलती नजर आएगी.

एक रेलवे अधिकारी के अनुसार देश की राजधानी में लम्बे समय से उपेक्षित रिंग रेलवे को पुनर्जीवित करने की तयारी चल रही है. यह रिंग रेलवे कभी काफी लोकप्रिय रहा है.

यह रिंग रेलवे लाइन करीब 34 किलोमीटर लम्बा है और दिल्ली के विभिन्न हिस्सो को आपस में जोड़ता है जैसे चाणक्यपुरी, सरोजिनीनगर और सफ़दरजंग इत्यादि.

योजना के मुताबिक, चार डिब्बों के साथ भाप इंजन वाली विरासत ट्रेन सफदरजंग स्टेशन से आनंद विहार तक चलेगी, जिसमें पुराना यमुना पुल, पुरानी दिल्ली, नई दिल्ली और निजामुद्दीन स्टेशन होंगे.

इसके अतिरिक्त इसे देश के सभी पहाड़ी रास्तों पर चलाने का प्रयास हो रहा है.

चार डिब्बों के साथ भाप इंजन वाली विरासत ट्रेन सफदरजंग स्टेशन से आनंद विहार तक चलेगी, जिसमें पुराना यमुना पुल, पुरानी दिल्ली, नई दिल्ली और निजामुद्दीन स्टेशन होंगे

इसके लिए पहले कांगड़ा वैली रेलवे के पालनपुर-जोगिंदरनगर खंड पर भाप इंजन का सफल परिचालन किया गया है. और फिर सभी पांच पहाड़ी रेलवे लाइन पर पर्यटकों को लुभाने के लिए भाप इंजन चलाने की योजना तैयार की गयी है.

कांगड़ा वैली रेलवे यूनेस्को की विश्व विरासत स्थल की संभावित सूची में शामिल है. यहां करीब 20 साल पर भाप इंजन का परिचालन दोबारा शुरू किया गया, जिससे हिमाचल प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.

दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे और नीलगिरी माउंटेन रेलवे नियमित रूप से भाप इंजन वाली ट्रेन का परिचालन करती है. वहीं कालका-शिमला रेलवे और माथेरान हिल रेवले पर्यटकों की मांग पर भाप इंजनवाली रेलगाड़ी का परिचालन करती है.

रेल विरासत से जुड़े रेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “यह भारतीय रेलवे में भाप इंजनों का बड़ा पुनरुद्धार है. हमारा लक्ष्य सभी पहाड़ी रेल के साथ ही दिल्ली रिंग रेलवे मार्ग पर नियमित रूप से भाप इंजन चालित रेलगाड़ी का परिचालन करना है.”

डीजल और इलेक्ट्रिक इंजन के आ जाने से साल 1995 में रेलवे ने धीरे-धीरे भाप इंजनों को परिचालन से बाहर कर दिया था.हालांकि इससे पहले भी साल 2010 में राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान दिल्ली रिंग रेलवे पर भाप इंजनवाली ट्रेन चलाने की तैयारियां की गई थीं, लेकिन विभिन्न कारणों से यह परवान नहीं चढ़ सकी.

लेकिन, अब भारतीय रेल की सक्रियता से दिल्ली रिंग रेलवे सेवा के शुरू होने की उम्मीद जगी है. यह काम उत्तर रेलवे को दिया गया है.

फिलहाल दुनिया भर में केवल गिने-चुने भाप इंजन ही बचे हैं, जो अभी भी चालू हालत में हैं.

 

–आईएएनएस

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