‘माई नेम इस बांड, जेम्स बांड’ कहने वाला मसीहा आएगा

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रजनीश जे जैन/

रजनीश जे जैन

वह इकलौता  जासूस है जो कभी अपनी पहचान नहीं छुपाता। उसे हत्या करने का लाइसेंस मिला हुआ है। अब तक उस पर चार हजार गोलियां चल चुकी है और 365 खलनायको को वह मौत के घाट उतार चुका है । वह ब्रिटिश नागरिक है और इंग्लैंड की रानी के प्रति वफादार है। उसका कार्यक्षेत्र में पूरी दुनिया शामिल है। एकबार वह भारत भी आ चुका है (1983 ऑक्टोपूसी )। वह जिस किसी भी बार में जाता है  उसका बारमैन उसे नाम से पुकारता है और उसके पसंद की मार्टीनी पेश करता है। अपने दुश्मन को भी वह अपना नाम बताता है ‘माई नेम इस बॉण्ड! जेम्स बॉण्ड!

दुनिया भर के सिनेप्रेमियों का जाना  पहचाना इयान फ्लेमिंग द्वारा रचित काल्पनिक पात्र अपने हैरत अंगेज कारनामों के कारण पिछले पचास वर्षों से दर्शकों का मनोरंजन करता रहा है। 1962 से लेकर 2015 तक जेम्स बॉन्ड 24 फिल्मों में अवतरित हो चुका है।

जेम्स की शुरुआती फिल्मों में भी स्टंट और ट्रिक फोटोग्राफी पर विशेष ध्यान दिया जाता था क्योंकि स्थानीय भाषा मे डबिंग न होने के बावजूद भी गैर अंग्रेजी भाषाई देशो में वे चाव से देखी जाती थी।

इस वर्ष दिसंबर से बॉण्ड सीरीज की पच्चीसवी फिल्म का फिल्मांकन आरम्भ होना था और अगले वर्ष नवंबर में यह फिल्म रिलीज़ होनी थी परन्तु फिलहाल जो परिस्तिथियाँ  बनी है उसके चलते यह फिल्म संभवतः अगले वर्ष शायद ही पूरी हो पाये।  अभी तक इस फ़िल्म को निर्देशित करने की जिम्मेदारी डेनी बॉयल ( स्लमडॉग मिलेनियर) को सौपी गई थी परंतु अचानक उन्होंने निर्माता कंपनी इयोन प्रोडक्शन के साथ कुछ ‘रचनात्मक मतभेदों’ के चलते फ़िल्म छोड़ दी।

इस बार संभावना थी कि बॉण्ड की भूमिका में डेनियल क्रैग को कुछ नया करते हुए देखा जा सकता है। उम्मीद थी कि अपनी एश्टन  मार्टिन कार से वे कुछ अविश्वसनीय स्टंट करते नजर आएंगे और एक बार फिर दुनिया को बचाएँगे। फिल्मों की सबसे लोकप्रिय फ्रँचाइज़ी में बॉण्ड का किरदार डेनियल क्रैग के आलावा छः अभिनेता निभा चुके है। अंतर्मुखी, भावहीन चेहरे वाला यह नायक सबसे अधिक समय तक जेम्स बॉण्ड बने रहने का रिकॉर्ड बना चूका है। तेरह  वर्ष !

हरेक चरित्र का अपना एक काल चक्र होता है। बॉन्ड फिल्म के ताजा विवाद से यही लगता है कि डेनियल क्रैग का समय पूरा हो चुका है

इन तेरह वर्षों में हम दो सुपरमैन, दो बैटमैन, तीन स्पाइडरमैन, स्टारशिप इंटरप्राइजेस की पूरी नई  पीढ़ी , देख चुके है। यहाँ तक की एक्स मेन (ह्यूज जैकमैन) भी अपने स्टील के पंजे को खूंटी पर टांग कर कैरेक्टर रोल करने लगे है।

गौरतलब है कि  हरेक चरित्र का अपना एक काल चक्र होता है। बॉन्ड फिल्म के ताजा विवाद से यही लगता है कि डेनियल क्रैग का समय पूरा हो चुका है और वे शायद ही अगली बार  जेम्स बॉन्ड बने नजर आये! यद्यपि उम्र के लिहाज से वे अपने पूर्ववर्ती जेम्स बॉन्ड में  सबसे कम उम्र के है। छप्पन वर्षीय टॉम क्रूस अपनी हालिया रिलीज ‘मिशन इम्पॉसिबल – फॉल आउट’ में जितने चुस्त दुरुस्त नजर आए है उस लिहाज से पचास वर्षीय  क्रेग के लिए उम्मीद है कि वे एक बार और अपना ब्लैक टैक्सेडो पहने नजर आ सकते है।

जेम्स बांड फिल्मों की सबसे बड़ी विशेषता है उसके कथानक के  बारे में दर्शक पहले से ही सब कुछ जानता है। पाँचों महाद्वीपों में फैले उसके प्रशंसक  एक बात अच्छी तरह जानते है कि उनका नायक कभी मरेगा नहीं। उसकी फिल्मों का कथानक कई देशों में फैला हुआ होता है। भव्यता उसकी फिल्मों का दूसरा नाम होती है। उसके  टाइटल सांग से लेकर क्लाइमेक्स के विध्वंस तक सब कुछ भव्य और लुभावना होता है। दर्शक को हमेशा पता होता है कि  उसकी असिस्टेंट ‘मनी पैनी’ हमेशा उसकी मदद करेगी , क्यू उसके लिए आधुनिक गेजेट्स बनायगे,  उसकी बॉस एम् उसे खतरनाक मिशन पर भेजते हुए एक बार अवश्य कहेगी  ‘जिन्दा लौट कर आना बॉन्ड !

पहली ही नजर में वह नायिका की आंखों में उतर जाता  है। जेम्स से आप भावुक प्रेमी की उम्मीद नहीं कर सकते,  क्योंकि हर बार उसकी नायिकाएँ अलग होती है  इसलिए वह हमेशा चिरकुमार नजर आता है।

अब कयास ही लगाये जा सकते है कि कोई और अभिनेता  जेम्स बॉन्ड बन कर लौटेगा। क्योंकि जिस नाम की वजह से बॉक्स ऑफिस पर धन बरसता है उसे ऐसे ही नही छोड़ा जा सकता है। सनद रहे, जेम्स बॉन्ड मरता नही , जेम्स बॉन्ड  मरा नही करते वे अपने प्रशंसकों के मन मे अमर रहते है ।

 

(रजनीश जे जैन की शिक्षा दीक्षा जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय से हुई है. आजकल  वे मध्य प्रदेश के शुजालपुर में रहते हैं और  पत्र -पत्रिकाओं में  विभिन्न मुद्दों पर अपनी महत्वपूर्ण और शोधपरक राय रखते रहते हैं.)

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