नेहरु के एडविना से संबंधों के सवाल पर हरिशंकर परसाई का जवाब

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सौतुक डेस्क/

हम उस ख़ास समय में जी रहे हैं जब गूगल पर हिंदी में नेहरु लिखने पर पहला विकल्प नेहरु प्लेस आता है तो दूसरा नेहरू का सच. गूगल अब हमारे समाज का आईना है और नेहरु के बारे में इसके इन विकल्पों से यह अनुमान लगाया जा सकता है कि नेहरु के बारे में लोग गूगल पर सबसे अधिक क्या टाइप कर रहे हैं. यह समय इसलिए भी ख़ास है कि हम देश की आज़ादी के साठ साल बाद देश के पहले प्रधानमंत्री के बारे में ऐसा कौन सा सच जानना चाहते हैं जो अब तक हमसे छिपा रहा है.आज के राजनितिक डिस्कोर्स में सोशल मीडिया पर भी पंडित जवाहरलाल नेहरु की बुराई आम बात है. मजेदार यह है कि इस आलोचना में उनकी राजनीति और नीतियों पर कम ही बात होती है. इतिहास को पलटकर देखने वाले इन लोगों के लिए नेहरु से जुड़े विवाद का मुख्य मुद्दा उनका निजी जीवन होता है. विशेषकर नेहरु का एडविना के साथ सम्बन्ध.

इसके बारे में हरिशंकर पारसाई ने एक बार अपनी बात रखी थी. देशबंधु अखबार में ‘पूछो परसाई से’ नाम से एक सेक्शन प्रकाशित हुआ करता था और इसमें परसाई अपने पाठकों के सवाल का जवाब दिया करते थे. बाद में यह सवाल-जवाब एक पुस्तक के शक्ल में भी आये. वहीं से परसाई का नेहरु और एडविना के संबंधों के बारे में जवाब आपके लिए प्रस्तुत है.

हरिशंकर परसाई

प्रश्न- क्या नेहरू-एडविना का प्रेम विश्व इतिहास में एक महान प्रेम प्रकरण था या चलते किस्म की चीज? (पोटियाकला से कु. शशि साव)

उत्तर-एडविना भारत के अन्तिम वाइसरॉय लॉर्ड लुई माउंट बेटन की पत्नी थी. लार्ड माउंट बेटन से पंडित नेहरू के पहले से अच्छे सम्बन्ध थे. कृष्णमेनन भी माउंट बेटन के दोस्त थे और आदत के मुताबिक साफ़ बात कहते थे. उन्होंने एक दिन दोपहर के भोजन करते-करते माउंट बेटन से कह दिया था- तुम मुस्लिम लीग का उपयोग भारत विभाजन के लिये कर रहे हो और भारत में रहने वाले करोड़ों मुसलमानों के साथ धोखा कर रहे हो.

बहरहाल, एडविना माउंट बेटन पंडित नेहरू की मित्र थीं. सहमति से अगर किसी स्त्री और पुरुष के शारीरिक संबंध भी हों तो मैं इसे बुरा नहीं मानता. प्रेम अत्यन्त पवित्र स्वाभाविक मानवीय भावना है. मगर यह सम्बन्ध ऐतिहासिक कैसे हो जायेगा? ऐतिहासिक परिवर्तन कैसे हो जायेगा? ऐतिहासिक परिवर्तन और प्रक्रिया में जवाहरलाल नेहरू की राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय भूमिका थी और महत्व था. पूंजीवादी और समाजवादी शक्तियों का संघर्ष अवश्यम्भावी है यह उन्होंने समझ लिया था. वे अमेरिकी साम्राज्यवाद के आगे के रोल की कल्पना कर चुके थे. इसीलिये उन्होंने ‘शान्तिपूर्ण सह-अस्तित्व’, ‘पंचशील’ और ‘गुट’, संलग्नता की नीतियां प्रतिपादित कीं. एडविना उस वाइसरॉय की पत्नी थीं जिसने ब्रिटिश संसद के फ़ैसले के अनुसार भारतीयों को सत्ता सौंपी और देश का विभाजन हुआ.

पंडित नेहरू अत्यन्त आकर्षक व्यक्ति थे. यह आकर्षण केवल सुन्दर चेहरे के कारण नहीं था. उनके कार्यों , बुद्धि की प्रखरता, साम्राज्यवाद विरोधी संघर्ष, कीर्ति और विश्व इतिहास में उनकी भूमिका के कारण भी था. यह समझना गलत है कि स्त्री केवल सुन्दर चेहरे पर मोहित होती है. स्त्री दूसरे कारणों से भी किसी पुरुष पर मोहित होती है. कुरूप पुरुषों पर भी स्त्रियां मोहित हैं. असंख्य स्त्रियों देश और दुनिया में थीं जो नेहरू पर मोहित थीं. इतिहास की सबसे महान और अहंकारी अभिनेत्री ग्रेटा गार्बों जवाहरलाल को देखने के लिये भीड़ में खड़ी होती थीं. इतना मोहक व्यक्तित्व था नेहरू का.

नेहरू भावुक थे, रूमानी भी थे. उनकी कई स्त्रियों से मित्रता थी- मृदुला साराभाई, राजकुमारी अमृत कौर, पूर्णिमा बेनर्जी, पद्मजा नायडू, आदि से उनकी मित्रता थी. वे छिपाते नहीं थे. एक बार संसद में उन्होंने कह दिया था- हां मृदुला सारा भाई कुछ साल मेरी मित्र थीं.

जब एडविना और नेहरू में मित्रता हुई तब एडविना की उम्र 45 साल थी और नेहरू की 54 साल. यह उम्र किशोरों जैसे प्रेम की नहीं होती. इन उम्र में विवेक और समझदारी से प्रणय सम्बन्ध होते हैं. कुछ लोगों का यह ख्याल गलत है एडविना ने नेहरू के विचारों को प्रभावित करके उनसे ब्रिटिश सरकार की बात मनवाई. नेहरू बहुत दृढ़ आदमी थे.

एडविना और नेहरू के सम्बन्धों के बारे में बहुत अफ़वाहें हैं और बहुत लिखा गया है. अब जब न नेहरू हैं, न लॉर्ड माउंट बेटन, न एडविना तब तो रिसर्च होकर और खुलकर किताबें लिखीं जा रहीं हैं. ताजा किताब एक अंग्रेज ने लिखी है जिसमें उसने कहा है कि एडविना शुरु से चंचल थीं. यहां तक लिखा है कि शादी के बाद दस साल तक ‘शी वाज गोइंग फ़्रॉम बेड टु बेड’. इस बिस्तर से उस बिस्तर तक जाती रहीं. एक लेखक ने लिखा है कि माउंट बेटन इस बात पर गर्व करते थे कि उनकी पत्नी पुरुषों को इस तरह मोहित करती हैं. महान नीग्रो गायक पाल राब्सन से भी एडविना के सम्बन्ध थे. जब एडविना और नेहरू में मित्रता हुई तब एडविना की उम्र 45 साल थी और नेहरू की 54 साल. यह उम्र किशोरों जैसे प्रेम की नहीं होती. इन उम्र में विवेक और समझदारी से प्रणय सम्बन्ध होते हैं. कुछ लोगों का यह ख्याल गलत है एडविना ने नेहरू के विचारों को प्रभावित करके उनसे ब्रिटिश सरकार की बात मनवाई. नेहरू बहुत दृढ़ आदमी थे. यह जरूर है कि एडविना के साहचर्य, उसकी भावुकता तथा सद्भावना से नेहरू प्रभावित थे. यह सम्बन्ध कहां तक था. कुछ लोग कहते हैं कि शरीर के स्तर पर भी सम्बन्ध था. हो तो हर्ज क्या है? जिस क्षोभ और मानसिक तनाव में देश विभाजन के दौर में नेहरू कार्य कर रहे थे, इस कोमल भावना से उन्हें राहत मिलती थी. एतिहासिक इसमें इतना ही है कि एतिहासिक परिस्थितियों ने एक साधारण स्त्री को एक इतिहास-पुरुष के संपर्क में ला दिया.

(देशबन्धु ,18 दिसम्बर, 1983)

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