पाँच फ़िल्में जो शुरू में तो फ्लॉप हुईं पर बाद में सबने उनका लोहा माना

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शिखा कौशिक/ 

बॉलीवुड में हर दौर में अच्छी फिल्में बनती रहीं हैं. उनमें से कुछ का नसीब अच्छा रहा और वे काफी हिट हुईं तो कुछ अपने बजट, छोटे स्टारकास्ट या समय से थोड़ा आगे होने की वजह से नहीं चलीं. लेकिन इनमें से कुछ फिल्में ऐसी भी रहीं जो अपने रिलीज़ के समय तो फ्लॉप रहीं पर आगे चलकर क्लासिक के श्रेणी में आ गईं. और ये फिल्में आज भी दर्शकों को नयेपन का एहसास कराती हैं, और अब भी दर्शकों की फेवरेट फिल्मों की लिस्ट में हैं.

मेरा नाम जोकर (1970)

यह राजकपूर की सबसे मह्त्वकाक्षी फिल्मों में से एक थी जिसको बनाने में उन्हें छः साल के करीब लग गए. एक जोकर के जीवन पर आधारित इस फिल्म से ऋषि कपूर ने अपने फ़िल्मी करियर की शुरुआत की. यूँ तो राजकपूर को इस फिल्म के लिए बेस्ट डायरेक्टर का फिल्मफेयर अवार्ड भी मिला, पर जब यह फिल्म रिलीज़ हुई थी तो बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह पिट गयी. इसके लिए यही कहा जा सकता है कि यह फिल्म शायद समय से पहले बन गयी जिसके लिए अभी दर्शक तैयार नहीं थे. लेकिन अब यह फिल्म ऐसे श्रेणी में शुमार है जिसको आल टाइम हिट कहते हैं.

जाने भी दो यारो (1983)

रिलीज़ होने के बाद बॉक्स ऑफिस पर इस फिल्म के पिटने की वजह का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है. यह फिल्म व्यंग से भरी हुई थी. अस्सी के दशक में दर्शक इस फिल्म के व्यंग्यात्मक भाव को शायद नहीं समझ पाए. जब दर्शकों ने इसे नहीं समझा मतलब फिल्म फ्लॉप. यह फिल्म दो फोटोग्राफर के जीवन पर आधारित है. ये दोनों फोटोग्राफर कुछ बड़े की उम्मीद में भ्रष्टाचार की दुनिया में फंस जाते हैं. इस फिल्म में  कलाकार नसीरुद्दीन शाह, ओम पुरी, रवि बासवानी, पंकज कपूर जैसे दिग्गज कलाकारों ने अपनी प्रतिभा दिखाई थी. फिल्म आलोचकों द्वारा काफी पसंद की गयी और काफी अवार्ड भी जीते, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर कुछ कमाल नहीं दिखा पायी. लेकिन कुछ दशकों बाद ही सही, कुंदन शाह द्वारा निर्देशित यह फिल्म दर्शकों को अच्छी लगने लगी. इस फिल्म की पटकथा भी कुंदन शाह ने ही लिखी थी.

अंदाज अपना अपना (1994)

यह सोच पाना भी मुश्किल है कि इस तरह हास्य से भरपूर फिल्म बॉक्स ऑफिस पर पिट कैसे सकती है. आमिर खान और सलमान खान की बेहतरीन अदाकारी और इस फिल्म के स्क्रिप्ट ने हास्य का जो समां बांधा है कि कईयों ने तो इस फिल्म को बीस-पच्चीस बार देखा होगा. इस फिल्म में करिश्मा कपूर और रवीना टंडन ने भी बेहतरीन अदाकारी दिखाई है. यह एक ऐसी फिल्म है जो नब्बे के दशक का हर युवा याद रखना चाहेगा. हास्य के तलाश में आज के युवा भी इस फिल्म के समानांतर कुछ नहीं खोज सकते. लेकिन यह फिल्म बॉक्स ऑफिस के आंकड़ों के अनुसार फ्लॉप की श्रेणी में आती है. राजकुमार संतोषी ने इस फिल्म का निर्देशन किया था.

दिल से (1998)

मणिरत्नम निर्देशित इस फिल्म में क्या नहीं था. स्टार कलाकार, अच्छी पटकथा, अच्छा विषय, ए आर रहमान का संगीत जिसका जादू अब तक कायम है. इतने सबके बावजूद यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर पिट गयी थी. ये फिल्म अपने सभी पक्ष के साथ समय से आगे की फिल्म थी और शायद यही वजह रही   कि दर्शकों ने उस समय उफान पर चल रहे शाहरुख खान और मनीषा कोईराला जैसे कलाकारों के होने के बावजूद भी इस फिल्म को नकार दिया. इस फिल्म की सहायक अभिनेत्री प्रीति जिंटा ने आगे चलकर बॉलीवुड में बड़ा मुकाम हासिल किया. इस फिल्म ने अपने संगीत और कोरियोग्राफी के लिए कई अवार्ड भी हासिल किये.

ओये लकी लकी ओये (2008)

देव डी जैसे मॉडर्न क्लासिक के आने के एक साल पहले यह फिल्म रिलीज़ हुई थी जिसमें अभय देओल ने बेहतरीन काम किया था. अगर लोगों को जरा भी इसका भान होता कि ओये लकी.. के कलाकार अभय देओल और ऋचा चढ्ढा आगे जाकर बॉलीवुड के बड़े स्टार बनने वाले हैं तो शायद दर्शकों के लिए यह फिल्म कुछ और होती. छोटे बजट और नए कलाकारों के साथ आई फ़िल्में इस लिए भी दर्शकों का प्यार नहीं पाती क्योंकि उनके हिसाब से उनसे उम्मीद कम होती हैं और इसलिए वे लोग इसे देखने नहीं जाते. बहरहाल आज के समय में दिबाकर बनर्जी द्वारा निर्देशित यह फिल्म, सिनेमा प्रेमियों की पसंदीदा फिल्मों में से एक है.

 

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