बड़े-बड़े वादे और अख़बारों में इश्तेहार से भ्रष्टाचार ख़त्म नहीं होता मोदी जी: अन्ना हजारे

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सौतुक डेस्क/

कभी देश में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर कई दिनों तक अनशन करने वाले अन्ना हजारे ने बुधवार को नरेन्द्र मोदी सरकार पर भी आरोप लगाया कि मोदी देश से भ्रष्टाचार ख़त्म नहीं करना चाहते. भ्रष्टाचार ख़त्म करने के नाम पर मोदी जो कर रहे हैं वह सब छलावा है.

सनद रहे कि वर्तमान सरकार अभी फ़्रांस के साथ राफेल लड़ाकू विमान से सम्बंधित समझौते के लिए घिरी हुई है. वर्तमान सरकार पर आरोप है कि इसने इसी लड़ाकू विमान को लेकर पुराने समझौते को निरस्त कर दिया और तीन गुना लागत पर उसी देश से उसी विमान के लिए समझौता कर लिया. जब संसद में उनसे सवाल पूछा गया कि आप इस समझौते का ब्यौरा संसद के पटल पर रखें तो रक्षा मंत्री ने ब्यौरा देने से मना कर दिया.

बुधवार को सतना जिले में किसानों को संबोधित करते हुए, सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बड़ा हमला बोला और कहा कि वह सिर्फ भ्रष्टाचार खत्म करने के वादे ही करते हैं, उनकी मंशा ही नहीं है भ्रष्टाचार खत्म करने की.

अन्ना ने यहां आयोजित किसान सभा में कहा, “मोदी सरकार ने सत्ता में आने के बाद जुलाई 2016 में महज तीन दिन में लोकपाल कानून बना दिया, लेकिन यह कानून लोकपाल को कमजोर करने वाला कानून है, वहीं भ्रष्टाचार के खिलाफ साढ़े तीन साल बाद भी कोई कानून नहीं बना पाए.”

“उनमें इच्छाशक्ति का अभाव है, चुनाव के दौरान जो वादे किए थे, उनमें से किसी पर भी अमल नहीं किया”

हजारे ने कहा, “भ्रष्टाचार मुक्त भारत के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, अखबारों में इश्तेहार दिए जाते हैं, मगर काम नहीं होता. वादों और विज्ञापनों से भ्रष्टाचार खत्म नहीं होगा. लोकपाल कानून से उस वादे को हटा ही दिया गया, जिससे भ्रष्टाचार कम हो सकता था. इसमें प्रावधान था कि अफसर हर साल मार्च में अपनी और परिवार की संपत्ति का ब्यौरा देंगे, मगर कमजोर कानून में ऐसा नहीं है. इसने अफसरों के लिए भ्रष्टाचार करने का रास्ता खोल दिया.”

अन्ना ने मोदी पर आरोप लगाया, “उनमें इच्छाशक्ति का अभाव है, चुनाव के दौरान जो वादे किए थे, उनमें से किसी पर भी अमल नहीं किया.”

पाठकों को मालूम रहे कि अन्ना हजारे उसी आन्दोलन का हिस्सा रहे हैं जिसके सभी बड़े नेता किसी न किसी राजनितिक दल का दामन थाम चुके हैं. अरविन्द केजरीवाल जहां खुद की पार्टी बनाकर दिल्ली के सत्ता में आ गए वहीँ किरण बेदी खुद भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गयीं.

उसी आन्दोलन के बाद नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाकर केंद्र की सत्ता में आयी थी और इसमें नरेन्द्र मोदी ने देश से भ्रष्टाचार ख़त्म करने के नाम पर बड़े-बड़े वादे किये थे. लेकिन धरातल पर वैसा कुछ होता नहीं दिखा. भ्रष्टाचार ख़त्म करने के नाम पर मोदी ने कुल जो किया वह है नोटबंदी, जिसमें आम आदमी अधिक परेशान हुआ बजाय कि कोई बड़ा भ्रष्ट आदमी. नोटबंदी के दौरान करीब सैकड़ो लोगों की जान चली गयी थी.

 

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