पीहू-यह समीक्षा नहीं है!

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रजनीश जे जैन/

पिछले दिनों प्रदर्शित हुई फिल्म ‘पीहू’ अपने धमाकेदार कथानक की वजह से दर्शकों के एक बड़े वर्ग को अपनी और आकर्षित करने में सफल हुई। यद्यपि फिल्म में कोई व्यस्क एक्टर नहीं है पर दो वर्ष की नन्हीं बच्ची मायरा विश्वकर्मा इस फिल्म की वास्तविक स्टार है।

‘पीहू’  दरअसल हमारे बिखरते  पारिवारिक ताने-बाने के खतरनाक परिणामों की झलक भर है। हम समय के जिस दौर से गुज़र रहे हैं उसकी कठोर वास्तविकताओं का यह एक ट्रेलर भर है। इस दौर के नए  माता-पिता में अहम् को लेकर जो गलतफहमियां पनपती हैं उसके क्या दुष्परिणाम हो सकते हैं फिल्म इस बात को डरावने ढंग से दर्शाती है। माता-पिता के बिगड़ते संबंधों का बड़े शहरों में बच्चों पर क्या असर होता और उन्हें किस बात का ध्यान रखना चाहिए जैसे संजीदा मसले पर यह फिल्म चेतावनी देने का प्रयास करती है।

आमतौर पर भारतीय दर्शक इस तरह की फिल्मों के आदी नहीं हैं। इस रोमांचक फिल्म में एक ‘कल्ट फिल्म’ बनने के सभी तत्व मौजूद हैं। फिल्म की कहानी असल घटनाओं पर आधारित है, जिसे दर्शाने का ढंग काफी दिलचस्प है. तीन महीने में चौंसठ घंटे की शूटिंग के बाद सौ मिनिट की फिल्म में बेहद तनाव और धड़कन बढ़ा देने वाले दृश्यों को शामिल किया गया है। पीहू को हॉलीवुड कॉमेडी  फिल्म ‘होम अलोन’ का डरावना रूप भी कहा जा सकता है।

तीन महीने में चौंसठ घंटे की शूटिंग के बाद सौ मिनिट की फिल्म में बेहद तनाव और धड़कन बढ़ा देने वाले  दृश्यों को शामिल किया गया है

नैशनल अवार्ड विनर डॉक्यूमेंट्री ‘कांट टेक दिस शिट एनिमोर’ और ‘मिस टनकपूर हाजिर हों ‘ से पहचान बना चुके विनोद कापरी ने इस फिल्म को लिखने के साथ निर्देशित भी किया है। दो साल की बच्ची से अभिनय कराना बहुत ही चुनौती भरा काम है जिसमें वे काफी हद तक सफल रहे हैं।

अनूठे विषय पर फिल्म बनाकर दर्शकों को रोमांचित कर देने वाले फिल्मकारों को सफलता मिलनी ही चाहिए। पैंतालीस लाख के बजट में बनी ‘पीहू’ बॉक्स ऑफिस पर ढाई  करोड़ कमा चुकी है। फिल्म में कहीं भी हल्का-फुल्का माहौल नहीं है। फिल्म देख रहा दर्शक निश्चित रूप से एक पालक भी होता है और  अकेली पीहू अगले पल कौनसा दुस्साहस कर बैठेगी सोचकर ही उसका मन काँप उठता है। कमजोर और भावुक लोगों के लिए यह फिल्म बिलकुल नहीं है।

(रजनीश जे जैन की शिक्षा दीक्षा जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय से हुई है. आजकल  वे मध्य प्रदेश के शुजालपुर में रहते हैं और  पत्र -पत्रिकाओं में  विभिन्न मुद्दों पर अपनी महत्वपूर्ण और शोधपरक राय रखते रहते हैं.)

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