उम्मीदों से भरा 2020

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रजनीश जे जैन/

रजनीश जे जैन/

किसी ने कहा है कि बीते समय की समीक्षा से अतीत रत्तीभर भी नहीं बदलेगा परंतु इससे जो अंतरदृष्टि और समझ मिलेगी वह शायद भविष्य बदलकर रख दे।सिनेमाई परदे पर गत वर्ष बहुत कुछ गुजरा।  इसने कई ऊंचाइयों को भी छुआ तो कही पलटकर गुजरे को थामने की कोशिश भी की!

बहुत से दर्शकों ने इस बात को गंभीरता से महसूस किया होगा कि भारतीय सिनेमा से परिवार नाम की संस्था लगभग बिदा ले चुकी है। संयुक्त परिवार का चित्रण तो दशकों पहले ही लुप्त हो चला था लेकिन अब तो एकल परिवार भी कभी कभार ही नजर आते है। परिवार के साथ रिश्ते नाते भी गायब हुए। इकोनॉमी  के ग्लोबल होने का असर फिल्मों की कहानियों पर भी पड़ा। कहानियों से गाँव लगभग नदारद हो गए। बड़े शहरों से निकलकर कहानियां छोटे कस्बों का रुख करने लगी। आयुष्यमान खुराना की अधिकांश फिल्मे मध्यम शहरों को केंद्र में रखकर बुनी गई।

यद्यपि टीवी के परदे पर परिवार का अब भी जबरदस्त बोलबाला है परन्तु चकाचौंध और षड्यंत्र से भरा ऐसा परिवार वास्तविक जीवन में शायद ही किसी ने देखा हो !

गुजरे समय ने जहाँ कई चेहरों को पार्श्व में जाते देखा वही कई संभावना से भरी प्रतिभाओ के आगमन का मार्ग भी प्रशस्त किया। राजकुमार राव, पंकज त्रिपाठी, नवाजुद्दीन सिद्दीकी  जैसे हरफनमौला अभिनेताओं के पाँव मजबूती से जमते दिखाई दिए। इस बरस भी स्टार किड्स को उनके जमे जमाये पेरेंट्स ने आसमान में टांकने की कोशिश की परंतु हमेशा की तरह एक दो को छोड़ अधिकांश ने निराश ही किया। अच्छी शक्ल मिल जाना सौभाग्य हो सकता है लेकिन प्रतिभा की फोटोकॉपी कर पाना थ्री डी प्रिंटर के युग में भी मुश्किल काम सिद्ध हुआ।

2019 में बनकर प्रदर्शित नहीं हो पाई फिल्मे अब नए साल में दर्शकों से रूबरू होने जा रही है। जनवरी के दूसरे  ही हफ्ते में अजय देवगन की पीरियड फिल्म ‘तान्हाजी’ और एसिड अटैक की शिकार महिलाओ की सामाजिक और मानसिक यंत्रणा को मुददा बनाती दीपिका पादुकोण द्वारा निर्मित व अभिनीत ‘छपाक’ एक ही दिन प्रदर्शित हो रही है। जनवरी में ही कंगना रणावत की ‘ पंगा ‘ और राजकुमार राव की  ‘ छलांग ‘ एक ही दिन सिनेमाघर में पहुँच रही है।

कंगना की फिल्म को अश्विनी तिवारी अय्यर ने तो राजकुमार राव की फिल्म को हंसल मेहता ने निर्देशित किया है। फरवरी में विधुविनोद चोपड़ा की ‘शिकारा’ कश्मीरी पंडितो के दर्द को शब्द चित्र देती नजर आएगी।


2020 में कई टेलेंटेड निर्देशकों को अपना हुनर एक बार फिर दिखाने का मौका मिल रहा है। अनुभव सिंहा , शूजित सरकार, राकेश ओमप्रकाश मेहरा, अद्वैत चंदन, चंद्रप्रकाश द्धिवेदी, इम्तयाज अली, महेश भट्ट, अनुराग बासु, कबीर खान जैसे प्रयोगधर्मी फिल्मकारों की फिल्मे दर्शकों की कल्पना और अनुभव को नए क्षितिज दिखाने वाली है।

दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से नवाजे गए अमिताभ बच्चन ने स्पष्ट शब्दों में अपने रिटायरमेंट को टाल  दिया है। इस वर्ष अभिनय के विविध आयामों से सजी पांच फिल्मे प्रदर्शित होने वाली है। संभावना है कि बिग बी की  अप्रैल में ‘ गुलाबो सिताबो ‘ और ‘ चेहरे ‘ एक ही दिन प्रदर्शित हो सकती है। इस ईद पर सलमान खान ‘ राधे ‘ में दिखाई देंगे परंतु उन्हें टक्कर दे सकते है अक्षय कुमार अपने ‘लक्ष्मी बॉम्ब’ से!

हमेशा की तरह इस वर्ष भी दर्जन भर  दक्षिण भारतीय फिल्मों के रीमेक हिंदी में बनकर आ रहे है। कुछ फिल्मे अपने सीक्वल लेकर आरही है तो कुछ बायोपिक के रूप में रिलीज़ होने वाली है। सत्यमेव जयते 2 में जॉन अब्राहम तो हंगामा 2 में परेश रावल खुद को दोहराते नजर आएंगे। कुल मिलाकर 2020 अच्छी फिल्मों की संभावना से भरा वर्ष साबित हो सकता है।

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(रजनीश जे जैन की शिक्षा दीक्षा जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय से हुई है. आजकल वे मध्य प्रदेश के शुजालपुर में रहते हैं और पत्र -पत्रिकाओं में विभिन्न मुद्दों पर अपनी महत्वपूर्ण और शोधपरक राय रखते रहते हैं.)

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