सच्ची कहानी पर बनी इस फिल्म को रिलीज़ होने में लग गए 12 साल

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शिखा कौशिक/

पाकिस्तान की सच्ची घटना पर आधारित, बोस्निया के निर्देशक डेनिस टनोविक की फिल्म करीब 12साल बाद जाकर रिलीज़ हो पायी है.  ‘नो मैन्स लैंड’ जैसी अदभुत फिल्म बना चुके इस निर्देशक के लगभग 12 वर्षों के प्रयास के बाद अब यह फिल्म रिलीज़ हो पायी है. इस फिल्म का भारत से एक ख़ास नाता इसलिए भी है क्योंकि जैसे इसमें कुछ भारतीय कलाकारों ने भी काम किया है. इनमें इमरान हाशमी से लेकर आदिल हुसैन, गीतांजलि थापा, सत्यदीप मिश्रा जैसे नाम हैं.

फ़िल्म ‘टाइगर्स’ पाकिस्तानी सेल्समैन सईद आमिर रज़ा हुसैन के जीवन पर आधारित है. हुसैन बहुराष्ट्रीय कंपनी नेस्ले में काम करते थे. इन्होंने सन् 1997 में नौकरी छोड़ दी. नौकरी के दो साल बाद यानि 1999 में  इन्होंने एक स्वयंसेवी संस्था के साथ मिलकर एक रिपोर्ट प्रकाशित किया . इस रिपोर्ट में हुसैन ने बताया कि नेस्ले बच्चों के लिए बनाए जाने वाले फार्मूला दूध (जिसे हिंदी में पाउडर दूध के नाम से अधिक जाना जाता है) को बेचने के लिए क्या हथकंडे अपना रही है. कैसे डॉक्टरों को इस्तेमाल कर कंपनी इन नन्हे जीवों को यह दूध पीने को मजबूर कर रही है. यह मालूम होना चाहिए कि विश्व स्वास्थ्य संगठन भी यह मान चुका है कि नवजात के लिए माँ का दूध ही सर्वोत्तम होता है. जाहिर है नेस्ले ने रज़ा के इस आरोप को खारिज किया था.

फ़िल्म ‘टाइगर्स ‘ पाकिस्तानी सेल्समैन सईद आमिर रज़ा हुसैन के जीवन पर आधारित है

जब निर्देशक ने इस कहानी को बड़े परदे पर लाने का निर्णय लिया, ब्रिटिश ब्राडकास्टिंग कारपोरेशन (बीबीसी) ने अपना समर्थन दिया और पैसा लगाने की बात की. लेकिन बाद में बीबीसी ने यह कहते हुए इस प्रोजेक्ट से दूरी बना ली कि बाद में अगर कोई कानूनी लड़ाई शुरू होती है तो बेवजह काफी नुकसान होगा.

फिर ‘टाइगर्स’ फिल्म को आर्थिक मदद के लिए आगे आये प्राशिता चौधरी, क्षितिज चौधरी, गुनीत मोंगा और अनुराग कश्यप. यह फिल्म 2014 में टोरंटो फिल्म फेस्टिवल में प्रदर्शित की गई. इसके बाद भी इस फिल्म को रिलीज़ होने में चार साल लग गए.

अब ख़बर है कि इस फिल्म का अधिकार जी 5 ने खरीद लिया और यह फिल्म 21 नवम्बर को सिनेमाघरों में रिलीज़ की गई है.

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