इस गति से आदित्यनाथ अपने पूरे कार्यकाल में भी किसानों का कर्ज माफ़ नहीं कर सकेंगे

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आर. जयन/अजय सिंह चौहान

जब भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश के विधानसभा में जोर आजमा रही थी तो उसने एक तुरुप का पत्ता चला कि किसानों के सारे कर्ज माफ़ कर दिए जायेंगे. लेकिन सत्ता पाने के बाद आदित्यनाथ अपने उस वादे का जितना मजाक बनाया उतना किसी ने नहीं. अब खबर है कि एक साल होने को है और बुंदेलखंड में इस सरकार ने अब तक बमुश्किल 20 प्रतिशत किसानों का ही कर्ज माफ़ कर पायी है. बाकि के किसान अभी भी इंतज़ार की मुद्रा में हैं.

उत्तर प्रदेश के हिस्से वाले बुंदेलखंड में सभी उन्नीस विधानसभा सीटें जीतने वाली सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ‘कर्ज’ और ‘मर्ज’ के बोझ तले दबे बुंदेली किसानों की कितना हमदर्द है, इसकी बानगी उसकी ‘कर्जमाफी’ योजना में लाभान्वित किसानों से मिलती है. राज्य सरकार ने अपनी इस अति महत्वाकांक्षी योजना के तहत सिर्फ बीस फीसदी लघु एवं सीमांत किसानों का ही कर्ज माफ कर सकी है.

इसमें भी पाठकों को याद होगा कि कैसे इस सरकार ने कुछ किसानों के कर्ज का मज़ाक उड़ाया गया जब उन्हें कभी एक रुपये, दो रुपये, दस रुपये के कर्जमाफ़ी का कागज़ थमा दिया गया. बुंदेलखंड के किसानों के लिए तो यह सच में सदमें की बात थी.

पिछले साल के विधानसभा चुनाव में भाजपा के चुनावी झांसे में आकर बुंदेलखंड के 19 के 19 विधानसभा में लोगों इस इस पार्टी को जिताया और इस तरह यह पार्टी उत्तर प्रदेश में पूर्ण बहुमत से सरकार बनाने में सफल रही.

इसके बाद शुरू हुआ सरकार के इन किसानों के कर्ज का मज़ाक उडाना. अव्वल तो इन्होने आते ही कह दिया कि कर्जमाफी एक और चुनावी जुमला था और बस एक लाख रुपये तक के कर्ज ही माफ़ किये जायेंगे.

कर्जमाफी एक और चुनावी जुमला था और बस एक लाख रुपये तक के कर्ज ही माफ़ किये जायेंगे

इसके बाद मीडिया में खबर आनी शुरू हुई कि कैसे किसानों को एक रुपये तक के भी कर्जमाफी के कागज़ थमाए गए.

और अब खबर है कि बुंदेलखंड के सात जिलों- बांदा, चित्रकूट, महोबा, हमीरपुर, जालौन, झांसी और ललितपुर के लघु एवं सीमांत कृषक 20 फीसदी ही लाभान्वित हो पाए और अस्सी फीसदी कर्जदार किसान अब भी कर्जमाफी की उम्मीद लगाए बैठे हैं.

राज्य सरकार के आंकड़े बताते हैं कि 11 दिसंबर, 2017 तक लाभान्वित 20 फीसदी किसानों की कुल संख्या-2,39,453 है.

विधान परिषद में कृषिमंत्री सूर्य प्रताप शाही ने सदस्य नसीमुद्दीन सिद्दीन के तारांकित दो प्रश्नों के लिखित उत्तर में बताया कि ’11 दिसंबर 2017 तक बांदा के 38,990 लघु एवं सीमांत कृषकों का 2 अरब, 53 करोड़ 99 लाख रुपये, चित्रकूट के 19,756 किसानों का एक अरब, 15 करोड़, 95 लाख रुपये, हमीरपुर के 28,924 किसानों का एक अरब, 70 करोड़, 95 लाख रुपये, महोबा के 28,555 किसानों का एक अरब, 84 करोड़, 98 लाख रुपये, जालौन के 42,195 किसानों का दो अरब, 68 करोड़, 98 लाख, झांसी के 45,539 किानों का दो अरब, 59 करोड़, 10 लाख और ललितपुर के लघु एवं सीमांत किसानों का कर्ज माफ किया गया है.’

इससे स्पष्ट होता है कि इस क्षेत्र के करीबी अस्सी फीसदी किसान अब भी इस कर्जमाफी की योजना का लाभ नहीं उठा सके हैं.

प्रगतिशील किसान प्रेम सिंह बड़ोखर का कहना है, “तीन दशक से प्राकृतिक आपदा से जूझ रहे किसानों का राज्य सरकार कर्ज भले ही माफ न करे, लेकिन खाद, बीज और पानी मुफ्त कर दे तो शायद अन्नदाता उबर सकता है.’ इन्होंने कहा कि “चुनाव के दौरान यहां के किसानों को उम्मीद थी कि भाजपा की सरकार बनते ही सभी किसानों के सभी प्रकार के कर्ज माफ किए जाएंगे, इसी उम्मीद से किसानों ने भी 19 सीटें भाजपा की झोली में डालकर वफादारी दिखाई थी.”

बुजुर्ग किसान नेता और जिला पंचायत बांदा के पूर्व अध्यक्ष कृष्ण कुमार भारतीय राज्य सरकार के इस पैंतरे से बेहद खफा हैं. वे कहते हैं, “भाजपा किसानों का हमदर्द बनकर सत्ता में आई है और अब सिर्फ बीस फीसदी किसानों की कर्जमाफी कर अपनी घोषणा से मुकर गई. यह फरेब नहीं तो क्या है?”

उन्होंने कहा कि बुंदेली किसानों के ऊपर अरबों रुपये का जहां सरकारी कर्ज चढ़ा है, वहीं करोड़ों रुपये साहूकारों का कर्ज उनकी नींद हराम किए हुए है. इतना ही नहीं, किसान गंभीर ‘मर्ज’ के शिकार भी हो चुके हैं, फिर भी राज्य सरकार बेफिक्र है.

सनद रहे कि भाजपा के उत्तर प्रदेश के चुनावी वादे के बाद ही तमाम राज्यों से कर्जमाफी की बात उठने लगी और किसान सड़क पर उतरने लगे. कर्जमाफी की यह मांग मध्यप्रदेश होते हुए महाराष्ट्र, तमिलनाडु, गुजरात, हरियाणा, पंजाब में भी होने लगी और इसके लिए किसान लामबंद होने लगे.

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