क्या भारतीय महिला क्रिकेट टीम रच पाएगी इतिहास?

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लारेन विनफिल्ड का विकेट लेने के बाद राजेश्वरी गायकवाड जश्न मनाते हुए
सौतुक डेस्क/
भारत की महिला क्रिकेट टीम ने पहली बार वर्ष 1978 में होने वाले क्रिकेट विश्वकप में भाग लिया था. तब से अब तक यह टीम कोई भी विश्वकप नहीं जीत पायी है, लेकिन मिताली राज की अगुवाई में भारत की यह महिला क्रिकेट टीम रविवार को अंग्रेजों के साथ 2017 विश्वकप का फाइनल खेल रही है. देखना यह है  कि इस बार भरतीय टीम यह इतिहास रच पाती है या नहीं. .
श्रृंखला में भारत ने अब तक के विश्व-विजेता ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैण्ड को हराकर साबित कर दिया है कि ये इस विश्वकप के प्रबल दावेदार है.
इससे पहले वर्ष 2005 में दक्षिण अफ्रीका में खेले गए विश्वकप में भारत पहलीबार फाइनल में पहुँचने में कामयाब हुआ था. पर एकतरफा मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया ने वह विश्वकप जीत लिया था. उस श्रृंखला में नीतू डेविड ने कुल 20 विकेट लिए थे.
भारत उन देशो में है जिन्होंने 1973 का पहला विश्वकप नहीं खेला था. महिला क्रिकेट का पहला विश्वकप पुरुष क्रिकेट विश्वकप के शुरू होने के दो साल पहले, वर्ष 1973 में खेला गया था. इस विश्वकप में  इंग्लैण्ड, ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड, त्रिनिदाद, टोबैगो और जमैका की टीमों ने भाग लिया था. और कप घरेलु टीम इंग्लैण्ड ने जीता था.
पहले विश्वकप के पांच साल बाद वर्ष 1978 में दूसरा विश्वकप खेला गया. इसमे सिर्फ चार टीमों ने भाग लिया था. ये टीमें थी इंग्लैण्ड, ऑस्ट्रेलिया, भारत और न्यूज़ीलैंड. होलैंड और वेस्टइंडीज ने आखिरी मौके पर आर्थिक वजहों से भाग नहीं लिया था. इस विश्वकप को ऑस्ट्रेलिया ने जीता.
उसके बाद से यह विश्वकप लगभग प्रत्येक चार साल पर होता आया है जिसमें ऑस्ट्रेलिया ने अपना दबदबा कायम रखा है. अब तक कुल दस विश्वकप प्रतियोगिताओं में से छः सिर्फ इस देश ने जीते हैं. वहीं तीन विश्वकप जीतकर इंग्लैंड दूसरे पायदान पर है. अन्य टीमों में से न्यूज़ीलैंड ने एक बार यह कप जीता है.
इस टूर्नामेंट का आयोजन पहले दो बार भारत में भी हो चुका है. वर्ष 1997 और 2013 में हुए दोनों विश्वकप प्रतियोगिताओं में ऑस्ट्रेलिया विश्वविजेता बना.

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