लोकसभा चुनाव ख़त्म और नमो टीवी गायब

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सौतुक डेस्क/

लोकसभा चुनाव शुरू होने से ठीक पहले 26 मार्च को लॉन्च होने वाला  विवादित नमो टीवी चुनाव ख़त्म होते ही गायब हो गया.  इस चैनल के खिलाफ विपक्षी दलों ने निर्वाचन आयोग में शिकायत भी दर्ज कराई थी.

भाजपा के सूत्रों की मानें तो यह चैनल 17 मई को ही बंद कर दिया गया. इसी दिन लोकसभा चुनाव के आखिरी चरण के मतदान का प्रचार अभियान समाप्त हुआ था.

भाजपा के एक नेता ने मीडिया को बताया कि यह चैनल पार्टी के चुनाव प्रचार के लिए लाया गया था और चुनाव ख़त्म होने पर इस इसे हटा दिया गया क्योंकि अब इसकी जरुरत नहीं रही.

सनद रहे कि यह चैनल टाटा स्काई, वीडियोकॉन और डिश टीवी जैसे डीटीएच ऑपरेटरों द्वारा मुफ्त में प्रसारित किया जा रहा था और विपक्ष ने इसकी आलोचना की थी.  चुनाव के तारीखों की घोषणा के साथ ही इस चैनल का उदय हुआ और शुरूआती कुछ दिनों तक इसको लेकर काफी असमंजस की स्थिति बनी रही.

टाटास्काई ने शुरू में इस नमो टीवी को ‘हिंदी समाचार चैनल’ बताया था लेकिन बाद में जव विवाद बढ़ा तो इसे ‘विशेष सेवा’ देने वाला चैनल करार दिया. विपक्ष ने इसे आचारसंहिता का उल्लंघन करार दिया और आयोग के पास शिकायत भी दर्ज कराई पर इसके खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं हुई.

हाल ही में, दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने भाजपा को छठे चरण के मतदान से ठीक पहले मौन अवधि शुरू होने के बाद भी नमो टीवी पर चुनाव संबंधी सामग्री प्रसारित करने के लिए नोटिस भेजा था.

नमो टीवी और कई अन्य मामलों के लेकर निर्वाचन आयोग भी इस बार काफी विवाद में रहा है. आखिरी चरण के चुनाव के ‘मौन अवधी’ यानी 48 घंटे पहले से जब चुनाव प्रचार बंद हो जाता है, नरेन्द्र मोदी के केदारनाथ यात्रा को सारे चैनलों पर विस्तार से दिखाया गया. इसके खिलाफ भी कई राजनितिक दल जैसे तृणमूल कांग्रेस और तेलगुदेशम पार्टी ने निर्वाचन आयोग में शिकायत दर्ज कराई.

दूसरी तरफ निर्वाचन आयोग के स्पष्ट मना करने के बाद भी नरेन्द्र मोदी और अमित शाह ने लागातार चुनावी रैलियों में सेना, सर्जिकल स्ट्राइक जैसे मुद्दे को उछाला पर आयोग को इसमें किसी आचार संहिता का उल्लंघन नहीं लगा.

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