एनाबेली क्रिएशन: सजीव डर पैदा करता सिनेमा

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उमंग कुमार/

भारत में पिछले सप्ताह रिलीज़ हुई कंजूरिंग सीरीज की चौथी फिल्म एनाबेली क्रिएशन कई थीम को समेटे हुए है.  इनमें सबसे महत्वपूर्ण है अलौकिक ताकत को रोकने में धर्म का बुरे तरीके से असफल होना. अमूमन हॉरर फ़िल्में धर्म को ही आखिरी हथियार के तौर पर स्थापित करती दिखती हैं.

निर्देशक डेविड सैंडबर्ग की यह फिल्म अब तक करीब सौ मिलियन डॉलर कमा चुकी है. इस फिल्म में निर्देशक एनाबेली गुड़िया का बेहतरीन इस्तेमाल करते  हैं. इस गुड़िया को अब तक के हॉरर फिल्मों के इतिहास में इस्तेमाल हुए अति-प्रभावशाली निर्जीव वस्तुओँ में से एक माना जा रहा है.

यह फिल्म एक भूतहा घर पर आधारित है जहाँ कुछ अनाथ लड़कियाँ एक ईसाई नन के साथ आश्रय तलाश करते हुए आ पहुंचती हैं. क्योंकि तब तक उनका अपना अनाथालय बंद हो चुका होता है.

यह भूतहा घर उस मूलेंस परिवार का है जिन्होंने 12 साल पहले अपनी एक मासूम सी बच्ची बी को सड़क दुर्घटना में खो दिया था. अपनी बच्ची से जुड़ी सारी चीजों को मुलेन्स एक कमरे में बंद कर देते हैं.

इस कहानी की शुरुआत तब होती है जब इस समूह की एक पोलियो प्रभावित लड़की जेनिस, बी के तालाबंद कमरे को खुला पाती है. उसके कमरे में प्रवेश करते ही भयावह घटनाएं शुरू हो जाती हैं. एक एक कर सभी पात्र इन घटनाओं की चपेट में आ जाते हैं.

यद्यपि यह फिल्म भी पुरानी भूतहा फिल्मों के ही फार्मूला पर बनाई गई है पर इसका निर्देशन कमाल है. इस फिल्म की सबसे मजबूत कड़ी है इसकी दृश्यात्मक भाषा. इसका बेहतरीन इस्तेमाल कर निर्देशक दर्शकों को डराने में बहुत हद तक सफल भी रहे हैं.

फिल्म थोड़ी (109 मिनट ) लम्बी है और कहीं कहीं पकड़ खो देती है. लेकिन इस श्रेणी की अन्य फिल्मों के मुक़ाबले यह फिल्म ज़्यादा रोमांच पैदा करती है. अगर आप हॉरर फिल्मों में रुचि रखते हैं  तो ये फिल्म आपको बेशक पसंद आएगी.

 

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