तंगदिल समय में दुनिया के एक बहुत छोटे देश में है सबसे बड़ा शरणार्थी शिविर

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सौतुक डेस्क/

एक तरफ रोहिंग्या लोग म्यांमार में हो रही ज्यादतियों की वजह से दर-दर भटकने को मजबूर हैं. पीढ़ियों से वहाँ रहने के बावजूद म्यांमार ने इनको नागरिक मानने से इनकार कर दिया है. दसियों लाख की संख्या में यह समुदाय समय के थपेड़े झेल रहा है और  बतौर शरणार्थी, एक देश या दूसरे देश में आश्रय ढूंढ रहा है. इस समाज के प्रति पड़ोसी देश का भी व्यवहार बहुत उम्दा नहीं रहा है. भारत इन्हें बाहर खदेड़ना चाहता है पर न्यायलय के हस्तक्षेप से मामला रुका हुआ है. ऐसे मौके पर यह जानना सुखद है कि पूर्वी अफ्रीका का युगांडा एक छोटे भूगोल पर बड़े दिल वाला देश वर्तमान में दुनिया का सबसे बड़ा शरणार्थी  शिविर समेटे हुए है.

वर्तमान में इस देश का बीडी बीडी शरणार्थी शिविर दुनिया का सबसे बड़ा शिविर हैं जहां 13 लाख लोगों ने शरण ले रखी है.  यहाँ आने वाले लोगों की संख्या इस हद तक बढ़ चुकी है कि पिछले साल दिसंबर में इस शिविर को और लोगों के लिए बंद करना पड़ा. तबसे इस देश में हर दो महीने पर एक नया शिविर तैयार हो रहा है.

[spacer height="20px"]इतनी संख्या में लोगों का इस देश में शरण के लिए आना बिना वजह नहीं है. दूसरे देशों से बेघर हुए शरणार्थियों के लिए इस देश के पास बेहतरीन नीतियाँ हैं. शायद दुनिया के किसी भी देश से बेहतर. इसके अंतर्गत यह देश आये शरणार्थियों को न केवल घर, बल्कि जमीन भी देता है जिस पर खेती-बारी कर ये लोग अपना गुज़ारा कर सकें. इतना ही नहीं, यह देश शरणार्थियों को अपने सामान्य नागरिकों की तरह नौकरी करने, पैसा कमाने का अधिकार भी देता है.

जैसे कि होता है अच्छे से और अच्छे की उम्मीद की जाती है. इस देश की नीतियों की वजह से शरणार्थियों का यहाँ आना रुक ही नहीं रहा है. जैसे  इस देश के एक सरकारी अधिकारी सोलोमन ओसका ने अंग्रेजी अखबार दी गार्डियन  से बात करते हुए एक बार कहा था कि इतनी बड़ी संख्या में लोग आ रहे हैं कि उनको पंजीकृत करने वालों की गति कम पड़ जा रही है. इनमें अधिकतर लोग सूडान से आने वाले हैं. सूडान के बारे में कहा जाता है कि दिसंबर 2013 से इस देश के करीब 35 लाख नागरिक देश छोड़ कर अन्य देशों में शरण ले चुके हैं. यह देश चार साल तक लागातार गृह युद्ध झेल चुका है जिसकी शुरुआत दिसम्बर 2013 में हुई थी.

इतनी बड़ी संख्या में लोग आ रहे हैं कि उनको पंजीकृत करने वालों की गति कम पड़ जा रही है. इनमें से अधिकतर लोग सूडान से आने वाले हैं.

बहरहाल, हम यहाँ युगांडा के उस शरणार्थी शिविर की बात कर रहे थे जो दुनिया में सबसे बड़ा है. यह वर्तमान में युगांडा के सारे शहरों से बड़ा हो गया है. वहाँ की सरकार के अनुमान के अनुसार अगले दस सालों में इस शिविर की जनसँख्या दो गुनी हो जानी है.

इस शिविर में जहाँ-तहाँ बाज़ार का विकास हो गया है. यही नहीं इस शिविर के इर्द-गिर्द बसे ग्रामीण इलाके के लोगों के लिए यह वरदान साबित हो रहा है. उनको कभी अनुमान नहीं था कि उनके गाँव के पास एक इतना बड़ा शहर जैसा कुछ बस जाएगा.

इन ग्रामीणों के लिए ख़ास बात यह है कि इस शिविर में काम करने वाले सारे समूह अपने कुल विदेशी फण्ड का 30 प्रतिशत युगांडा के लोगों पर खर्च करते हैं. इन स्थानीय लोगों के लिए इन गतिविधियों का एक और फायदा है कि बाहरी लोगों के लिए बने विद्यालय और अस्पताल का वे भी लाभ उठा पा रहे हैं.  इनके लिए तमाम रोजगार के अवसर भी उपलब्ध हो जा रहे हैं.

अलबत्ता हाल-फिलहाल कुछ चिंताएं जरुर इस पूरे भलमानसहत को घेर रही हैं. सयुंक्त राष्ट्र ने सूडान से आये शरणार्थियों को लिए जितने पैसे की अपेक्षा की थी, उसका महज़ 29 प्रतिशत ही उपलब्ध हो पाया है. स्थानीय लोगों ने भी अब शिकायत करना शुरू कर दिया है कि उतनी नौकरियाँ नहीं उपलब्ध हो पाईं जितने की अपेक्षा थी.

देखना यह है कि इस संकीर्ण दौर में युगांडा कब तक अपने इस भले दिल वाली उपलब्धि बनाए रख सकता है.

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