50% कुपोषित बच्चों वाले राज्य में मुख्यमंत्री ने गौ-मंत्रालय बनाने की घोषणा की

0

शिखा कौशिक/

जिस राज्य में पचास प्रतिशत के करीब बच्चे कुपोषित हों और वहाँ का मुख्यमंत्री चौथी बार इस पद के लिए चुनाव मैदान में जा रहा हो, उससे क्या उम्मीद की जानी चाहिए. यही कि वह मुद्दे पर बात ना कर, अनर्गल वादे करेगा. जी हाँ. यहाँ मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की बात हो रही है जिन्होंने कल खजुराहो में बोलते हुए वादा किया कि राज्य में गौ-मंत्रालय की स्थापना की जाएगी.

मध्य प्रदेश में दो महीने बाद यानी दिसम्बर में चुनाव हैं और तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके शिवराज सिंह चौहान जनता के बीच हैं. अपने तीन कार्यकाल की उपलब्धियां दिखाने के लिए उनके पास कुछ भी नहीं है ऐसे में उन्होंने राज्य से वादा किया है कि प्रदेश में गौ-वंश सरंक्षण और संवर्धन के लिए गौ-मंत्रालय की स्थापना की जाएगी. उनके अगले वादे में यह भी शामिल है कि राज्य के विभिन्न जगहों पर गौ-अभ्यारण्य और गौ-शालाएं बनायी जायेंगी.

छतरपुर जिले के खजुराहो में आचार्य विद्यासागर जीव दया सम्मान समारोह में बोलते हुए चौहान ने कहा कि गौ-शाला और गौ-अभयारण्य में वृद्ध गायों के इलाज के लिये चिकित्सकों की पर्याप्त व्यवस्था करवाई जायेगी.

लेकिन चुनाव प्रचार में पूरी तरह सक्रिय मुख्यमंत्री के जुबान से अभी तक कुपोषित बच्चों को कैसे मदद पहुंचाई जाए इस बारे में कुछ भी सुनने को नहीं मिला है. यह वही राज्य है जहां श्योपुर नाम के एक जिले में दो साल पहले सौ से अधिक बच्चे कुपोषण की वजह से जान गँवा बैठे थे. हालत यह बन गई कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को स्वतः संज्ञान लेना पड़ा था.

करीब पंद्रह सालों में इस राज्य का विकास कुछ ऐसा रहा है कि मुख्यमंत्री विकास के मुद्दे पर वोट नहीं मांग सकते

करीब पंद्रह सालों में इस राज्य का विकास कुछ ऐसा रहा है कि मुख्यमंत्री विकास के मुद्दे पर वोट नहीं मांग सकते. जैसे 2005 से 2015 के बीच का आंकड़ा देखें: वर्ष 2005 में इस राज्य में करीब 50 प्रतिशत बच्चे स्टंटेड (stunted) या ठिगने थे. दस साल में बस यह आठ प्रतिशत पॉइंट घटकर 2015 में 42 प्रतिशत हो गया. साल 2005 में प्रति 1,000 बच्चों में 70 बच्चे मौत की गोद में सो जातेथे और दस साल बाद भी प्रति हज़ार 51 बच्चे मर ही रहे हैं. इसे शिशु मृत्यु दर कहते हैं. 2005 में राज्य की महज 14 फीसदी महिलाएं ही लागातार दस साल तक शिक्षा ग्रहण करती थीं. 2015 में 23 फीसदी महिलाओं को दस साल तक पढ़ने की मोहलत मिलती है. इसको आप विकास कहेंगे तो यह जान लीजिये कि पूरे देश में यह सबसे बुरी स्थिति में है.

राज्य के कुछ जिलों की स्थिति तो इतनी बुरी है कि इनकी तुलना अफ़्रीकी गरीब देशों से भी की जा सकती है. जैसे श्योपुर जहां सैकड़ों बच्चे कुपोषण की वजह से मर गए थे. वहाँ के 52 प्रतिशत बच्चेठिगने हैं और यह हैती के समकक्ष है. हैती लागातार प्राकृतिक आपदाएं झेलने के लिए जाना जाता है.

कुल मिलाकार यह कहना है कि अब शिवराज सिंह चौहान इन सब बातों को बता कर वोट माँगने तो जायेंगे नहीं. ऐसे में उनके पास बस अनर्गल मुद्दे ही हैं जिससे जनता का ध्यान सही मुद्दों सेभटकाया जा सके.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here