हाऊ टू बिकम अ टाइरेंट: तानाशाहों को समझने के लिए एक बेहतरीन गाइड बुक

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रजनीश जे जैन/

रजनीश जे जैन/

बहुचर्चित और बेहद लोकप्रिय टीवी शो ‘गेम ऑफ़ थ्रोन’ अधिकांश दर्शकों की स्मृतियों में स्थायी रूप से दर्ज हो चुका है। इसके अनगिनत किरदारों में एक पात्र ‘टीरियन लेनिसस्टर’ नाम के बौने का था जो सत्ता के राज दूसरे राजाओं को देकर हमेशा सत्ता में बना रहता था! इस पात्र को ‘एम्मी अवार्ड’ विजेता पीटर डिंकलेज ने निभाया था। पिछले हफ्ते पीटर डिंकलेज एक नई डॉक्यूमेंट्री ‘ हाऊ टू बिकम अ टायरेंट’ (तानाशाह कैसे बने) के सह निर्माता और नरेटर के रूप में नजर आए। नेटफ्लिक्स पर प्रसारित यह डॉक्यूमेंट्री तानाशाहों की किंवदंतियों और उनके सामान्य आदमी से क्रूर शासक बनने के सफर को दिलचस्प तरीके से प्रस्तुत करती है।

कालजयी फिल्म ‘क्लिओपेट्रा’ के निर्माण के दौरान नायिका एलिजाबेथ टेलर ने एक साक्षात्कार में स्वीकार किया था कि क्लिओपेट्रा की भूमिका निभाते हुए उनके अंदर भी  ‘दुनिया को अपनी उंगलियों पर नचाने’ के भाव आने लगे थे! अधिकांश देश के शासकों के अवचेतन में बस यही एक विचार जब घर कर जाता है तो वे उन रास्तों पर चलने लगते है जिसे एक गाइड बुक की तरह इस डॉक्यूमेंट्री में विस्तार से दर्शाया गया है।

‘हाऊ टू बिकम अ टायरेंट’ की शैली यूट्यूब पर बिखरे करोडो ‘ सेल्फ हेल्प’  वीडियो की तरह है जिनमें दर्शकों को कई बाते सीखने, सुधारने, बनाने के बारीक तरीके उपलब्ध कराये जाते है। यह सीरीज बीसवीं सदी के छः दुर्दांत और क्रूर तानाशाहों- एडोल्फ हिटलर, जोसफ स्टालिन, ईदी अमीन, मुआमार अल गद्दाफी, सद्दाम हुसैन और किम II संग के बारे में बात करती है। ये सभी अब परिचय के मोहताज नहीं है। थोड़ा बहुत पढ़ने का शोक रखने वाले पाठक इन लोगों के बारे में अच्छी जानकारी रखते है। श्वेत श्याम फिल्मों के फुटेज और उम्दा ‘एनिमेशन’ की मदद से इन तानशाहों में ‘समानता के लक्षण’ तलाशने का प्रयास किया गया है।

पीटर डिंकलेज अपनी प्रभावी आवाज में कभी तंज तो कभी तिरस्कार या कभी कटाक्ष करते हुए दर्शको को याद दिलाते रहते है कि तानशाह बनना ज्यादा मुश्किल काम नहीं है। इसके लिए बस कुछ सूत्रों का नियम से पालन करना जरुरी है। उल्लेखनीय तथ्य यह है कि लगभग सभी तानशाहों ने इन सूत्रों को मन लगाकर आत्मसात किया है। भावी तानशाहों को ज्यादा मेहनत न करना पड़े इसलिए इन सूत्रों को विस्तार से उदाहरण सहित दर्शाया गया है जैसे हर तानाशाह शुरुआत में सामान्य व्यक्ति होता है और अपने कई सहयोगियों की मदद से सत्ता के शीर्ष पर पहुँचता है। शीर्ष पर पहुँच कर सबसे पहले वह अपने उन सभी सहयोगियों को रास्ते से हटा देता है। उसका अगला काम अवाम को यह संदेश देना होता है कि अब उनकी जिंदगी बदलने वाली है। वह अपने आप को विशेष पोशाक में उतार लेता है और राष्ट्र का गौरव बनाए रखने के लिए नागरिकों से कुछ सुविधाओं का त्याग करने का आग्रह करता है। जब उसके कुछ टूल किट काम नहीं करते तो वह अकारण पडोसी देश पर आक्रमण कर देता है! वह अविश्वास से घिर जाता है और अपने ही नागरिकों की जासूसी कराने लगता है।  हर असफलता के लिए वह पूर्ववर्ती शासन को जिम्मेदार मानता है। सच वही होता है जो उसे सुहाता है। समाचार तंत्र पर उसकी पकड़ बेहद मजबूत होती है आलोचना करने वालों को यथोचित व्यवहार का सामना करना पड़ता है। देश के सभी संवैधानिक संस्थान उसकी जेब में रहते है- एक तरह से वही कानून होता है।

यह सीरीज दुनिया के हर नागरिक के लिए देखना इसलिए जरुरी है कि लोकतंत्र की जागरूकता के बावजूद अलग-अलग देशों के शासकों में तानाशाही के लक्षण दिखाई देने लगे है। सनद रहे कि एक अपवाद को छोड़कर (किम जोंग उन) उपरोक्त तानशाहों का पतन अवाम के जाग जाने की वजह से ही संभव हुआ है!

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(रजनीश जे जैन की शिक्षा दीक्षा जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय से हुई है। आजकल वे मध्य प्रदेश के शुजालपुर में रहते हैं और पत्र -पत्रिकाओं में विभिन्न मुद्दों पर अपनी महत्वपूर्ण और शोधपरक राय रखते रहते हैं।)

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