एक अभिवावक के रूप में कैसे जीत हासिल करें : एक अच्छे बनाने के 5 तरीके

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सौतुक डेस्क/

माता-पिता के रूप में, हम अपने बच्चों के पहले शिक्षक होते हैं। चूँकि हमारे पास उनकी भावनाओं को समझने की प्राकृतिक क्षमता है तो हम अपने बच्चों को उनके लक्ष्य तक पहुँचाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। हम वे हैं जो बच्चों के जीवन में मूल्यों को लेकर मार्गदर्शन देते हैं एवं उन्हें प्रेरित भी करते रहते हैं। माता-पिता की बच्चे के जीवन में भागीदारी उसके जीवन में बड़े स्तर पर प्रभाव डाल सकती है, उचित प्रयासों के द्वारा बच्चे को एक उत्साही एवं भावुक शिक्षार्थी बनाया जा सकता है।

 बच्चों को एक आत्मनिर्भर शिक्षार्थी बनने का अवसर ज़रूर दिया जाना चाहिए, क्योंकि उत्सुकता उनकी प्रकृति में होती है। हमें उनकी उत्सुकता बनाये रखने और उसे विकसित करने और सीखने में मदद करनी चाहिए। नीचे कुछ सुझाव दिए गए हैं जिनके माध्यम से आप अपने बच्चे के शैक्षणिक, सामाजिक और संज्ञानात्मक स्तर पर न सिर्फ एक बड़ा प्रभाव डाल सकते बल्कि व्यक्तित्व भी निखार सकते हैं.

अपने बच्चों के दोस्त बनें

अपने बच्चों की उपलब्धियों पर ध्यान दें और उनकी कमियों को नज़अंदाज़ करें। आप अपने बच्चे के सबसे अच्छे दोस्त, प्रेरक और गाइड बन सकते हैं। यदि आप उनपर विश्वास करेंगें तभी आत्मविश्वासी बनने का प्रयास करेंगे। इस विषय पर हुए अध्ययन बताते हैं कि यदि हम हम अपने बच्चों  पर दबाव बनाने की बजाय सीखने के लिए प्रोत्साहित करते हैं तो परिणाम न सिर्फ सकारात्मक होते हैं बल्कि बच्चे की सफलता में भी योगदान करते हैं।

सीखने की प्रक्रिया को अधिक व्यवहारिक बनायें

अगर बच्चे असल जीवन से तथ्यों को जोड़ सकें तो वो चीज़ों को सबसे बेहतर समझ सकते हैं। किसी भी चीज़ की व्याख्या करने के लिए उदहारणों के पर्याप्त मात्रा में उपयोग करने से बच्चों को जीवन की अवधारणाओं को समझने में बहुत मदद मिलेगी। हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बच्चे आसानी से सैद्धांतिक अवधारणाओं और वास्तविक दुनिया के बीच सम्बन्ध स्थापित कर सकें। इससे उनकी सोचने समझने की क्षमता बढ़ जाती है।

बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाना

हमें अपने बच्चों में यह आत्मविश्वास जगाना होगा ‘हम कर सकते हैं’ के रवैये को हमें बढावा देना चाहिए। हमें थोड़ा धैर्य रखना चाहिए ताकि बच्चे खुद से सीख सकें. आप बच्चे पर नज़र रखें कि उसका कोई नुकसान न हो, अगर वो कोई काम ना कर पा रहा हो तो हमें इसे पूरा करने में उसकी मदद करनी चाहिए. लेकिन तब,जब वो अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर चुका हो। हमें बस बच्चों को आश्वश्त करने की ज़रुरत है  कि कुछ भी सीखना मुश्किल नहीं है।

गलतियों को अच्छे स्पिरिट में लें

अगर आपका बच्चा गलती करता है तो उसे यह न समझाएं कि सही तरीका क्या है बल्कि समझाने की कोशिश करें कि उस गलती को ठीक कैसे किया जा सकता है। इससे उन्हें अपनी कमियों को ताकत में बदलने में मदद मिलती है। उन्हें प्रोत्साहित करने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि उनसे अपनी कहानियां साझा की जाएँ जिससे वे गलतियों के बारे में सीख सकें और उन्हें सुधार सकें।

प्रेरणा ही कुंजी है

ज़रा सा प्रोत्साहन बच्चे को एक लम्बा सफ़र तय करा सकता है। यह बच्चे में सीखने की प्रवृति और आत्मविश्वास बढ़ाने में बहुत मददगार साबित हो सकता है। शैक्षणिक और सामाजिक दोनों क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरणा ही सबसे बड़ी कुंजी है।

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