फ़िल्म ‘काला करिकालन’ क्यों देखें ?

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शशिभूषण/

  1. दिल में अमिट छाप छोड़ने वाली अधूरी किंतु पूर्ण प्रेम कहानी साथ साथ उदात्त दाम्पत्य प्रेम कथा। जिसमें भावी श्रेष्ठ राजनीतिक सोच एवं विजन भी शामिल हैं।
  2. परिवार, रिश्तों, समाज और मनुष्यों के बीच सहकार, संगठन एवं संघर्ष के साथ उद्देश्यपूर्ण जीवन जीने की अनूठी दास्तान। जनमानस को आंदोलित करने वाली कई कई रैलियों से अधिक प्रभावी फ़िल्म।
  3. आई एम बोर्न टू रूल, ज़मीन मेरा पावर है उसे लेकर रहूँगा के सवर्ण उदघोष का संगठित दलित जवाब ज़मीन हमारी ज़िंदगी है, तुम्हे एक मुट्ठी मिट्टी तक नहीं ले जाने देंगे।
  4. एनजीओ आधारित विकास यानी ग़रीबों की ज़मीन हथियाने की राजनीतिक आपराधिक व्यापारिक सांठ गांठ को तोड़ देने वाली संघर्षशील कहानी।
  5. क्लीन इंडिया और प्योर इंडिया के पीछे छुपे आपराधिक जातिवाद एवं साम्प्रदायिकता को परत दर परत उघाड़ती कहानी। मौजूदा परिवेश की बहुआयामी विसंगतियों-विद्रूपों-दुरभिसंधियों को रेखांकित करती फ़िल्म।
  6. बुद्ध, भीम और लेनिन की एकजुटता से निकली विजय की दास्तान। जाति आधारित रंगभेद की जड़ों में मट्ठा डालने वाली संघर्ष गाथा।
  7. जात-पांत और हिंदू मुसलमान करके मनुष्यो के बीच दरार पैदा करने, उन्हें आपस में एक दूसरे की हत्या तक के लिए उकसाने एवं अंत में वोट, ज़मीन और सत्ता हथियाने की साज़िशों को बेनक़ाब करती फ़िल्म।
  8. एक सिर वाले रावणों के अत्याचार से ग़रीब, कमज़ोर, स्त्रियों, बच्चों को बचाने वाले कई सिर वाले भले रावण की कहानी। नया दशहरा।
  9. रामकथा के बहाने पॉवर बनाने में गीता के महान उद्देश्यों को बलि देनेवाले अत्याचारियों की कहानी।
  10. शिक्षा को हर हाल में अपनाने, नशा छोड़ने, संगठित रहने, ज़मीन से हर हाल में जुड़े रहने वालों की फ़िल्म।
  11. मीडिया, और पुलिस के आपराधिक कारनामों के दौर में अपना मीडिया यानी सोशल मीडिया के महत्व की कहानी।
  12. रोने गिड़गिड़ाने की बजाय, लड़ने और ताक़त से जीने का संदेश देने वाली फ़िल्म। संघर्ष आधारित आशावाद की पिक्चर।
  13. रजनीकांत, नाना पाटेकर, हुमा क़ुरैशी, पंकज त्रिपाठी आदि के बेमिशाल अभिनय एवं धारदार, रगो में जोश भरने वाले संवादों, गानों की कहानी।
  14. भारत की एकता, बहुलता एवं श्रम संस्कृति तथा अपनी छत बचाने के सपने की कहानी। नयी राजनीति का शंखनाद जैसी फ़िल्म।
  15. भारत के केवल किसी एक महानगर में फैले स्लम की ही नहीं हर शहर, कस्बे, गांव में विन्यस्त वंचितों के आत्म गौरव, एवं संगठित हो संघर्ष करने की कहानी।
  16. ‘दुनिया के मजदूरों एक हो’ और ‘शिक्षित बनो, संगठित हो, संघर्ष करो’ के उदघोषकों की मंशा को प्रतिबिंबित करती फ़िल्म।

यदि आप फ़िल्म देखने के बाद उपर्युक्त बातों के अलावा भी कोई ख़ूबी अनुभव करते हैं तो यह फ़िल्म की ही अच्छाई होगी। मैंने तो केवल संकेत किये हैं और एक ही नज़र से फ़िल्म की सब अच्छी बातों को आपके सामने रख देने की कोशिश की है।

देखकर आइये और बेहिचक मुझे सही या ग़लत साबित कीजिये।

(‘फटा पैंट और एक दिन का प्रेम’ फेम शशिभूषण बेहतरीन कथाकार हैं। विराट जीवन की संभावनाओं के बीच एक किसी नुक्ते पर फँसा मनुष्य इनकी कहानियों में गरिमापूर्ण ढंग से वर्णित होता है। ये दूरदर्शी आलोचक हैं। सोशल मीडिया को जो कुछ लोग अपनी सामयिक और तीक्ष्ण टिपण्णी(यों) से मौजूँ बनाये रखते हैं, शशिभूषण उनमें से एक हैं। केंद्रीय विद्यालय, शाजापुर में बतौर स्नातकोत्तर शिक्षक कार्यरत शशिभूषण अपने स्वभाव से ही शिक्षक हैं। )

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