सितारों का परोपकार

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रजनीश जे जैन/

रजनीश जे जैन/

हिंदी फिल्मों में अभिनय करके रोजी रोटी कमाने वाले अधिंकांश अभिनेता सामान्य बातचीत में भी अंग्रेजी का धड्ड्ले से प्रयोग करते है। इन लोगों को किसी फिल्म अवार्ड में पुरस्कार लेते देखना भी दिलचस्प होता है  यहाँ वे सिर्फ अंग्रेजी में ही बोलते नजर आना पसंद करते है! हॉलीवुड के अंधानुकरण के चलते  पाश्चात्य शैली में खाना, पीना, पहनना, रहना जैसी  बातों को भारतीय सिने सितारों ने जस का तस आत्मसात कर लिया है। हिंदी फिल्मो की कहानियाँ अंग्रेजी में लिखी जाती है, स्क्रिप्ट भी अंग्रेजी में ही पढ़ने को दी जाती है, निर्देशक अभिनेता को उसकी भूमिका भी अंग्रेजी में ही सुनाता समझाता है। इन सब बातों का घरेलु दर्शक के मानस पर गहरा असर होता है।  वह मान बैठता है कि उसका चहेता नायक\ नायिका हॉलीवुड से कमतर नहीं है। पर ऐसा है नहीं। हॉलीवुड सितारों या सामान्य अभिनेताओं की दीगर गतिविधियों के बारे में भारतीय दर्शक कम ही जान पाते है।

पच्चीस प्रतिशत घोषित नास्तिक जनसँख्या वाला अमेरिकी समाज कई क्षेत्रों में बाकी दुनिया से बहुत आगे है। घोर उपभोक्ता वादी सोच और परोपकार के आग्रह के दो परस्पर विरोधी धुरों के मध्य संतुलन बनाती अमेरिकन जीवन शैली अमेरिकन  फिल्मों में भी दिखाई देती है और उन फिल्मों में काम करने वाले अभिनेताओं के निजी जीवन में भी।

कुछ लोगों के लिए जेन फोंडा का नाम अनजाना नहीं है। हॉलीवुड की सेवा निवृत इक्यासी वर्षीय यह अभिनेत्री हाल ही गिरफ्तार होकर जमानत पर बाहर आई है।  जेल से रिहा होने पर उन्होंने पत्रकारों को बताया कि वे चाहती है कि हर शुक्रवार को उन्हें गिरफ्तार किया जाए! उनका जुर्म इतना था कि पर्यावरण को प्रदूषित करने में अहम् भूमिका निभा रहे जीवाश्म ईंधन (पेट्रोल) के उपयोग को कम करने का आग्रह करते  हुए इलेक्ट्रिक ईंधन पर निर्भरता बढ़ाने के लिए आयोजित आंदोलन में शिरकत कर रही थी। स्वास्थ को लेकर जागरूक  भारतीय दर्शकों के लिए इस अभिनेत्री को जानना इसलिए भी जरुरी है कि अस्सी के दशक में स्वास्थ को लेकर जागरूकता बनाने के लिए इन्होने अपने योग करते हुए वीडिओ जारी किये थे जिन्हे दुनिया भर में सराहा गया था।  इन्ही वीडियो से प्रेरणा लेकर एक समय ‘काली बतख’ कही गई रेखा ने अपना कायाकल्प आरंभ किया था जो उन्हें आज भी मोहक बनाये हुए है।

कुछ लोगों के लिए जेन फोंडा का नाम अनजाना नहीं है। हॉलीवुड की सेवा निवृत इक्यासी वर्षीय यह अभिनेत्री हाल ही गिरफ्तार होकर जमानत पर बाहर आई है

ओशेन इलेवन और ग्रेविटी जैसी फिल्म के नायक जॉर्ज क्लूनी, गायिका टेलर स्विफ्ट, एंजेलिना जोली, स्टंट एक्शन फिल्मों के सितारे जैकी चेन, विल स्मिथ अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा जनकल्याण के लिए दान करने में नहीं हिचकिचाते। ‘स्पीड’  और ‘मेट्रिक्स’ जैसी फिल्मों से लोकप्रियता की सीढ़ियां चढ़ने वाले अभिनेता केन्यु रीव जितना भी धन कमाते है उसका नब्बे प्रतिशत परोपकार के लिए दान कर देते है।

टाइटेनिक फिल्म से दुनिया भर में मशहूर हुए लिओनार्दो दा केप्रियो अपने करीयर की दूसरी फिल्म से ही समाज सेवा में व्यस्त हो गए है। एक बार पहचान बनाने और अकूत धन कमाने के बाद अब वे जलवायु परिवर्तन के खतरों से दुनिया को आगाह करने के काम में जुट गए है। लिओनार्दो जानते है कि उनकी सितारा हैसियत दुनिया को उनकी बाते सुनने के लिए बाध्य कर देती है लिहाजा वे हरेक  वैश्विक मंच का हिस्सा बनते है। दाओस का इकोनॉमिक फोरम हो या पेरिस सम्मलेन या मेनहट्टन में चार लाख लोगों का आंदोलन वे हर जगह नजर आते है। पर्यावरण को समर्पित इस अभिनेता के जज्बे को इस तथ्य  से भी समझा जा सकता है कि वे पूरी तरह शाकाहारी बन चुके है और अपने घर की ऊर्जा जरुरत को सौर ऊर्जा से पूरा करते है व् परिवहन के लिए सिर्फ इलेक्ट्रिक कारों का उपयोग करते है !

सिने  दर्शक बहुत हद तक अपने प्रिय नायक की जीवन शैली का अनुसरण करने की कोशिश करता है। अधिकांश लोग धूम्रपान और नशे की प्रेरणा परदे की छवियों से ही लेते है।  ऐसे में  नायक अगर अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति सचेत रहता है तो भले ही वह पुरे समाज को न बदल पाये परंतु एक समूह को बदलने का गौरव तो हासिल कर ही सकता है।

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(रजनीश जे जैन की शिक्षा दीक्षा जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय से हुई है. आजकल वे मध्य प्रदेश के शुजालपुर में रहते हैं और पत्र -पत्रिकाओं में विभिन्न मुद्दों पर अपनी महत्वपूर्ण और शोधपरक राय रखते रहते हैं.)

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