ग्रामीण शिक्षा का हाल-बेहाल: दसवीं तक के ज़्यादातर बच्चे अपनी भाषा नहीं पढ़ सकते

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साभार: इंडियास्पेंड डॉट कॉम

सौतुक डेस्क/

ये है ग्रामीण समाज के विकास की असली तस्वीर. एक तरफ मोबाईल का प्रचलन बढ़ रहा है और दूसरी तरफ बच्चे बड़ी संख्या में सामान्य जानकारी में भी फेल हो जा रहे हैं.

ग्रामीण क्षेत्र के शिक्षा की स्थिति एक बार और हुई उजागर. यहाँ 14 से 16 साल तक के उम्र का हर चौथा बच्चा अपनी भाषा भी आसानी से नहीं पढ़ सकता. यह सच मंगलवार को एक सर्वे से उजागर हुआ. यही रिपोर्ट यह भी बताती है कि 14 से 18 वर्ष तक के बच्चों में करीब 73 प्रतिशत मोबाईल फोन चलाते हैं.

इस रिपोर्ट के अनुसार इस उम्र के करीब 14 प्रतिशत बच्चे नक्शा दिखाने पर भारत को नहीं पहचान पाए. 36 प्रतिशत बच्चे देश की राजधानी का नाम नहीं बता पाए और 21 प्रतिशत बच्चे अपने राज्य का नाम नहीं बता पाए. इस उम्र के करीब 57 प्रतिशत बच्चे सामान्य गुणा-भाग भी नहीं कर पाए.

मंगलवार को जारी ‘वार्षिक शिक्षा सर्वेक्षण रिपोर्ट’ से ग्रामीण भारत की तस्वीर उजागर होती है. यह सर्वेक्षण 24 राज्यों के 28 जिलों में किया गया था. इस मौके पर भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविन्द सुब्रमनियन ने कहा कि यह परिदृश्य चौंकाने वाला है. इससे समझ बनती है कि आखिर जमीनी स्तर पर शिक्षा-दीक्षा का क्या हाल है. इस सर्वेक्षण में 40 प्रतिशत ऐसे बच्चे थे जिन्हें किस क्षेत्र में करियर बनाना है और वे किसके जैसा बनाना चाहते हैं उसपर उनकी कोई राय नहीं थी.

इस रिपोर्ट से पता चलता है कि 18 साल के बाद 32 प्रतिशत लड़कियां शिक्षा से दूर हो जाती हैं वहीँ लड़कों में लड़कों में इसका प्रतिशत 28 है

शिक्षा की यह स्थिति इस उम्र के लड़कों और लड़कियों में समान थी. चौदह से सोलह वर्ष तक के बच्चों के समूह में लड़के और लड़कियों के विद्यालयों में एनरोल होने का प्रतिशत लगभग बराबर था. पर 18 वर्ष तक आते-आते लड़कियों की विद्यालय में उपस्थिति कम होने लगती है. इस रिपोर्ट से पता चलता है कि 18 साल के बाद 32 प्रतिशत लड़कियां शिक्षा से दूर हो जाती हैं वहीँ लड़कों में लड़कों में इसका प्रतिशत 28 है.

इस सर्वेक्षण में और भी बहुत सारी गतिविधियों को शामिल किया गया था जैसे- पैसे की गिनती, वजन की जानकारी, और घडी देखना इत्यादि.

जैसे यह पूछा गया कि यह कितना पैसा है? एक चौथाई बच्चे इसको सही नहीं बता पाए. करीब 44 प्रतिशत बच्चे सही वजन नहीं पढ़ पाए जबकि यह सामान्य किलोग्राम में था. यद्यपि समय देखना दैनिक गतिविधियों में शामिल है पर करीब 40 प्रतिशत बच्चे सही सामान्य नहीं बता पाए.

इस रिपोर्ट से यह भी पता चलता है कि 14 से 18 वर्ष तक के कुल बच्चों में 86 प्रतिशत स्कूल में नामांकन करा चुके हैं और आधे से अधिक दसवीं से नीचे की पढाई में हैं. करीब 25 प्रतिशत बच्चे 11 या 12वीं कक्षा में थे. छः प्रतिशत बच्चे बीए या ऐसी अन्य पढाई में लगे थे. बस चौदह प्रतिशत बच्चे किसी भी तरह की शिक्षा व्यवस्था में नहीं जुड़े थे.

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