कलाकारों के किसम किसम के फैन

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रजनीश जे जैन/

रजनीश जे जैन

अपने चहेते कलाकार के लिए प्रशंसकों का जुनून अक्सर अकल्पनीय सीमाएं पार कर जाता है। वे उनकी एक झलक मात्र के लिए कुछ भी कर गुजरने से गुरेज नहीं करते। ये प्रशंसक अपने पसंदीदा सितारे का जन्म दिन धूमधाम से मनाते है और अगर वह सितारा इस दुनिया से अलविदा कह चूका है तो उसके मरण दिवस पर भी आयोजन करने से नहीं रुकते। डिजिटल दुनिया में इसके लिए भौगोलिक सरहदे मायने नहीं रखती। आम लोगों को या उन्हें  जिन्हे उस सितारे से लगाव नहीं है, ये हरकते हास्यास्पद लग सकती है, परन्तु ये लोग अपने नायक के लिए अपना स्नेह दर्शाने में संकोच नहीं करते।

जनवरी के पहले पखवाड़े में अमरीकी गायक नायक एल्विस प्रेस्ले का जन्म दिन आता है। बीसवीं सदी का यह ऐतिहासिक प्रसिद्द कलाकार महज बयालीस वर्ष के अपने जीवनकाल में  लोकप्रियता के ऐसे मापदंड खड़े कर गया है जो सम्पूर्ण कलाकार बिरादरी के लिए आज भी हिमालय सरीखे विशाल है। पिछले दिनों एल्विस के सैंकड़ों ऑस्ट्रेलियन प्रशंसकों ने दो स्पेशल ट्रेनों में सवार होकर  सिडनी से न्यू साउथ वेल्स तक की यात्रा की। एल्विस की ही तरह हेयर स्टाइल और कपड़ों में सजे ये लोग अपने नायक की स्मृति में होने वाले सालाना उत्सव में भाग लेने जा रहे थे।

एल्विस ऐसे स्टार रहे है जिनके गीतों, धुनों और फैशन की आज तक दुनियाभर में नक़ल की जाती रही है। साठ  सत्तर के दशक के कुछ हिंदी फिल्मो के  नायको और उनके लोकप्रिय गीतों पर एल्विस की छाप स्पस्ट दिखाई देती है

एल्विस की ही तरह अल्प आयु में अलविदा हुए भारतीय अभिनेता गायक कुंदन लाल सहगल का जिक्र किये बगैर गायकी की बात आरंभ नहीं की जा सकती। यद्धपि सहगल के लिए उनके प्रशंसकों का उत्साह सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आता परन्तु उन्हें भुलाये जाने का साहस भी नहीं किया जा सकता। भीड़ में भी पहचानी जा सकने वाली उनकी ‘बैरिटोन’ आवाज सात दशकों से सिने  संगीत प्रेमियों को सुरूर में भिगोती रही है। सहगल साहब ने मात्र छतीस फिल्मों में 185 गीतों से अपनी ऐसी जगह बनाई है जिसे हजारो गीत गाकर भी हथियाया नहीं जा सकता है। सुरीले कालातीत और मधुर गीतों के लिए आज भी नियमित रूप से  सुने जाने वाले रेडियो स्टेशन ‘रेडियो सीलोन’ की सुबह की सभा का समापन आज भी के एल सहगल के गीत से ही होता है। एक महान गायक को इससे बेहतर श्रद्धांजलि नहीं हो सकती।

अमिताभ बच्चन यूँ तो अपने ब्लॉग की मदद से अपने प्रशंसकों से जुड़े हुए है परन्तु रविवार का दिन उनके प्रशंसकों के लिए त्यौहार की तरह होता है। अगर बिग बी इस दिन मुंबई में है तो ‘प्रतिक्षा’ के बाहर हजारों की संख्या में एकत्र अपने प्रशंसकों का अभिवादन स्वीकारने जरूर उपस्थित होते है। किशोर कुमार के प्रशंसक उनकी मृत्यु के तीन दशक बाद भी खंडवा में उनकी समाधि पर जन्मदिवस और पुण्यतिथि मनाने जुटते है। अलबेले गायक नायक को उनके पसंदीदा ‘पोहे -जलेबी’ का भोग लगाकर याद किया जाता है। सलमान ‘गैलेक्सी अपार्टमेंट’ से तो शाहरुख़ ‘मन्नत’ की बालकनी से अपने फैंस को दर्शन देते है।

दक्षिण के अभिनेता इस मामले में ज्यादा किस्मत वाले है कि उनके प्रशंसकों ने  वहां व्यवस्थित तरीके से खुद को संगठित किया हुआ है। रजनीकांत हो या कमल हासन  दोनों के ही प्रशंसको ने सैंकड़ों की संख्या में ‘फैन क्लब’ बना कर अपने नायकों को देवताओ की तरह पूजनीय बना दिया है।

काल्पनिक पात्र ‘शरलॉक होम्स’ के प्रशंसक आज भी कहानियों में दर्शाये उनके निवास 21 बेकर हाउस के पते पर चिट्ठियां भेजते है। लेखक से ज्यादा उसके बनाये पात्र के लोकप्रिय हो जाने का यह बिरला उदहारण है।

(रजनीश जे जैन की शिक्षा दीक्षा जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय से हुई है. आजकल  वे मध्य प्रदेश के शुजालपुर में रहते हैं और  पत्र -पत्रिकाओं में  विभिन्न मुद्दों पर अपनी महत्वपूर्ण और शोधपरक राय रखते रहते हैं.)

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