रेप रिवेंज पर बनी पांच ख़ास फिल्मे

0

नब्बे  के दशक में फिल्मकारों का सबसे पसंदीदा विषय था बलात्कार और फिर बदला.  हिंसा से भरी ऐसी फिल्में सामान्यतः बॉक्स ऑफिस पर सफलता की कुंजी मानी जाती थी. धीरे-धीरे नए ट्रेंड आने शुरू हुए. कॉमेडी, खेल इत्यादि से भी फिल्मकार सिनेमाहाल में लोगों को बैठाए रखने में सफल होने लगे. थोड़ी व्यावहारिक सी दिखने वाली फिल्में बनने लग गयीं. इधर हाल में बॉलीवुड ने पुनः ‘रेप रिवेंज’ की तरफ अपना रुझान दिखाना शुरू किया है. पहले आई काबिल, फिर मॉम और अब भूमि. इन सारी फिल्मों पर बात हो ही रही है. इस मौके पर सौतुक लाया है आपके लिए ‘रेप और रिवेंज’ पर बनी अब तक की पांच खास फिल्मे.[spacer height=”20px”]

 

बैंडिट क्वीन (1994)

डकैती से राजनीति में आने वाली चर्चित फूलन देवी के जीवन पर आधारित यह फिल्म बलात्कार और उसके बाद के बदले को अपनी थीम बनाती है. इस फिल्म में अत्यधिक हिंसा और सामूहिक बलत्कार के चित्रण के लिए निर्देशक शेखर कपूर को सेंसर बोर्ड से ज़बरदस्त विरोध झेलना पड़ा था. महज़ यह सोच कि किसी के जीवन में सचमुच यह या ऐसा कुछ हुआ था, किसी का दम फुलाने के लिए काफी है. इस फिल्म में फूलन देवी का बलात्कार लगभग पूरा गाँव करता है और बाद में डाकू बनने के बाद यह महिला पूरे गाँव से बदला लेती है.[spacer height=”20px”]

लास्ट हाउस ऑन द लेफ्ट (1972)[spacer height=”20px”]

हॉलीवुड की यह फिल्म दो ग़ैर-ज़िम्मेदार लड़कियों के जीवन पर आधारित फिल्म है. इसमें ये दोनों लड़कियां एक बार गलत समय में गलत जगह पर पहुँच जाती हैं. जहां इनका बलात्कार होता और फिर गोली मार दी जाती है. इसमें से एक लड़की बच जाती है और जब अपने घर पहुंचती है जहां संयोग से बलात्कार करने वाले लोग छिपे रहते हैं. फिर हत्याओं का सिलसिला शुरू होता है. इस फिल्म की सबसे बड़ी खासियत यह है कि बलात्कार को दिखाने के लिए इसमें पीड़ित महिलाओं का गलत चित्रण नहीं किया गया है. इस फिल्म का निर्देशन डेनिस इलिएदिस ने किया था.[spacer height=”20px”]

दुश्मन (1998)[spacer height=”20px”]

तनुजा चंद्रा निर्देशित यह फिल्म आशुतोष राणा के एक मानसिक तौर पर बीमार व्यक्ति के अभिनय के लिए याद की जायेगी. इसमें राणा सेक्सुअली बीमार हैं और इस वजह से लड़कियों का पीछा करते हैं. बलात्कार और फिर हत्या. इसमें काजोल डबल रोल में हैं जिसमे एक काजोल आशुतोष राणा की शिकार बनती है. दूसरी काजोल अंधे संजय दत्त से कुछ गुर सीखकर फिर राणा का मुकाबला करती है. यद्यपि इस फिल्म के आखिर में विलेन की हार होती है जैसा कि अमूमन होता है पर इस फिल्म को देखकर आपको आशुतोष राणा के किरदार से घृणा हो जायेगी.[spacer height=”20px”]

दी वर्जिन स्प्रिंग (1960)[spacer height=”20px”]

विश्वविख्यात इंगमार बर्गमैन के निर्देशन में बलात्कार और बदले के थीम पर बनी यह फिल्म अद्भूत है. इस फिल्म में एक घर की दुलारी लड़की और उसकी नौकरानी चर्च में कैंडल जलाने जाते हैं पर उसमें से एक ही लौटती है. दो अधेड़ मिलकर उस 15 साल की लड़की का बलात्कार करते हैं और उसे मार देते हैं. इसके बाद उस लड़की का पिता उनलोगों से बदला लेता है और उनलोगों की हत्या करता है. इस हत्या के बाद वो ईश्वर से सवाल करने लगता है कि आखिर उसकी बेटी के साथ ये सब क्यों हुआ जिसकी वजह से उसे खुद लोगों का खून करना पड़ा. यह फिल्म स्वीडिश भाषा में बनी है.[spacer height=”20px”]

जख्मी औरत (1988)[spacer height=”20px”]

डिम्पल कपाडिया अभिनीत इस फिल्म में इंस्पेक्टर किरण दत्त का दो लोग बुरी तरह से बलात्कार करते हैं. लेकिन साक्ष्य की कमी की वजह से दोनों कोर्ट से बरी हो जाते हैं. इसके बाद किरण कानून खुद हाथ में लेकर इनसे हिसाब करती है. इस फिल्म का जिक्र इसलिए भी जरुरी है क्योंकि हाल में आई दो फिल्में रवीना टंडन अभिनीत मातृ और श्रीदेवी अभिनीत मॉम के बारे में कहा जाता है कि ये दोनों फिल्मे इसी फिल्म आइडिया पर बनी आज की फिल्में हैं. इस फिल्म का निर्देशन अवतार भोगल ने किया था.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here