नए ज़माने की गुलामी को समझने के सूत्र

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जितेन्द्र राजाराम/

अमेरिका की चार कंपनियों की कुल संपत्ति भारत देश की कुल संपत्ति से ज्यादा है. बल्कि वहां की एक कंपनी ‘एप्पल’ दुनिया के 177 देशों से ज्यादा धनी है. चीन की 20 कंपनियों की दौलत भारत के कुल दौलत से ज्यादा है. अकेले एक बैंक जो चीन का प्रमुख बैंक है, उसकी दौलत भारत की कुल जीडीपी से दुगनी है.

यह इसलिए बताया जा रहा है ताकि यह समझ में आ सके कि पूँजी का खेल कैसे चल रहा है और इसके मुख्य खिलाड़ी कौन हैं. उनके पास कैसे मोहरे हैं.

तेल और डाटा के बाजार में काम करने वाली सभी चीनी कम्पनियाँ विश्व के लगभग 100 देशों की कुल संपत्ति से अधिक कमाती हैं. भारत में तेल और डाटा दोनों का व्यापार करने वाली एक मात्र कंपनी, देश की बांकी सभी कंपनियों से ज्यादा पैसा कमाती है.

इस अगस्त में आजादी का लुत्फ़ और डबल हो जायेगा जब देश की सबसे बड़ी तेल बेचने वाली कंपनी आपकी झोली में इतना डाटा भर देगी की आपकी आँखें फटी रह जाएँगी. हर महीने सबको मिलेगा 1000 GB डाटा.

अब तक स्पष्ट हो गया होगा कि इस खेल के प्रमुख मोहरे कौन से हैं?–

तेल, डाटा, मीडिया और पूँजी ये चार उद्योग ही पूरी दुनिया को नियंत्रित करती हैं. इसमें से तेल और डाटा के मालिक अमेरिका में हैं, मीडिया के आका ब्रिटेन मूल के हैं लेकिन हैं अमेरिकी. पूँजी किसके पास है यह ऊपर बता ही दिया गया है.

इनका महत्व इतना है कि अगर किसी देश को इन चार उद्योगों में से किसी एक उद्योग के लिए भी अन्य देशों पर पूरी तरह निर्भर होना पड़ता है तो उस देश की राजनैतिक स्वायत्ता हमेशा विदेशी नीतियों के अधीन रहती है. जैसे कि भारत को ईरान से तेल आयात करना है या नहीं इस बात पर अमेरिका भारत पर दबाव बना पाने में सफल हो पा रहा है.

भारत का सबसे प्रसिद्द डिजिटल पेमेंट गेटवे पेटीएम और ऑनलाइन बाजार फ्लिपकार्ट में एक चीनी कंपनी अलीबाबा और जापानी कंपनी सॉफ्टबैंक का ही निवेश है

यही हाल मीडिया और डाटा में भी है, भारत के डाटा उद्योग का हार्डवेयर यानी कि फाइबर केबल बिज़नस आईबीएम के निवेश पर निर्भर करता है. डाटासेंटर में ज्यादातर निवेश माइक्रोसॉफ्ट और आईटी नेटवर्क, सेफ्टी और सिक्यूरिटी भी लगभग अमेरिकी कम्पनियाँ ही देखती हैं. भारत का मीडिया जगत भी पूरी तरह से ब्रिटेन की स्काई टीवी, अमेरिका की विया.कॉम.18 और सीएनएन नाम की कंपनी का ही निवेश है.

पूँजी के लिए भी भारत पूरी तरह से चीन, अमेरिका, जापान, रूस और फ़्रांस पर निर्भर करता है. भारत का सबसे प्रसिद्द डिजिटल पेमेंट गेटवे पेटीएम और ऑनलाइन बाजार फ्लिपकार्ट में एक चीनी कंपनी अलीबाबा और जापानी कंपनी सॉफ्टबैंक का ही निवेश है. फ्लिपकार्ट नाम का भारत का सबसे सफल स्टार्टअप भी अब विदेशी हो गया है. इससे पूँजी की ताकत समझी जा सकती है.

जाहिर है, एक देश जो पूँजी, प्रसारण, डाटा और तेल के लिए विदेशी ताकतों पर निर्भर होगा वो पडोसी देश से दो के बदले दस सर लाने की घोषणा सिर्फ भाषा में ही कर सकता है.  डोकलाम और सिक्किम जैसी गंभीर समस्याओं ले सन्दर्भ में तो शायद ही कोई तटस्थ बात कही जा सकती है. और 56 इंच के सीने का दावा कर सत्ता में आने वाले लोग इसे हरदम छिपाएंगे.

अंत में यह बताना जरुरी है की, भारत में एक कंपनी है जो तेल, डाटा, प्रसारण और पूँजी चारों उद्योगों में स्वघोषित सम्राट बन चुकी है और अब वो कंपनी हथियारों के उद्योग में भी अपना हाथ आजमाने का मन बना चुकी है. उद्योगपतियों के साथ खड़े होने पर शर्म नहीं आती  जैसा वाक्य कहने वाली सरकार इस कंपनी की चारों तरफ से मदद कर रही है. अगर आप Oil को आईने में पढेंगे तो कुछ हद तक यह Jio जैसा ही दिखेगा. जो अंतर दिखेगा वह बस पर्देदारी के लिए है ताकि आपको सारा खेल समझ में न आ जाए.

(जितेन्द्र राजाराम  आजकल भोपाल में रहते हैं और सामाजिक राजनितिक बहस में खासा दिलचस्पी रखते हैं. इन विषयों को समझने -समझाने के लिए वे इतिहास और आंकड़ो  को अपना हथियार बनाते हैं. आप उनसे उनके नम्बर 9009036633 पर संपर्क कर सकते हैं.)

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