हरे रामा हरे कृष्णा: एक कालजयी फिल्म के बनने की कहानी!

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रजनीश जे जैन/

हिप्पी- यह शब्द हमारी पीढ़ी के जन्म से कुछ बरस पहले ही चलन में आया था। यह एक जीवन शैली थी जिसमे किसी तरह का बंधन नहीं था। यह मुख्यधारा के खिलाफ उपजे आक्रोश से निर्मित संस्कृति थी जिसका उद्गम अमेरिकी विश्व विद्यालयों के कैंपस से हुआ था। कम्युनिज़म से आतंकित अमेरिका का बैठे ठाले विएतनाम से युद्ध में उलझ जाने पर अमेरिकी युबाओ की अहिंसक प्रतिक्रिया के रूप में उपजा हिप्पी आंदोलन जिसने पहले अमेरिका को अपनी चपेट में लिया और फिर कनाडा होते हुए ब्रिटेन में पसर गया।

रजनीश जे जैन/

इस आंदोलन में शामिल होने वाले युवा अपनी पढाई छोड़ रहे थे! अपनी नौकरियों को अलविदा बोल रहे थे! मर्द दाढ़ी बढ़ा रहे थे तो  महिलाएं परंपरागत ड्रेसेस को छोड़कर उटपटांग कपड़े पहन रही थीन। ये लोग समूह में रहने लगे थे! खानपान इनका शाकाहारी होता था और सभी में एक बात कॉमन थी- संगीत और नशे के सुरूर में जीवन जीना! गौरतलब  है कि बॉब डिलन, बीटल्स, रोलिंग स्टोन जैसे पॉप गायकों ने अपने संगीत और गीतों से हिप्पी जीवन शैली को महिमा मंडित करने में अहम भूमिका निभाई और इसे लोकप्रिय भी बनाया।

सत्तर का दशक आते आते इन लोगों के बीच एक नन्हा सा देश लोकप्रिय होने लगा।  जिसकी आबोहवा पश्चिम के देशों की ही तरह सर्द और खुशनुमा थी। दूसरे यहाँ गांजा, चरस, अफीम के सेवन पर किसी तरह की पाबंदी भी नहीं थी। चुनांचे दुनिया भर के हिप्पी यहाँ पहुँचने लगे! यह देश था- नेपाल।

इन्ही दिनों भारत के एवरग्रीन अभिनेता देव आनद नेपाल आये। उनकी यात्रा दो कारणों से हो रही थी। पहला,  बतौर निर्देशक उनकी पहली फिल्म ‘प्रेम पुजारी’  फ्लॉप हो चुकी थी और निराशा से उबरने के लिए हिमालय की बर्फ आच्छादित चोटियों  की द्रश्यावली उनके मानसिक विचलन को सुकून दे सकती थी! शायद उन्हें अगली फिल्म का आईडिया भी सूझ जाए!  दूसरे,  नेपाल के भावी सम्राट वीरेंद्र के विवाह समारोह में उन्हें बतौर मेहमान आमंत्रित किया गया था!

एक शाम उन्हें अपने एक जर्मन डॉक्यूमेंट्री फिल्म मेकर मित्र क्रिस्चियन डोएरमेर का फोन आया। क्रिस्चियन उन्हें हिप्पियों के ठिकानों पर ले जाना चाहते थे! देव साहब ने देखा सैंकड़ों पश्चिमी युवक युवती एक तंग हॉल में नशे में मदहोश पड़े थे। इन लोगों ने रुद्राक्ष और फूलों की माला पहन रखी थी और लगभग सभी के ललाट पर केसरिया तिलक लगा हुआ था! अधिकांश ने बड़े ग्लास वाले गॉगल्स भी लगा रखे थे। इन लोगों में एक भारतीय मूल की लड़की भी थी। उन्होंने खुद से सवाल किया कि यह गैर अंग्रेज लड़की यहाँ क्या कर रही है?  अब देव साहब की दिलचस्पी इस सारे प्रसंग में बढ़ने लगी थी। अगले दिन उन्होंने अपने होटल के बारटेंडर की मदद से इस लड़की को मिलने के लिए बुलाया। देव  साहब को यह जानकार आश्चर्य हुआ कि भारतीय मूल की यह लड़की जेनिस कनाडा की रहने वाली है और यहाँ भागकर आई है !

देव के मन में अपनी अगली फिल्म की कहानी बनने लगी थी। अगले दिन उन्होंने युवराज वीरेंद्र से देश लौटने की अनुमति यह कहते हुए मांगी कि उन्हें एक कहानी का आइडिया आया है और वे  जल्द से जल्द इसे पूरा करना चाहते है। युबराज के आग्रह पर उन्होंने वह आईडिया उन्हें सुना भी दिया। अब चकित होने की बारी देव साहब की थी जब  युबराज वीरेंद्र ने उनसे कहा कि यह फिल्म सिर्फ नेपाल में ही बनना संभव क्योंकि इतने हिप्पी आपको कही और नहीं मिलेंगे और रियल लोकेशन भी  मिलेगी।

युवराज के आग्रह पर देव आनंद तीन और दिन उनके पोखरा स्थित होटल में ठहरे व अपनी फिल्म की कहानी लिखकर पूर्ण की। इस तरह एक बेहद लोकप्रिय और कालजयी  फिल्म ‘हरे रामा हरे कृष्णा’ अस्तित्व में आई। फिल्म में केंद्रीय रोल जीनत अमान का था जो नायक देव आनद के रोल से भी बड़ा था। होटल के बार में देव साहब जिस लड़की जेनिस से मिले थे वही नाम फिल्म में उन्होंने जीनत अमान को दिया !

‘हरे रामा हरे कृष्णा’ के गीत और मादक संगीत आज भी चलते पैरो को ठहरा देते है।  ‘ फूलों का तारों का सबका कहना है, एक हजारों में मेरी बहना है’ – गीत बजाये बगैर कोई भी रक्षा बंधन का त्यौहार अपनी सार्थकता नहीं पाता। इस वर्ष ‘ हरे रामा हरे कृष्णा’  को प्रदर्शित हुए पचास वर्ष पूर्ण हुए है !

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(रजनीश जे जैन की शिक्षा दीक्षा जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय से हुई है. आजकल वे मध्य प्रदेश के शुजालपुर में रहते हैं और पत्र -पत्रिकाओं में विभिन्न मुद्दों पर अपनी महत्वपूर्ण और शोधपरक राय रखते रहते हैं।)

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