गोंडी भाषा का पहला शब्दकोश अब जाकर हुआ तैयार

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सौतुक डेस्क/

गोंड आदिवासियों या यूं कहें कि आदिवासियों के बड़े हिस्से में गोंडी भाषा का उपयोग होता है। हिंदी भाषियों के लिए उसे समझना आसान नहीं होता। मगर आने वाले समय में यह समस्या आसान हो जाएगी, क्योंकि हिंदी-गोंडी का शब्दकोश तैयार हो चुका है। इस शब्दकोश में आठ लाख हिंदी शब्दों को संग्रहीत किया गया है। इसे गोंडी भाषा का पहला शब्दकोश माना जा रहा है। इस शब्दकोश को लोकांचल समूह द्वारा तैयार किया गया है। भारत भारती के सचिव मोहन नागर ने बताया, “अभी हम हिंदी का गोंडी में अनुवाद करते हैं। भारत भारती के जनजाति छात्रावास में पढ़ने वाले विद्यार्थी और एकल विद्यालय के हमारे कार्यकर्ताओं द्वारा हिंदी आलेखों, गतिविधियों और समाचारों का गोंडी भाषा में अनुवाद करते हैं। समय के साथ आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों की मदद से हिंदी के लगभग आठ लाख से ज्यादा शब्दों को सूचीबद्ध करने के बाद यह सॉफ्टवेयर तैयार किया गया है।”

उन्होंने कहा, “पुणे के सॉफ्टवेयर इंजीनियर मनोज दोहरे की मदद से तैयार किए गए इस सॉफ्टवेयर के जरिए हिंदी शब्द लिखने पर वह गोंडी भाषा के शब्दों में तब्दील हो जाते हैं। यह पहली बार किया गया है। अभी तक इस विषय में किसी ने सोचा भी नहीं था, लेकिन अब यह साकार हुआ है।”

नागर ने कहा कि गोंडी भाषा बैतूल जिले के अधिकांश क्षेत्रों में बोली जाती है। इसके अलावा गोंडी भाषा मध्यप्रदेश के खंडवा जिले से लेकर आंध्रप्रदेश के मेंडक तक प्रचलन में है। यह इतनी व्यापक भाषा है कि इसमें अनेक प्रकार की कहावतें और पहेलियां विद्यमान हैं, इस भाषा का शब्दकोश आ जाने से इस भाषा का निश्चित रूप से संवर्धन और संरक्षण होगा।

इतनी व्यापक भाषा है कि इसमें अनेक प्रकार की कहावतें और पहेलियां विद्यमान हैं, इस भाषा का शब्दकोश आ जाने से इस भाषा का निश्चित रूप से संवर्धन और संरक्षण होगा

हिंदी के गोंडी अर्थ वाले शब्दों के संग्रह का विमोचन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संघचालक मोहनराव भागवत ने बैतूल प्रवास के दौरान किया। भागवत यहां भारत भारती के तीन दिवसीय ग्राम विकास कार्यकर्ताओं के कार्यक्रम में हिस्सा लेने आए थे। वे यहां दो से चार फरवरी तक रहे।

इस हिंदी-गोंडी शब्दकोश को तैयार करने में जनजाति शिक्षा के प्रांत प्रमुख बुधपाल सिंह ठाकुर, जिला प्रमुख नागोराव सिरसाम, जिला प्रमुख राजेश वर्गीय और लोकांचल समूह के संपादक मयंक भार्गव की अहम भूमिका रही।

मयंक भार्गव ने बताया कि लगभग छह माह की कड़ी मेहनत के बाद यह शब्दकोश तैयार किया गया है। जो गोंडी भाषा के संरक्षण, प्रचार और प्रसार के लिए निश्चिय ही उपयोगी होते हुए मील का पत्थर साबित होगा। इस हिंदी-गोंडी शब्दकोश में आगे भी निरंतर नए नए शब्दों के समावेश का सिलसिला जारी रहेगा और भविष्य में यह शब्दकोश और भी वृहद रूप धारण कर समाज के लिए बहुउपयोगी और गोंडी भाषा के स्थायी संरक्षण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

 

–आईएएनएस

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