दो साल के लम्बी लड़ाई के बाद सन्नी देओल अभिनीत ‘मोहल्ला अस्सी’ को मिला ए सर्टिफिकेट, होगी जल्दी रिलीज़

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सौतुक डेस्क/

जब से हिंदी के चुनिन्दा लेखकों में से एक काशीनाथ सिंह की रचना पर एक फिल्म बनाने की घोषणा हुई तभी से साहित्य और सिनेमा के प्रशंसक इस फिल्म का बेसब्री  से इंतज़ार कर रहे हैं. पर उनका इंतज़ार लम्बा होता चला गया क्योंकि यह फिल्म विवाद में फंस गई और सेंसर बोर्ड ने इसे रिलीज़ होने से रोक दिया. लेकिन अब इन सिनेप्रेमियों का इंतज़ार ख़त्म होने वाला है.

दो साल की लम्बी लड़ाई के बाद इस फिल्म को ए सर्टिफिकेट के साथ रिलीज़ करने की इजाज़त मिल गयी है. सेंसर बोर्ड ने फिल्म निर्माताओं को एक सीन हटाने को कहा है. और इस फिल्म के निर्माताइसे होली के पहले रिलीज़ करने के लिए उत्साहित हैं.

फिल्म के निर्माता विनीत तिवारी ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “हमलोग बहुत परेशान थे और तनाव अधिक था पर अब यह उत्साह में बदल गया है और हमलोग जल्दी ही फिल्म को रिलीज़ करनेवाले हैं.”

लम्बी कानूनी लड़ाई के बाद फैसला फिल्म निर्माताओं के पक्ष में आया है और उनकी दलील को सही मा-ना गया है

उन्होंने कहा कि लम्बी कानूनी लड़ाई के बाद फैसला फिल्म निर्माताओं के पक्ष में आया है और उनकी दलील को सही मा-ना गया है. तत्पश्चात सेंसर बोर्ड ने हरी झंडी दी.

इस फिल्म की शूटिंग 2011 में ही शुरू हुई थी. इसके प्रमुख कलाकार सन्नी देओल, साक्षी तंवर और रवि किशन हैं. यह फिल्म काशीनाथ सिंह की पुस्तक काशी का अस्सी पर आधारित है और इस फिल्म का निर्देशन चन्द्र प्रकाश द्विवेदी ने किया है.

इस फिल्म को सर्टिफिकेट के लिए सेंसर बोर्ड के पास मार्च 2016 में ले जाया गया और तभी से फिल्म कानूनी पचड़े में पड़ गयी. सेंसर बोर्ड की एक समिति ने इस फिल्म को रिलीज़ होने से रोक दिया, यह कहते हुए कि इसका विषय गाली-गलौज से भरा पड़ा है और इसमें इंसानों, संस्कृति और धर्म सबका मजाक उड़ाया गया है.

इसके बाद फिल्म के निर्माताओं ने फिल्म सर्टिफिकेट अपीलेट ट्रिब्यूनल के पास अपील की और यहाँ नवम्बर 2016 में इनसे फिल्म में से 10 सीन हटाने को कहा गया. और यह भी कि ट्रिब्यूनल उसके बादफिर से फिल्म का मूल्याङ्कन करेगा. इस आदेश के खिलाफ फिल्म निर्माता दिल्ली उच्च न्यायलय में गए और दावा किया कि यह सारे सीन अगर हटा दिए गए तो इससे फिल्म की कहानी प्रभावित होगी.

अब यह फिल्म सिर्फ एक सीन को हटाने के बाद रिलीज़ होने वाली है. तिवारी ने मीडिया से कहा कि एक सीन है जिसमें सन्नी कुछ गलत शब्द बोलते हैं. अब बस उसी सीन को हटाने को कहा गया है.

यह फिल्म बनारस के घाट, वहाँ के पण्डे और सैलानियों को अपना विषय बनाती है और इसमें दिखाया गया है कि कैसे समय बदलने के साथ बनारस और वहाँ रह रहे पण्डों का जीवन भी बदल रहा है. इसके पहले भी इस फिल्म से एक सीन हटाया गया था जिसमें भगवान शिव के वेश में तैयार एक आदमी गन्दी गाली दे रहा होता है.

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